मिसाल: बेटी पैदा होने पर मिठाई बांटती हैं यह डॉक्‍टर, नहीं लेती हैं फीस

बेटी पैदा होने पर मिठाई बांटती हैं यह डॉक्‍टर (file photo)
बेटी पैदा होने पर मिठाई बांटती हैं यह डॉक्‍टर (file photo)

डॉ. शिप्रा के अस्‍पताल की इस मुहिम के बारे में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (PM Narendra Modi) को जब खबर हुई, तो वह भी इससे काफी प्रभावित हुए.

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  • Last Updated: September 29, 2020, 2:24 PM IST
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वाराणसी. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (PM Narendra Modi) के संसदीय क्षेत्र वाराणसी (Varanasi) में एक लेडी डॉक्टर बेटी बचाओ के सपने को साकार करने में जुटी हुई हैं. डॉक्टर शिप्राधर श्रीवास्तव के मुताबिक 'बेटियां नही हैं बोझ, आओ बदले सोच' मुहिम के तहत अपने नर्सिंग हॉस्पिटल में डिलिवरी के दौरान बेटी पैदा होने पर फीस नहीं लेती हैं. इतना ही नहीं मिठाई बांटकर वो जश्न भी मनाती हैं. डॉ. शिप्रा के अस्‍पताल की इस मुहिम के बारे में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को जब खबर हुई, तो वह भी इससे काफी प्रभावित हुए. मई महीने में जब पीएम मोदी वाराणसी आए थे, तो डॉ. श‍िप्रा उनसे मिली भी थीं.

बताया जाता है कि बेटी के जन्म पर वह ना तो फीस लेती हैं और ना ही अस्‍पताल में बेड चार्ज लिया जाता है. यदि ऑपरेशन करना पड़े तो वह भी मुफ्त है. डॉ. श‍िप्रा के नर्सिंग होम में बीते कुछ वर्षों से अभी तक 386 बेटियों के जन्म पर कोई चार्ज नहीं लिया गया है. डॉ. शिप्रा धर श्रीवास्तव कहती हैं, ‘लोगों में बेटियों के प्रति नकारात्मक सोच अभी भी है. मुझे अक्‍सर ऐसे उलाहने सुनने को मिलते हैं कि मैडम ई का कइलू, पेटवो चिरलू आउर बिटिया निकललु…जब परिजनों को पता चलता है कि बेटी पैदा हुई है तो अक्‍सर उनके चेहरे पर मायूसी छा जाती है.

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डॉक्टर शिप्रा ने गरीब लड़कियों की शिक्षा का भी बीड़ा उठाया है. वह नर्सिंग होम में ही लड़कियों को पढ़ाती हैं. यही नहीं, वह गरीब परिवारों की बेटियों को सुकन्या समृद्धि योजना का लाभ दिलाने में भी मदद करती हैं. बता दें कि डॉ. शिप्रा के पति डॉ. मनोज कुमार श्रीवास्‍तव भी फिजीशियन हैं. बेटियों के जन्म को अभिशाप मानने की सोच रखने वालों के लिए डॉक्टर शिप्राधर की बेटी बचाओ की मुहिम बेहद सरहानीय है. इस मुहिम से अब न सिर्फ लोगों की सोच बदल रही है बल्कि लोग अब बेटी पैदा होने पर खुशी भी मना रहे हैं.
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