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वाराणसी: माया मोह से घिर गए कबीर के अनुयायी, दो के बीच छिड़ गई है संपत्ति को लेकर जंग

वाराणसी: माया मोह से घिर गए कबीर के अनुयायी, दो के बीच छिड़ गई है संपत्ति को लेकर जंग

महंत गोविंद दास शास्त्री और कबीरचौरा मूलगादी के महंत विवेकदास के बीच ​संपत्ति विवाद.

महंत गोविंद दास शास्त्री और कबीरचौरा मूलगादी के महंत विवेकदास के बीच ​संपत्ति विवाद.

Mahant Dispute in Varanasi: वाराणसी में लहरतारा स्थित जो कबीर प्राकट्य स्थल है, उसके बारे में मान्यता है कि यहां कबीर प्रकट हुए थे. वहीं कबीरचौरा मूलगादी मठ में उनका लालन पोषण हुआ. अब संत कबीर से जुड़े इन दोनों स्थलों में मुखियाओं के बीच संपत्ति विवाद का मुकाबला काशी में चर्चा का विषय बना हुआ है.

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वाराणसी. ‘माया मुई न मन मुआ, मरी मरी गया सरीर। आसा त्रिसना न मुई, यों कही गए कबीर।।’. अपने इस दोहे से संत कबीर ने आम जनमानस को ये समझाने की कोशिश की है कि शरीर, मन माया सब खत्म हो जाता है लेकिन दिल में पनपने वाली आशा, उम्मीद, तृष्णा कभी खत्म नहीं होती. यानी सांसरिक मोह माया की तृष्णा में नहीं फंसना चाहिए. उसी संत कबीर की काशी में उनके अनुनायियों में ही माया यानी संपत्ति को लेकर जंग छिड़ी हुई है.

ये जंग है कबीर प्राकट्य स्थल लहरतारा के महंत गोविंद दास शास्त्री और कबीरचौरा मूलगादी के महंत विवेकदास के बीच. दरअसल, वाराणसी में लहरतारा स्थित जो कबीर प्राकट्य स्थल है, उसके बारे में मान्यता है कि यहां कबीर प्रकट हुए थे. वहीं कबीरचौरा मूलगादी मठ में उनका लालन पोषण हुआ. अब संत कबीर से जुड़े इन दोनों स्थलों में मुखियाओं के बीच संपत्ति विवाद का मुकाबला काशी में चर्चा का विषय बना हुआ है. गोविंददास शास्त्री के मुताबिक, बीती चार जनवरी को विवेकदास बिहार के अपराधी किस्म के व्यक्ति गुरु प्रसाद समेत करीब दो दर्जन लोगों के साथ उनकी गैर मौजूदगी में लहरतारा मठ पर आए. पुजारियों के साथ मारपीट की. मठ पर कब्जा करके उसे घेर लिया. आला अफसरों को सूचना के बाद पुलिस ने देर रात में मठ को मशक्कत के बाद खाली कराया.

कोई नहीं रोक सकता
अब विवेकदास उनकी हत्या की साजिश रच रहे हैं और प्रशासन कोई कार्यवाही नहीं कर रहा है. जबकि महंत विवेकदास का कहना है कि लहरतारा मठ भी मूलगादी मठ से संचालित है. बीते साल जब वो छह महीने की अमेरिका यात्रा पर गए थे तो लहरतारा मठ के देखरेख की जिम्मेदारी गोविंददास को दे गए थे. लौटकर आए तो गोविंददास स्वयंभू महंत बनकर कब्जा कर लिए लेकिन ऐसा नहीं होता है. लहरतारा मठ में तालाब से लेकर दूसरे विकास कार्य कराने के लिए वो मठ जाएंगे. उन्हें कोई नहीं रोक सकता.

फिलहाल थाने से आगे बढ़कर मामला अदालत तक पहुंच गया है लेकिन जिस तरीके के गंभीर आरोप लग रहे हैं, वैसे मे किसी अनहोनी की आशंका से कबीर अनुयायी दहशत में हैं.

Tags: Property dispute, UP latest news

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