ग्राउंड रिपोर्ट: PM मोदी के किए गए कामों पर क्या कहता है वाराणसी का चायवाला

कुछ ऐसा ही कहना काशी विश्नाथ मंदिर के सामने दुकान लगा रहे राम किशन का भी है. लेकिन इस शहर में एक दूसरा पक्ष भी है, जो मोदी से खुश नहीं. लेकिन उसका मानना है कि लड़ाई तो एक तरफा है.

Anil Rai | News18Hindi
Updated: May 16, 2019, 6:27 PM IST
ग्राउंड रिपोर्ट: PM मोदी के किए गए कामों पर क्या कहता है वाराणसी का चायवाला
पहले वाराणसी में जाम के हालात ऐसे थे कि कब कहां जाम लग जाए, इसका अंदाजा लगाना भी मुश्किल था. लेकिन हालात अब बदल गए हैं. (File Photo)
Anil Rai
Anil Rai | News18Hindi
Updated: May 16, 2019, 6:27 PM IST
2014 में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने जब वाराणसी को लोकसभा का चुनाव लड़ने के लिए चुना, तभी से वाराणसी के लोगों में विकास की एक नई उम्मीद जग गई थी. लोगों ने इस नाम पर नरेन्द्र मोदी को जमकर वोट दिया कि वो सांसद नहीं देश का प्रधानमंत्री चुन रहे हैं. ऐसे में 2019 के चुनावों के पहले क्या वाराणसी उतना बदला, जितना लोगों को उम्मीद थी, इसका अंदाजा वाराणसी के लालबहादुर शास्त्री हवाई अड्डे पर उतरते ही मिलने लगता है. 2014 के पहले हवाई अड्डे से वाराणसी के कैंट इलाके में किसी होटल में पहुंचने का समय तय नहीं था.

पहले वाराणसी में जाम के हालात ऐसे थे कि कब कहां जाम लग जाए, इसका अंदाजा लगाना भी मुश्किल था. लेकिन हालात अब बदल गए हैं. आपकी गाड़ी फर्राटे लेते हुए हवाई अड्डे से शहर के बीच पहुंच जाती है. कुछ ऐसा ही हाल रेलवे मंडुवाडीह रेलवे स्टेशन का हुआ है, इस स्टेशन के सौन्दर्यीकरण के साथ-साथ करीब आधा दर्जन से ज्यादा ट्रेने यहां से चल रही हैं. जिससे वाराणसी के सबसे महत्वपूर्ण कैंट रेलवे स्टेशन पर यात्रियों की भीड़ कम हुई. लेकिन इस शहर के एक रेलवे स्टेशन काशी को अभी भी विकास का इंतजार है.



काशी विश्ननाथ मंदिर परिसर में प्रवेश करते ही प्रधानमंत्री मोदी का असर यहां साफ दिखाई देगा. गेट नंबर 4 से दाखिल होते ही मुख्य मंदिर से पहले एक बड़ा और नया मंदिर देखने को मिलेगा. स्थानीय पुजारी बताते हैं कि ये मंदिर उन मंदिरों में से एक है, जो लोगों के घरों में दबे हुए थे.
वाराणसी में पिछले पांच साल में हुए विकास के कामों को हम दो हिस्से में बांट सकते हैं. पहला जो पर्यटकों के लिए हुआ या यू कहें जिनके सहारे शहर में आने वाले पर्यटकों को सुविधाएं मिलेंगी और उनकी तादात बढ़ेगी. उनमें काशी विश्वनाथ कॉरिडोर, रामनगर में मल्टि मॉडल टर्मिनल, सारनाथ लाइट एंड साउंड शो, गंगा में लेजर शो जैसे बड़े काम हुए हैं. जबकि दूसरा है स्थानीय लोगों के लिए- वाराणसी में 4 लेन का रिंग रोड, 400 बेड का सुपर स्पेशलिटी हॉस्पिटल, ईएसआई अस्पताल, शहर में बिजली के तार भूमिगत करना, मंडुवाडीह रेलवे स्टेशन का नवनिर्माण, वाराणसी हल्दिया गंगा जल परियोजना जैसे भी काम हुए हैं, जिनका फायदा स्थानीय लोगों को मिल रहा है.

ऐसे में वाराणसी की जनता का मिजाज जानना मुश्किल नहीं है. सबसे पहले न्यूज18हिंदी की टीम ने बात की एयरपोर्ट के बाहर पार्किग का पैसा वसूल रहे रोहित से. रोहित की माने तो प्रधानमंत्री ने वाराणसी की तस्वीर बदल दी है, विकास के साथ वाराणसी आने जाने वालों की तादात बढ़ी है. जिसका असर उनकी कमाई पर पड़ा है.


कुछ ऐसा ही कहना काशी विश्नाथ मंदिर के सामने दुकान लगा रहे राम किशन का भी है. लेकिन इस शहर में एक दूसरा पक्ष भी है, जो मोदी से खुश नहीं. लेकिन उसका मानना है कि लड़ाई तो एक तरफा है.
कैंट इलाके में चाय की दुकान चला रहे राम आसरे यादव कहते हैं कि मोदी से लड़ना था तो सबको साथ मिलकर, अलग-अलग लड़कर मोदी का मुकबला नहीं कर सकते.
कुछ यही कहना संकट मोचन मंदिर के पास चलहकदमी कर रहे राम आसरे मिश्रा का भी है. मिश्रा का कहना है कि प्रियंका लड़ती तो कुछ बात बनती, ये दोनों उम्मीदवार तो मोदी के सामने खड़े भी नहीं हो सकते, चुनाव क्या लड़ेंगे.

साफ है, वाराणसी की लड़ाई अब सिर्फ जीत के अंतर के लिए है क्योंकि बंटा हुआ विपक्ष प्रधानमंत्री मोदी को कहीं से चुनौती देता नजर नहीं आ रहा है. हालांकि बीजेपी ने भी अंतर बढ़ाने के लिए पूरी ताकत लगा रखी है. नोएडा से वाराणसी प्रचार में आए बीजेपी नेता अशोक प्रधान का दावा है कि इस बार प्रधानमंत्री मोदी की जीत का अंतर इस बार देश में सबसे बड़ा होगा.

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