लोकसभा चुनाव 2019: मोदी मैजिक तय करेगा अंतिम चरण का परिणाम?

मिर्जापुर लोकसभा सीट से पहले दो चुनावों को छोड़ दें तो कोई भी सांसद लगातार दो बार चुनाव नहीं जीता है. ऐसे में केन्द्रीय मंत्री अनुप्रिया पटेल के सामने अपना किला बचाए रखने की कड़ी चुनौती है.

Anil Rai | News18 Uttar Pradesh
Updated: May 18, 2019, 11:27 AM IST
लोकसभा चुनाव 2019: मोदी मैजिक तय करेगा अंतिम चरण का परिणाम?
पीएम नरेेंद्र मोदी (फाइल फोटो)
Anil Rai
Anil Rai | News18 Uttar Pradesh
Updated: May 18, 2019, 11:27 AM IST
उत्तर प्रदेश में अंतिम चरण की जिन 13 सीटों पर वोट डाले जाने हैं, उनमें 5 सीटें प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की संसदीय क्षेत्र वाराणसी और उसके आस-पास की हैं. ऐसे में बीजेपी उम्मीदवार मोदी मैजिक के सहारे चुनाव जीतने की उम्मीद लगाए बैठे हैं, तो वहीं गठबंधन प्रत्याशी जातीय गणित के सहारे मोदी मौजिक को चुनौती देने की कोशिश में लगे हैं. बात करें वाराणसी की तो यहां कांग्रेस के अजय राय हो या गठबंधन की शालिनी यादव दोनों में कोई भी पीएम मोदी को चुनौती देता नजर नहीं आ रहा है. लेकिन बाकि सीटों पर हालात ऐसे नहीं हैं.

गाजीपुर – जाति पर हावी होता विकास
वाराणसी के बाद इस सीट की सबसे हाईप्रोफाइल सीट है गाजीपुर. गठबंधन को उम्मीद है कि यहां दलित, यादव और मुस्लिम गठजोड़ मोदी के इस कद्दावर मंत्री का रास्ता रोक देगा. क्योंकि 2014 का चुनाव मनोज सिन्हा 30 हजार से कुछ ज्यादा वोटों से ही जीत पाए थे. लेकिन इस चुनाव में यहां का वोट गणित बदला हुआ है. बात करें जाति गणित की तो बीजेपी का पंरपारगत कुशवाहा वोट बैंक इस बार बीजेपी के साथ वापस लौट रहा है. साथ ही 40 हजार करोड़ से ज्यादा की विकास योजनाओं के सहारे मनोज सिन्हा यादव और दलितों के साथ-साथ मुस्लिम वोट बैंक में सेंध लगा रहे हैं. जबकि गठबंधन के उम्मीदवार अफजाल अंसारी को पास जातीय गणित और मोदी विरोध को छोड़ कोई मुद्दा नहीं है.

चंदौली – ओबीसी वोटों का बंटवारा रोकना बीजेपी के सामने चुनौती

यूपी की चंदौली लोकसभा सीट पर बीजेपी के प्रदेश अध्यक्ष महेन्द्र पांडे का सीधा मुकाबला एसपी के संजय चौहान से है. चौहान जहां दलित-यादव-मुस्लिम गठजोड़ के साथ अपनी जाति के सहारे पिछड़े वोट बैंक में सेंध लगाने की कोशिश कर रहे हैं, वहीं बीजेपी उम्मीदवार महेन्द्र पांडे मोदी लहर के सहारे अपनी सीट बचाने में लगे हैं. बीजेपी को यहां उम्मीद है कि प्रधानमंत्री मोदी के संसदीय सीट से सटे होने के लाभ उन्हें मिलेगा और यहां मोदी लहर में जाति का गणित टूटेगा तभी ये सीट बीजेपी के खाते में जा पाएगी.

बलिया – ब्राह्मण वोटर के पास है जीत की चाभी
कभी पूर्व प्रधानमंत्री चन्द्रशेखर की सीट रही बलिया में इस बार मुकाबला दिलचस्प होता दिख रहा है. बीजेपी ने यहां वर्तमान सांसद भरत सिंह का टिकट काटकर विरेन्द्र सिंह मस्त को मैदान में उतारा है. तो एसपी ने नीरज शेखर को दरकिनार कर सनातन पांडे को टिकट दिया है. यानि दोनों दलों में एक-एक नेता नाराज हैं. सनातन पांडे जहां दलित-यादव व मुस्लिम गठजोड़ के साथ बीजेपी के पंरपारगत ब्राह्मण वोट बैंक में सेंध लगाने की कोशिश में हैं. वहीं, विरेन्द्र सिंह मस्त मोदी मौजिक के सहारे हैं, बीजेपी इस सीट पर यादव को छोड़ बाकि ओबीसी और सवर्ण मतदाताओं को एक साथ लाने की कोशिश में लगी है. ऐसे में ब्राह्मण मतदाताओं को कुछ हिस्सा बीजेपी अपने पाले में ला पाती है तभी ये सीट बचा पाएगी.मिर्जापुर – कमलापति की तीसरी पीढ़ी को मिलेगा ब्राह्मणों का साथ
मिर्जापुर लोकसभा सीट से पहले दो चुनावों को छोड़ दे तो कोई भी सांसद लगातार दो बार चुनाव नहीं जीता है.  ऐसे में अपना दल की नेता और केन्द्रीय मंत्री अनुप्रिया पटेल के सामने अपना किला बचाए रखने की कड़ी चुनौती है. इस क्षेत्र से कभी देश की राजनीति में वाराणसी की पहचान समझे जाने वाले कमलापति त्रिपाठी के परिवार की तीसरी पीढ़ी के नेता ललितेश पति त्रिपाठी कांग्रेस के टिकट पर मैदान में हैं. 2014 के लोकसभा चुनाव में ललितेश को डेढ़ लाख से ज्यादा वोट मिले थे और वो एसपी को पछाड़कर तीसरे नंबर पर थे. ऐसे में कांग्रेस को लड़ाई से बाहर नहीं माना जा सकता. इस हालात में ब्राह्मण वोटर किधर जाएगा इस सीट का भविष्य इस बात पर निर्भर है. ओबीसी वोटों के अधिकता वाली इस सीट पर एसपी ने रामचरित निषाद को मैदान में उतारा है.

राबर्टसगंज- दलित वोटर तय करेगा जीत किसकी
राबर्टगंज सुरक्षित सीट पर इस बार मुकाबला एसपी-अपना दल के बीच है.  बीजेपी ने जहां ये सीट अपने सहयोगी अपना दल ( सोनेलाल ) के लिए छोड़ी है. तो गठबंधन में ये सीट एसपी के पाले में गई है. अपना दल के टिकट पर पकौड़ी लाल कौल तो एसपी ने भाई लाल कौल को मैदान में उतारा है. इस सीट पर भी गठबंधन की जीत तभी संभव है जब दलित वोटर एक साथ गठबंधन के पक्ष में मतदान करें.

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