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ANALYSIS: लोकसभा चुनाव का अंतिम चरण: वोट कटवा से आगे बढ़ पाएगी कांग्रेस?

ANALYSIS: लोकसभा चुनाव का अंतिम चरण: वोट कटवा से आगे बढ़ पाएगी कांग्रेस?

प्रियंका गांधी और राहुल गांधी

प्रियंका गांधी और राहुल गांधी

यूपी की इन 13 सीटों के राजनीतिक गणित पर नजर डालें तो कांग्रेस कुशीनगर और मिर्जापुर छोड़ किसी और सीट पर बीजेपी और गठबंधन के सामने चुनौती पेश करती नहीं दिख रही है.

    प्रियंका गांधी वाड्रा को पूर्वी उत्तर प्रदेश का प्रभारी बनाए जाने के बाद ये अटकलें लगने लगी थीं कि कांग्रेस पूर्वांचल में तो कम से कम कुछ अच्छा करेगी. लेकिन जैसे-जैसे चुनाव पूर्वी उत्तर प्रदेश में पहुंच रहा है ये अटकलें खत्म होती नजर आ रही हैं. ऐसे में सवाल ये है कि क्या अंतिम चरण में उत्तर प्रदेश की जिन तेरह सीटों पर चुनाव है, वहां कांग्रेस वोट कटवा से ज्यादा हैसियत रख पाएगी?

    यूपी की इन 13 सीटों के राजनीतिक गणित पर नजर डालें तो कांग्रेस कुशीनगर और मिर्जापुर छोड़ किसी और सीट पर बीजेपी और गठबंधन के सामने चुनौती पेश करती नहीं दिख रही है. प्रियंका गांधी वाड्रा के वाराणसी से चुनाव लड़ने की खबर के बाद कांग्रेस के कार्यकर्ताओं ने काफी जोश दिख रहा था, लेकिन इस खबर के खडंन के बाद कांग्रेस कार्यकर्ताओं का जोश खत्म होता दिख रहा है.

    बात करें वाराणसी की तो यहा कांग्रेस या गठबंधन दोनों में कोई प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को चुनौती देता नजर नहीं आ रहा है. गोरखपुर, महाराजगंज, सलेमपुर लोकसभा सीट पर कांग्रेस सवर्ण उम्मीदवारों के सहारे बीजेपी के वोट बैंक में सेंध लगा रही है, जबकि गाजीपुर और घोसी में बीजेपी के परंपरागत ओबीसी वोटरों की जाति का उम्मीदवार खड़ा कर गठबंधन को फायदा पहुंचाने की कोशिश करती दिख रही है. चंदौली और बलिया दो सीटों पर कांग्रेस का कोई उम्मीदवार नहीं है, जबकि बांसगांव और राबर्ट्सगंज सुरक्षित सीट होने के नाते कांग्रेस का कोई असर नहीं दिख रहा है.

    त्रिकोणीय मुकाबला
    वहीं, कांग्रेस के मजबूती से चुनाव लड़ने वाली सीटों की बात करें तो कुशीनगर में कांग्रेस दिग्गज नेता और पूर्व मंत्री आरपीएन सिंह के सहारे यहां लड़ाई को त्रिकोणात्मक करती दिख रही है, जबकि मिर्जापुर में केन्द्रीय मंत्री अनुप्रिया पटेल की मां कृष्ण पटेल से गठबंधन कर ब्राह्मण वोटों के साथ-साथ अनुप्रिया से नाराज पटेल वोटरों के बहाने लड़ाई को त्रिकोणीय बनाती दिख रही है.

    कांग्रेस नहीं बना पाई बड़ा चेहरा
    वरिष्ठ पत्रकार अंबिकानंद सहाय का मानना है कि प्रियंका ने कोशिश तो बहुत की. लेकिन इन इलाकों का कैडर इतना कमजोर हो चुका था कि उसे वोट बैंक में बदलना मुश्किल था. दूसरा बड़ा कारण ये भी रहा कि ये चुनाव मोदी के साथ और मोदी के खिलाफ का नाम पर लड़ा जा रहा है. ऐसे में कांग्रेस अपने आपको मतदाताओं के बीच मोदी विरोध का बड़ा चेहरा नहीं बना पाई. जबकि गठबंधन ऐसा करने में सफल रहा और यही कारण रहा जिसके कारण कांग्रेस वोट कटवा से आगे नहीं बढ़ पा रही है.

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