वाराणसी में टूटी 200 साल पुरानी रथयात्रा की परम्परा, Lord Jagannath मंदिर में ही 'Quarantine'
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वाराणसी में टूटी 200 साल पुरानी रथयात्रा की परम्परा, Lord Jagannath मंदिर में ही 'Quarantine'
200 साल में पहली बार वाराणसी में जगन्नाथ रथयात्रा नहीं निकली.

वाराणसी (Varanasi) में जगन्नाथ मन्दिर के पुजारी हरि प्रसाद उपाध्याय का कहना है कि जिला प्रशासन के आदेश न देने के उपरांत ये फैसला लिया गया है. मंदिर ट्रस्ट ने भी कोरोना को देखते हुए इस फैसले का सम्मान किया है और भगवान के भ्रमण के लिए रथयात्रा निकाले जाने से रोक दिया गया है.

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वाराणसी. विश्व की सबसे प्राचीन नगरी वाराणसी (Varanasi) में 200 साल पुरानी परंपरा कोरोना (COVID-19) की भेंट चढ़ गई. भगवान जगन्नाथ (Lord Jagannath) काशी (Kashi) में जहां ‘क्वारेंटाइन’ (Quarantine) रह गए, वहीं उनका रथ ताले में बंद है. हम बात कर रहे हैं वाराणसी की सबसे पुरानी रथयात्रा के मेले की, जो वाराणसी के लक्खा मेले में शुमार है. इसे देखने के लिए हर साल पूरे पूर्वांचल से लोग आते थे लेकिन आज वो सड़क पूरी खाली है, जहां भगवान जगन्नाथ भ्रमण के लिये निकलते हैं.

भगवान जगन्नाथ का रथ, ताले में बंद पड़ा है. भगवान इस बार काशी में भ्रमण नही कर पाए और न ही उनका रथ इस गेट के बाहर निकल पाया. इसे लेकर काशी के लोगो में खासा नाराजगी भी दिखी लेकिन कोरोना काल के लिए इसे सही भी ठहराया. लोगों का कहना है कि 200 साल पुरानी ये परम्परा आज टूट गई. वे मायूस हैं कि इस बार भगवान का दर्शन उन्हें नहीं हो पाया.

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जगन्नाथ मन्दिर के पुजारी हरि प्रसाद उपाध्याय का कहना है कि जिला प्रशासन के आदेश न देने के उपरांत ये फैसला लिया गया है. मंदिर ट्रस्ट ने भी कोरोना को देखते हुए इस फैसले का सम्मान किया है और भगवान के भ्रमण के लिए रथयात्रा निकाले जाने से रोक दिया गया है.
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भले ही पुरी में भगवान जगन्नाथ के मेले पर सुप्रीम कोर्ट के दखल के बाद मेले की शुरुआत हुई लेकिन वाराणसी में ऐसा नहीं हुआ. जिसके कारण भगवान जगन्नाथ अब भी कोरंटिन हैं. लिहाजा धर्म नगरी काशी की एक बड़ा उत्सव कोरोना के भेंट चढ़ गया.

ऐसे निकाली जाती है श्री जगन्नाथ रथ यात्रा:
हिंदू धर्म परम्परा में श्री जगन्नाथ रथ यात्रा का काफी महत्व है. यात्रा शुरू होने से पहले सोने की मूठ वाली झाड़ू से श्री जगन्नाथ के रथ के सामने का रास्ता साफ किया जाता है. इसके बाद विधिवत पूजा पाठ, मन्त्रों के जाप और ढोल, ताशे, नगाड़े की जोरदार आवाज के साथ भक्त भगवान श्री जगन्नाथ के रथ को मोटे मोटे रस्सों के सहारे खींचकर पूरे नगर में भ्रमण करते हैं. ऐसा माना जाता है कि भगवान जगन्नाथ का रथ खींचने में जो लोग एक दूसरे की सहायता करने हैं वो जन्म मरण के बंधन से मुक्त हो जाते हैं.
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