Analysis: चन्द्रशेखर की ना प्रियंका के आने का इशारा तो नहीं!

भीम आर्मी के संस्थापक चन्द्रशेखर ने वाराणसी से चुनाव लड़ने के मामले पर यू-टर्न मार लिया है.

Anil Rai | News18 Uttar Pradesh
Updated: April 18, 2019, 8:37 PM IST
Analysis: चन्द्रशेखर की ना प्रियंका के आने का इशारा तो नहीं!
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Anil Rai
Anil Rai | News18 Uttar Pradesh
Updated: April 18, 2019, 8:37 PM IST
भीम आर्मी के संस्थापक चन्द्रशेखर ने वाराणसी से चुनाव लड़ने के मामले पर यू-टर्न मार लिया है. वाराणसी में बड़े रोड शो के बहाने चन्द्रशेखर ने अपनी ताकत दिखाने की कोशिश की थी, जिसका विरोध भी हुआ था. ऐसे में सवाल उठना लाजिमी है कि आखिर चन्द्रशेखर ने अचानक यू-टर्न क्यों लिया?

इसका जवाब वाराणसी लोकसभा सीट का इतिहास खंगालने पर मिल जाएगा. चन्द्रशेखर जिस तबके की नुमाइंदगी का दावा करते हैं, उस तबके की नेता पिछले करीब तीन दशक से मायावती को माना जाता है लेकिन अब तक हुए लोकसभा चुनावों में वाराणसी सीट पर मायावती के नेतृत्व वाली बीएसपी सिर्फ दो बार ही एक लाख वोटों का आंकड़ा पार कर पाई है.



पहली बार 1998 में जब उसने वहां के स्थानीय जातीय समीकरण को ध्यान में रखते हुए भूमिहार उम्मीदवार अवधेश सिंह को मैदान में उतारा था. इस चुनाव में बीएसपी तीसरे स्थान पर रही और उसे सिर्फ 10124 वोटो से संतोष करना पड़ा.

2004 में स्थानीय बाहुबली नेता मुख्तार अंसारी को टिकट देने का बीएसपी का दांव कारगर नहीं हो पाया था.


2004 में बीएसपी ने स्थानीय बाहुबली नेता मुख्तार अंसारी को मैदान में उतारा और उन्होंने बीजेपी के वरिष्ठ नेता मुरली मनोहर जोशी को कड़ी चुनौती दी. इस चुनाव में बीएसपी के करीब 1 लाख 85 हजार वोट मिले. साफ है इस सीट पर बीएसपी का परंपरागत वोट बहुत कम है.

वाराणसी सीट के जातीय आंकड़े देखें तो करीब 18 लाख मतदाताओं वाली इस सीट पर करीब साढ़े तीन लाख वैश्य, ढाई लाख ब्राह्मण, तीन लाख मुस्लिम, डेढ़ लाख भूमिहार, एक लाख राजपूत, 2 लाख पटेल, तीन लाख ओबीसी और सिर्फ 1 लाख दलित वोटर हैं. जातिगत आकड़े भी साफ कर रहे हैं कि वाराणसी का वोट गणित चन्द्रशेखर आजाद के पक्ष में नहीं है.

हालांकि वरिष्ठ पत्रकार अंबिकानंद सहाय इसके पीछे कांग्रेस और चन्द्रशेखर के बीच आपसी बातचीत को भी एक कारण मान रहे हैं. सहाय का मानना है कि जिस तरह प्रियंका के चुनाव लड़ने के लेकर पहले रॉबर्ट वाड्रा और बाद में राहुल गांधी का बयान आया, उससे एक बात तो साफ है कांग्रेस के शीर्ष नेतृत्व में प्रियंका गांधी को वाराणसी से चुनाव लड़ने को लेकर चर्चा जारी है. ऐसे में चन्द्रशेखर के यू-टर्न के पीछे कांग्रेस और चन्द्रशेखर की आपसी डील की संभावनाओं से इनकार भी नहीं किया जा सकता है.यह भी पढ़ें: मेनका गांधी पर लगा EC का बैन हुआ खत्म, आज करेंगी रोड शो और नामांकन

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