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वाराणसी लोकसभा सीट: पीएम मोदी से 'दूसरी जंग' में कितने कारगर होंगे अजय राय

News18 Uttar Pradesh
Updated: April 27, 2019, 2:19 PM IST
वाराणसी लोकसभा सीट: पीएम मोदी से 'दूसरी जंग' में कितने कारगर होंगे अजय राय
file photo

वाराणसी लोकसभा सीट को अगर आंकड़ों के आधार पर देखा जाए 1991 के बाद हुए 7 चुनावों में से 6 में बीजेपी ने जीत हासिल की है.

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पीएम नरेंद्र मोदी ने अपने लोकसभा क्षेत्र वाराणसी से दूसरी बात पर्चा दाखिल कर दिया है. उधर इससे पहले गुरुवार को कांग्रेस पार्टी ने प्रियंका गांधी ने यहां चुनाव लड़ने की अटकलों पर विराम लगा दिया. पार्टी ने स्थानीय बाहुबली अजय राय को एक बार फिर मोदी के सामने चुनाव लड़ने भेजा है. अजय राय ने 2014 में कांग्रेस के टिकट पर नरेंद्र मोदी के खिलाफ लड़ा था. वो अपनी जमानत भी नहीं बचा सके थे.

राजनीतिक प्रतीक बनी वाराणसी

2014 में जब पीएम पद के बीजेपी प्रत्याशी रहे नरेंद्र मोदी ने वाराणसी से चुनाव लड़ने का निर्णय लिया तो पहली बार ये शहर धार्मिक प्रतीक से राजनीतिक प्रतीक के रूप में तब्दील हुआ था. वैसे वाराणसी के चौक-चौराहे राजनीतिक चर्चा से हमेशा गुलजार रहते हैं लेकिन वाराणसी से नरेंद्र मोदी के चुनाव जीतकर पीएम बनने के बाद ये शहर देशभर में खुद चर्चा के केंद्र में आ गया. वह चुनाव इसलिए भी खूब चर्चित हुआ क्योंकि यूपीए के खिलाफ लड़ाई लड़कर राष्ट्रीय राजनीति में छाए अरविंद केजरीवाल भी बनारस से चुनाव लड़ने पहुंचे थे. हालांकि चुनाव नतीजों ने बताया कि नरेंद्र मोदी बहुत बड़े अंतर से चुनाव जीते लेकिन चुनाव से पहले देशभर की निगाहें इस सीट पर लगी हुई थीं.

बीते कुछ दिनों से ऐसा लग रहा था कि प्रियंका गांधी को चुनाव मैदान में उतार कर कांग्रेस इस चुनाव में पीएम मोदी को कड़ी टक्कर दे सकती है. कांग्रेस एमएलसी दीपक सिंह के बयान के बाद इन चर्चाओं को और बल मिला था लेकिन आखिरी समय में पार्टी अध्यक्ष राहुल गांधी ने इससे इंकार कर दिया.

1991 के बाद सिर्फ एक बार हारी बीजेपी

अगर आंकड़ों के आधार पर देखा जाए 1991 के बाद हुए सात चुनावों में 6 में बीजेपी ने जीत हासिल की है. 1991 में यहां से बीजेपी के श्रीशचंद्र दीक्षित जीते थे. बाद में शंकर प्रसाद जायसवाल बीजेपी के टिकट पर तीन बार ( 1996, 1998, 1999 ) चुनाव जीतकर संसद पहुंचे. सिर्फ 2004 में इस सीट पर कांग्रेस के राजेश मिश्रा ने जीत हासिल की थी. लेकिन फिर 2009 में बीजेपी के वरिष्ठ नेता मुरली मनोहर जोशी ने यह सीट कांग्रेस से छीन ली जिस पर 2014 के चुनाव में नरेंद्र मोदी ने रिकॉर्ड मतों से जीतकर कब्जा जमाया.


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समीकरण

वाराणसी लोकसभा सीट पर कुल पांच विधानसभा क्षेत्र आते हैं. ये क्षेत्र हैं- रोहनिया, वाराणसी उत्तर, वाराणसी दक्षिण, वाराणसी कैंट, सेवापुरी. यहां कुल मतदाताओं की संख्या 17,75,890 है. पिछले लोकसभा चुनाव में नरेंद्र मोदी को 5,81,022 वोट हासिल हुए थे कुल वोटों का 56.37 प्रतिशत था. अरविंद केजरीवाल को 2,09,238 वोट मिले थे जो कुल वोटों का 20.30 प्रतिशत था. तीसरे नंबर कांग्रेस के अजय राय रहे थे जिन्हें 75,614 वोट मिले थे.



अजय राय का राजनीतिक करियर

स्थानीय बाहुबली के रूप में पहचान रखने वाले अजय राय पर उत्तर प्रदेश में सभी की निगाहें तब गई थीं जब 1996 में उन्होंने वाराणसी की कोलअसला विधानसभा पर कम्युनिस्ट पार्टी के 9 बार से विधायक रहे उदल को हराया था. इस जीत के बाद अजय राय पूर्वांचल की राजनीति में जाना-पहचाना नाम बन गए थे.

अजय राय वाराणसी के कोलअसला विधानसभा क्षेत्र से तीन बार (1996, 2002, 2007) बीजेपी के टिकट पर विधायक बने. 2009 के आम चुनाव में अजय राय वाराणसी लोकसभा सीट से बीजेपी का टिकट चाहते थे. पार्टी ने उन्हें टिकट देने से मना किया तो वह बीजेपी छोड़कर समाजवादी पार्टी में शामिल हो गए. लेकिन बीजेपी के प्रत्याशी मुरली मनोहर जोशी के सामने अजय राय तीसरे नंबर आए. फिर जब यह सीट परिसीमन के बाद कोलअसला सीट खत्म कर दी गई तो 2012 में वो वाराणसी की पिंडरा सीट से विधायक बने. लेकिन अब वो समाजवादी पार्टी छोड़कर कांग्रेस में आ चुके थे.

2014 के चुनाव में अजय राय को नरेंद्र मोदी के सामने लेकर आई थी तो उन्हें पार्टी का बड़ा कार्ड माना जा रहा था.लेकिन अजय राय की जीत का सिलसिला यहीं थम गया. 2014 में जब नरेंद्र मोदी चुनाव लड़ने वाराणसी पहुंचे तो कांग्रेस को उनके सामने अजय राय सबसे मुफीद कैंडिडेट लगे. अजय राय लंबे समय से जिले में विधायक थे और उनका क्षेत्र में अच्छा-खासा प्रभाव था. लेकिन अजय राय चुनाव में अजय राय की जमानत जब्त हो गई. वो तीसरे नंबर पर आए. दूसरे नंबर अरविंद केजरीवाल थे.

वाराणसी का महत्व 

वाराणसी को पूर्वांचल की सांस्कृतिक राजधानी भी कहा जाता है. वाराणसी को अक्सर, भारत की धार्मिक राजधानी, भगवान शिव की नगरी, मंदिरों का शहर, दीपों का शहर, ज्ञान नगरी आदि नामों से पुकारा जाता है. अमेरिकी लेखक मार्क ट्वेन ने इस शहर के बारे में लिखा है- बनारस इतिहास से भी पुरातन है, परंपराओं से पुराना है, किंवदंतियों से भी प्राचीन है और जब इन सबको एकत्र कर दें, तो उस संग्रह से भी दोगुना प्राचीन है.

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First published: April 19, 2019, 9:25 PM IST
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