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Varanasi: बीमार भगवान जगन्नाथ के साथ श्रद्धालुओं को भी स्वस्थ करता है ये 'काढ़ा', जानिए खासियत

Jagannath Mandir: काशी के केदारखंड के अस्सी मोहल्‍ले में विष्णु के अवतार भगवान जगन्नाथ का प्राचीन मंदिर भी है. खास बात ये है कि साल में 15 दिन भगवान जगन्नाथ को काढ़े का भोग लगाया जाता है. इसके बाद इसी काढ़े को भक्तों में प्रसाद स्वरूप वितरित किया जाता है.

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    रिपोर्ट-अभिषेक जायसवाल

    वाराणसी. भोले की नगरी काशी (Kashi) में भगवान विष्णु के कई चमत्कारिक मन्दिर भी हैं. इन मंदिरों में कुछ ऐसी अनोखी परंपराएं हैं जो इसे पूरे दुनिया से अलग करती हैं. काशी के केदारखंड के अस्सी मोहल्‍ले में विष्णु के अवतार भगवान जगन्नाथ (Jagannath Temple) का प्राचीन मंदिर है. खास बात ये है कि साल में 15 दिन भगवान जगन्नाथ को काढ़े का भोग लगाया जाता है और फिर इसी काढ़े को भक्तों में प्रसाद स्वरूप वितरित किया जाता है.

    भगवान के इस खास प्रसाद को लेकर मान्यता ये है कि जो भी भक्त काढ़े के इस प्रसाद को ग्रहण करता है, भगवान उसे पूरे साल रोगों में दूर रखते हैं. यही वजह है कि भगवान जगन्नाथ के इस चमत्कारिक काढ़े के लिए मंदिर में भक्तों की भीड़ लगती है और श्रद्धालु इस प्रसाद को लेने दूर दूर से आते हैं.

    काढ़े के भोग के पीछे दिलचस्प किस्सा
    भगवान को इस काढ़े के भोग लगाएं जाने के पीछे की कहानी भी बेहद दिलचस्प है. मंदिर के पुजारी राधेश्याम पांडेय ने बताया कि ज्येष्ठ पूर्णिमा पर गर्मी से बेहाल भक्त भगवान को जल से स्नान कराते हैं. पूरे दिन ये सिलसिला चलता है, इसके बाद भक्तों के स्नान से भगवान बीमार हो जाते हैं और फिर 15 दिन उन्हें काढ़े का भोग लगाया जाता है. फिर इसी काढ़े को प्रसाद स्वरूप भक्तों में बांटा जाता है.

    200 साल से अधिक पुरानी है परम्परा
    इस दौरान भगवान जगन्नाथ का कपाट पूरी तरह बंद रहता है. 200 साल से अधिक समय से ये परम्परा चलती आ रही है.15 दिन काढ़े का भोग लगाने के बाद जब भगवान जगन्नाथ बीमारी से स्वस्थ होते है तो वो भक्तों को दर्शन देने के लिए रथ पर सवार होकर निकलते हैं.

    ऐसे तैयार करते हैं काढ़ा
    मंदिर के पुजारी राधेश्याम पांडेय ने बताया कि इस काढ़े को काली, मिर्च, लौंग, छोटी इलायची, बड़ी इलायची, कच्ची चीनी, जायफल, तुलसी, गुलाब जल, मुलेटी और अदरक को उबाल कर तैयार किया जाता है.

    1802 में हुआ था मंदिर का निर्माण
    सन 1802 में इस मंदिर का निर्माण हुआ था. इस मंदिर में भगवान जगन्नाथ बड़े भाई बलराम और बहन सुभद्रा की वैसी ही प्रतिमा स्थापना है जैसी जगन्नाथ पुरी में है. काशी में स्थित ये धाम काशी के चार धामों में से एक है. यहां प्रतिदिन सुबह 5 बजे मंगला आरती और रात में 9 बजे शयन आरती होती है.

    Jagannath Mandir

    Tags: Jagannath Rath Yatra, Jagannath Temple, Varanasi news

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