Varanasi: सावन में भक्तों को विश्वनाथ की 'नई काशी' के दर्शन मिलना मुश्किल

कमिश्नर दीपक अग्रवाल ने बताया कि टारगेट अगस्त 2021 तक का है.

कमिश्नर दीपक अग्रवाल ने बताया कि टारगेट अगस्त 2021 तक का है.

कोरोना संक्रमण की दूसरी लहर का असर श्रीकाशी विश्वनाथ धाम प्रोजेक्ट पर भी पड़ा है. मंदिर, मठ, घाट गलियां सब वीरान हैं. अगस्त तक का पूरा करने का लक्ष्य था, लेकिन अब अक्टूबर तक पूरा करना भी चुनौती लग रहा है.

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वाराणसी. कोरोना संक्रमण की दूसरी लहर का असर वाराणसी में बन रहे श्रीकाशी विश्वनाथ धाम निर्माण पर भी पड़ा है. जो काम अगस्त तक पूरा होने का लक्ष्य था, वो काम अब अक्टूबर तक पूरा करना भी चुनौती लग रहा है. पीएम नरेंद्र मोदी के इस ड्रीम प्रोजेक्ट को पूरा करने के लिए खुद सीएम योगी भी हर महीने विश्वनाथ धाम निर्माण का जायजा ले रहे हैं. कोशिश ये है कि अगस्त तक यानी सावन में श्रदालुओं को विश्वनाथ की नई काशी के दर्शन कराए जाएं लेकिन पूरे देश के साथ वाराणसी में भी कोरोना संक्रमण की दूसरी लहर का असर है. मंदिर, मठ, घाट गलियां सब वीरान हैं. भक्तों से दूर बाबा विश्वनाथ गर्भगृह में क्वारंटीन जैसे हैं. बावजूद इसके, बीते कोरोना काल मे भी सोशल डिस्टेसिंग जैसी बंदिशों के दायरे में काम जारी रहा. इस बार भी काम जारी था लेकिन होली और चुनाव में एक्सपर्ट मजदूर अपने प्रदेश गए लेकिन जब लौटने का समय आया तो संक्रमण चरम पर पहुंचने लगा. इसी वजह से कई मजदूर लौटे नहीं.

प्रशासन के मुताबिक साठ फीसदी काम पूरा हो गया है. आंकड़े केवल साठ फीसदी हो लेकिन ये साठ फीसदी वो काम था, जिसमे सबसे ज्यादा समय लगता है. यानी नींव से आधार खड़ा करने का काम. कमिश्नर दीपक अग्रवाल ने बताया कि टारगेट अगस्त 2021 तक का है. कार्य चल रहा है. दूसरी लहर में कुछ मजदूर अपने अपने प्रदेशों को गए थे. प्रोजेक्ट के कुछ लोग पॉजिटिव हो गए. मुख्य प्रोजेक्ट इंचार्ज कोरोना पॉजीटिव हुए तो उन्हें अस्पताल में भर्ती कराना पड़ा. सामान भी लाने ले जाने में दिक्कत हुई. गंगा में दूसरी तरफ बालू का जमाव होने के कारण शहर में पानी का दबाव बढ़ गया था. इसके लिए सिंचाई विभाग दवारा ब्रिजिंग का काम हो रहा था. 45 मीटर के इस चैनल का काम प्रगति पर है. जून तक इसे पूरा कर लिया जाएगा. दो महीने की देरी हो सकती है. मानसून को देखते हुए हमारी कोशिश है कि समय से काम पूरा हो.

उन्होंने आगे बताया, "1200 मजदूर पहले काम करते थे. इस पीरियड में कोविड और इलेक्शन के कारण कई लोग घर गए लेकिन वापस नहीं आए. इसलिए अब 400 मजदूर काम कर रहे हैं. वर्तमान में साठ फीसदी काम पूरा हो गया है. जिन कामों में सबसे ज्यादा समय लगता है, वो सारे काम पूरे हो गए. 24 इमारतों में नींव का काम पूरा हो गया है. मंदिर परिसर का काम पूरा हो गया है. फ्लोर का काम बाकी है. मंदिर चौक में फिनिशिंग का काम अंतिम दौर में है. घाट की तरफ कुछ डिजाइन में बदलाव हुए थे, जिसके बाद वहां भी काम जारी है. मानसून तक काफी काम पूरा कर लिया जाएगा. मारबल आ गए हैं, जिन्हें लगाने का काम भी शुरू हो गया है. पंरिसर परिसर में मार्बल लगाने का काम भी पूरा हो गया है."

काशी विश्वनाथ धाम का स्वरूप अब धीरे-धीरे आकार ले रहा है. मंदिर के चौक का काम प्रगति पर है. गुलाबी पत्थरों की नक्काशीदार खूबसूरती उभरकर सामने आ रही है. धाम क्षेत्र की इमारतों की दीवारों पर अब बालेश्वर के पत्थर सजने लगे हैं. ये पत्थर दीवारों को अलग खूबसूरती प्रदान कर रहे हैं. काशी विश्वनाथ धाम पीएम मोदी का ड्रीम प्रोजेक्ट है. इस धाम के जरिए यहां मिले मणिमाला के मंदिरों के ऐतिहासिक दस्तावेज भी देश और दुनिया के सामने लाने की तैयारी है. परियोजना में मिले प्राचीन मंदिरों का इतिहास, उनकी प्राचीनता, विशेषता के अलावा मंदिरों के निर्माता से जुड़ी जानकारियां जुटाई जा रही हैं. काशी विश्वनाथ धाम के निर्माण के लिए खरीदे गए 300 भवनों में से 60 से अधिक छोटे-बड़े मंदिर मिले हैं. जिन्हे सहेजकर उनकी प्राचीनता पता लगाई जा रही है.

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