तेज बहादुर यादव के नामांकन करने से लेकर SC के आदेश तक की पूरी कहानी

बीएसएफ में कांस्टेबल रहे तेज बहादुर यादव खराब खाने की क्वालिटी पर सवाल सवाल उठाने के बाद चर्चा में आए थे. उन्हें बाद बीएसएफ से बर्खास्त कर दिया गया था.

News18 Uttar Pradesh
Updated: May 8, 2019, 4:12 PM IST
तेज बहादुर यादव के नामांकन करने से लेकर SC के आदेश तक की पूरी कहानी
तेज बाहुदर यादव (फेसबुक फोटो)
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Updated: May 8, 2019, 4:12 PM IST
उत्तर प्रदेश के वाराणसी लोकसभा क्षेत्र से पीएम नरेंद्र मोदी के खिलाफ नामांकन करने वाले तेज बहादुर यादव की याचिका पर बुधवार को सुप्रीम कोर्ट ने सुनवाई की. कोर्ट ने चुनाव आयोग को निर्देश दिया है कि तेज बहादुर की शिकायत के हर बिंदू पर गौर किया जाए और 9 मई तक कोर्ट में अपना जवाब दाखिल करे. चुनाव आयोग ने यूपी की वाराणसी लोकसभा सीट से तेज बहादुर यादव के नामांकन को रद्द कर दिया था, जिसके बाद तेज बहादुर ने सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया है.

बता दें कि बीएसएफ में कांस्टेबल रहे तेज बहादुर यादव खराब खाने की क्वालिटी पर सवाल सवाल उठाने के बाद चर्चा में आए थे. उन्हें बाद बीएसएफ से बर्खास्त कर दिया गया था. इसके बाद तेज बहादुर ने वाराणसी लोकसभा क्षेत्र से पीएम नरेंद्र मोदी के खिलाफ चुनाव लड़ने का निर्णय लिया. तेज बाहुदर ने पहले निर्दलीय प्रत्याशी के तौर पर वाराणसी से नामांकन किया था, लेकिन बाद में सपा ने अपने प्रत्याशी शालिनी यादव का टिकट काटकर उन्हें गठबंधन का उम्मीदवार बना दिया. लेकिन हलफनामे में जानकारी छुपाने का आरोप लगाते हुए निर्वाचन अधिकारी ने उनका नामांकन रद्द कर दिया.



तेज बहादुर यादव (फाइल फोटो)


तेज बहादुर यादव ने पर्चा खारिज करने के चुनाव आयोग के फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी थी. उन्होंने आरोप लगाया कि मोदी सरकार के इसारे पर उनके खिलाफ साजिश की गई. तेज बहादुर ने कहा कि चुनाव आयोग को अपने फैसले पर विचार करना चाहिए. और इस मामले में उन्होंने सुप्रीम कोर्ट में याचिक दायर की. तेज बहादुर की ओर से वकील प्रशांत भूषण ने कहा कि उनके नामांकन को रद्द करने का आदेश रद्द कर चुनाव लड़ने की इजाजत दी जाए. इसके बाद सुप्रीम कोर्ट ने चुनाव आयोग से कहा कि वह कल (गुरुवार) तक तेज बहादुर यादव की शिकायत के समुचित बिंदुओं पर गौर करें और उसका जवाब दें.

2017 में हुआ था तेज बहादुर का वीडियो वायरल
तेज बहादुर ने जनवरी 2017 में BSF जवानों को मिल रहे घटिया खाने को लेकर एक वीडियो बनाया था. ये वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो गया था, जिसके बाद तेज बहादुर चर्चा में आ गए. वीडियो में तेज बहादुर ने अपने सीनियर अफसरों पर जवानों को घटिया क्वालिटी का खाना देने का आरोप लगाया. 29 बीएसएफ बटैलियन के पूर्व जवान तेज बहादुर ने 8 मिनट का वीडियो सोशल मीडिया पर पोस्ट किया.

बेटे की संदिग्ध परिस्थितियों में हो गई थी मौत
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इस मामले की बाद में जांच हुई. गृह मंत्रालय ने पीएमओ को सौंपी अपनी रिपोर्ट में कहा था, ''बीएसएफ जवान के आरोपों में कोई दम नहीं नजर आया है. जिसमें कहा गया है कि सीमा पर तैनात सुरक्षाकर्मियों को घटिया राशन दिया जाता है. इसके बाद तेज बहादुर को बर्खास्त कर दिया गया. जनवरी, 2019 में तेज बहादुर के 22 साल के बेटे की संदिग्‍ध परिस्थितियों में मौत हो गई थ.। वह अपने कमरे में बंदूक के साथ मृत पाया गया था.

तेज बहादुर को 4 बार मिली कड़ी सजा
तेज बहादुर को बीएसएफ में अपनी 20 साल की सेवा के दौरान चार बार कड़ी सजा मिली. उन्हें क्वार्टर गार्ड में भी रखा जा चुका है. नशे में ड्यूटी करना, सीनियर का आदेश न मानना, बिना बताए ड्यूटी से गायब रहना और कमांडेंट पर बंदूक तानने तक का भी आरोप लगा था. 20 साल की ड्यूटी में तेज बहादुर पश्चिम बंगाल, मणिपुर, असम, त्रिपुरा, में भी अपनी सेवाएं दी.

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