वाराणसी में प्रशासन की लापरवाही से काशी विश्वनाथ मंदिर के पास सैकड़ों वर्ष पुराना अक्षयवट वृक्ष गिरा, ये है मान्यता

वाराणसी: काशी विश्वनाथ कॉरिडोर के कार्य के दौरान मंदिर के बगल में स्थित ऐतिहासिक अक्षयवट वृक्ष गिर गया है

वाराणसी: काशी विश्वनाथ कॉरिडोर के कार्य के दौरान मंदिर के बगल में स्थित ऐतिहासिक अक्षयवट वृक्ष गिर गया है

Historic AkshayaVat Tree: पूरे भारत में सिर्फ 3 जगह पर अक्षयवट वृक्ष विराजमान हैं. ये जगह काशी, गया और प्रयाग हैं. बिहार के गया में वृक्ष के नीचे पिंडदान किया जाता है, वहीं यूपी के प्रयागराज में सिर मुंडन होता है और काशी में इसी वृक्ष के नीचे दंडी स्वामी को भोजन कराने की मान्यता रही है.

  • News18Hindi
  • Last Updated: April 28, 2021, 12:53 PM IST
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वाराणसी. उत्तर प्रदेश के वाराणसी (Varanasi) में प्रशासन की लापरवाही से सैकड़ों वर्ष पुराना अक्षयवट पेड़ गिर गया है. काशी विश्वनाथ मंदिर (Kashi Vishwanath Mandir) के ठीक बगल में ये पेड़ था. बता दें काशी, प्रयाग और गया मात्र तीन जगहों पर ये अक्षयवट पेड़ हैं. इस वृक्ष से जुड़ी कई मान्यताएं हैं. यही नहीं, यहां कई तरह के धार्मिक अनुष्ठान भी होते थे.

जानकारी के अनुसार काशी विश्वनाथ कॉरिडोर के निर्माण कार्य के दौरान ये अक्षयवट वृक्ष गिर गया. उधर अक्षयवट वृक्ष गिरने से पंडे-पुजारियों में घोर निराशा और आक्रोश है. मामले में जिले के बड़े अधिकारियों ने चुप्पी साध ली है.

कई धार्मिक मान्याएं जुड़ी हैं अक्षयवट वृक्ष से

बताया जाता है कि पूरे भारत में सिर्फ 3 जगह पर अक्षयवट वृक्ष विराजमान हैं. ये जगह काशी, गया और प्रयाग हैं. गया में वृक्ष के नीचे पिंडदान किया जाता है, वहीं प्रयागराज में सिर मुंडन होता है और काशी में इसी वृक्ष के नीचे दंडी स्वामी को भोजन कराने की मान्यता रही है. तीनों स्थानों पर हनुमान जी तीन स्वरूप में विराजमान हैं. गया में जहां हनुमानजी बैठे हैं, वहीं प्रयागराज में लेटे हैं और किले के अंदर हैं, वहीं काशी में खड़े हनुमान जी हैं.
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वाराणसी: काशी विश्वनाथ कॉरिडोर के कार्य के दौरान मंदिर के बगल में स्थित ऐतिहासिक अक्षयवट वृक्ष गिर गया है


वृक्ष गिरने से संतों, लोगों में रोष

बताया जा रहा है कि विश्वनाथ कॉरिडोर सौन्दर्यीकरण का काम चल रहा था. पहले ही इस वृक्ष को संरक्षित और सुरक्षित रखते हुए कार्य करने की बात कही गई थी, अधिकारियों ने आश्वासन भी दिय था. लेकिन वृक्ष संरक्षित नहीं किया गया और बुधवार सुबह विशाल अक्षयवट वृक्ष ढह गया. इस वृक्ष के ढह जाने से स्थानीय लोगों और संत समाज में भारी रोष व्याप्त है. सभी वृक्ष गिरने की पीछे प्रशासन की लापरवाही को जिम्मेदार ठहरा रहे हैं.
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