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IIT BHU में प्लास्टिक कचरे से बन रहा डीजल, खुद का ऑटो भी चलाने की है योजना

News18 Uttar Pradesh
Updated: January 15, 2020, 4:36 PM IST
IIT BHU में प्लास्टिक कचरे से बन रहा डीजल, खुद का ऑटो भी चलाने की है योजना
बीएचयू आईआईटी में इन दिनों प्लास्टिक के कचरे से डीजल बनाने का प्रयाेग चल रहा है.

आईआईटी (IIT) के कैमिकल डेवलपमेंट विभाग के प्रोफेसर पीके मिश्र के अनुसार हम एक से डेढ़ महीने के अंदर एक ऑटो रिक्शा चलाना शुरू कर देंगे, जिससे हम लोगों को दिखा सकते हैं कि कचरे से एक यूज़फुल प्रोडक्ट्स बन रहा है. प्रदूषण की समस्या का हम एक उपयोगी समाधान दे रहे हैं.

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वाराणसी. प्लास्टिक (Plastic) के दुष्प्रभाव से तो आप भली-भांति परिचित होंगे. अब प्लास्टिक के अभिशाप से बचने के लिए आईआईटी बीएचयू (IIT BHU) और रिन्युओशन संस्थान  ने हल तलाशने का दावा किया है. बीएचयू आईआईटी के हॉस्टल के कूड़े से प्लास्टिक छांटकर उसे लैब तक लाया जा रहा है और विशेष प्रक्रिया के माध्यम से प्लास्टिक से डीजल (Deisel) बनाया जा रहा है. बीएचयू आईआईटी की लैब की ये मशीन इस वक्त की सबसे बड़ी समस्या प्लास्टिक का हल है. हॉस्टल और कैंटीन से कूड़े के रूप में निकला प्लास्टिक यहां लाया जा रहा है और इस मशीन के माध्यम से डीजल बनाया जा रहा है.

सबसे पहली प्रक्रिया में प्लास्टिक को मशीन में डालकर छोटे-छोटे टुकड़ों में बांट लिया जाता है. फिर दूसरी मशीन में इन टुकड़ों को डालते हैं और प्लास्टिक के ये टुकड़े विशेष प्रक्रिया द्वारा डीजल का रूप लेते हैं. ये प्रयोग बीएचयू आईआईटी और रिन्युओशन संस्था के सहयोग से किया जा रहा है.

बता दें, प्लास्टिक का ये कचरा बीएचयू में दिखाई देता था. छात्रों के साथ सीनियर प्रोफेसर भी प्लास्टिक की समस्या का हल निकालने के प्रयास में थे. इनकी मेहनत रंग लायी और अब ये आगे छात्र-छात्राओं को टोकन देने की योजना है, जो इस प्रयोग के माध्यम से तैयार डीजल से चलने वाले ऑटो की फ्री सेवा ले सकेंगे.

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मशीन में प्लास्टिक का कचरा डालकर उससे डीजल बनाया जा रहा है.


भारत में शायद यह पहला मौका है: प्रोफेसर पीके मिश्र

मामले में आईआईटी के कैमिकल डेवलपमेंट विभाग के प्रोफेसर पीके मिश्र ने बताया कि हम लोग प्लास्टिक का इतना ज्यादा प्रयोग करने लगे हैं कि कचरे के रूप में चारों तरफ बिखर गया है. अगर इसको प्रॉपर्ली यूज़ किया जाए तो हमें यह एनर्जी पूरा वापस मिलता है तो सबसे बड़ी समस्या यह है. इसको सगीग्रेट कैसे किया जाए? और कैसे इकट्ठा किया जाए? हमारे कैंपस में एक शुरुआत हुई है. रिन्यूएशन नाम की एक कंपनी हमारे पास आई और उन्होंने कहा कि हमारे पास एक टेक्नोलॉजी है, हम इसे बेहतर रूप दे सकते हैं. उन्होंने कहा कि भारत में शायद यह पहला मौका है. हमें बहुत खुशी है कि यह काम हम लोग आईआईटी बीएचयू में कर रहे हैं.

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आईआईटी में इंस्टॉल की गई मशीन
जल्द ही अपना ऑटो रिक्शा चलाना शुरू करेंगे: प्रोफेसर

उन्होंने बताया कि यह प्लांट केमिकल इंजीनियरिंग में लगा है. अब इस प्लांट से प्रोडक्शन शुरू हो गया है. हम जल्दी ही सेकंड फेस में ऑटो रिक्शा रन करेंगे. उन्होंने कहा कि हम एक से डेढ़ महीने के अंदर एक ऑटो रिक्शा चलाना शुरू कर देंगे, जिससे हम लोगों को दिखा सकते हैं कि कचरे से एक यूज़फुल प्रोडक्ट्स बन रहा है. इससे प्रदूषण की समस्या के साथ-साथ हम एक उपयोगी समाधान दे रहे हैं.

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प्रयोग को आगे बढ़ाने की तैयारी में है बीएचयू आईआईटी


फिलहाल हॉस्टल के प्लास्टिक वेस्ट से बना रहे डीजल

वहीं इस प्रोजेक्ट पर काम कर रहे प्रोजेक्ट मैनेजर शिवम गुप्ता ने कहा कि अभी हम लोग हॉस्टल से प्लास्टिक वेस्ट कलेक्ट कर सग्रीगेट करा कर अपने प्लांट में फीड करते हैं. अभी यह सब एक्सपेरिमेंटल फेज में है. अभी हम लोग टेस्ट कर रहे हैं कि किस-किस तरीके की प्लास्टिक हम इस प्लांट में डाल सकते हैं. फाउंडेशन ने आईआईटी बीएचयू के साथ कोलाब्रेट किया है, जिसमें आईटी बीएचयू के डायरेक्टर पीके मिश्रा हम लोग का बहुत सपोर्ट कर रहे हैं. इसी वजह से यह सब चीजें संभव हो पा रही हैं.

रिपोर्ट: अनुज सिंह

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First published: January 15, 2020, 3:36 PM IST
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