यूं ही PM मोदी के भरोसेमंद नहीं हैं MLC- AK शर्मा, बड़ी लंबी है उनके किस्सों की कतार 

1988 बैच के गुजरात कैडर के आईएएस अधिकारी एके शर्मा और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का साथ 18 साल से बेजोड़ रहा है.

1988 बैच के गुजरात कैडर के आईएएस अधिकारी एके शर्मा और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का साथ 18 साल से बेजोड़ रहा है.

1988 बैच के गुजरात कैडर के आईएएस अधिकारी एके शर्मा और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का साथ 18 साल से बेजोड़ रहा है. जब मोदी गुजरात के सीएम थे, तब भी एके शर्मा वहां बतौर सीडीओ और डीएम के साथ सीएम कार्यालय में सचिव भी रहे. कई मौकों पर एके शर्मा ने खुद को साबित किया.

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वाराणसी. एमएलसी एके शर्मा ( MLC A K Sharma) के नाम को लेकर यूपी में भाजपा संगठन और सरकार के बीच चर्चाओं का बाजार गर्म है. पूर्वांचल के छोटे से जिले मऊ से वाया दिल्ली दरबार होते हुए लखनऊ और बनारस के सफर तक उनके कई किस्से हैं. आखिर एके शर्मा क्यों है दिल्ली दरबार या यूं कहें पीएम नरेंद्र मोदी ( Narendra Modi) के भरोसेमंद अफसरों में शामिल हैं ?

1988 बैच के गुजरात कैडर के आईएएस अधिकारी एके शर्मा और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का साथ 18 साल से बेजोड़ रहा है. जब मोदी गुजरात के सीएम थे, तब भी एके शर्मा वहां बतौर सीडीओ और डीएम के साथ सीएम कार्यालय में सचिव भी रहे. कई मौकों पर एके शर्मा ने खुद को साबित किया. एके शर्मा पीएम मोदी के संसदीय क्षेत्र बनारस से नजदीक मऊ जिले के मूल रूप से रहने वाले हैं. साधारण परिवार से ताल्लुक रखने वाले एके शर्मा ने यहीं के एक प्राइमरी स्कूल से प्रारंभिक शिक्षा ली. डीएवी से इंटर किया और फिर इलाहाबाद यूनिवर्सिटी से ग्रेजुएशन, पोस्ट ग्रेजुएशन करने के साथ पीएचडी की डिग्री भी हासिल की. इलाहाबाद में ही सिविल सेवा परीक्षा की तैयारी करते हुए आईएएस बने.

गुजरात में अपने कार्यकाल के समय के कुछ काम को लेकर भी एके शर्मा चर्चा में रहे. बताया जाता है कि रोजगार देने के लिए देश की एक नामचीन कंपनी को गुजरात के साणंद में फैक्ट्री लगानी थी, लेकिन कई प्रयास के बाद जमीन नहीं मिल रही थी. इस मसले को सुलझाने की जिम्मेदारी एके शर्मा को मिली और उन्होंने बेहद कम समय में समस्या का समाधान कर दिया और फैक्ट्री लग गई. बात चाहे भुज भूकंप में आपदा प्रबंधन की हो या फिर गुजरात में व्यापारिक गतिविधियां बढ़ाने की. हर जगह आईएएस एके शर्मा ने अहम रोल प्ले किया, जिसके बाद वे पीएम मोदी की गुडबुक में अपनी जगह मजबूत करते चले गए. कहा तो ये भी जाता है कि साल 2014 में अमेरिका की एंबेसडर नैन्सी पावल को गांधीनगर लाने के पीछे भी एके शर्मा ने अहम भूमिका निभाई, जिसके बाद गुजरात दंगों को लेकर बिगड़ी चीजें ठीक हुईं.

एके शर्मा को एक तरफ नीचे के स्तर पर काम करने के लिए बेस्ट सीडीओ और डीडीओ का अवार्ड मिला. वहीं ए-गवर्नन्स के ज़रिए ट्रैन्स्पेरेन्सी लाने के लिए यूएनओ का पुरस्कार भी मिला है. गुजरात में वे तीन तीन जिलों के डीएम के साथ कई पब्लिक सेक्टर कारपोरेशन के सीईओ और एमडी रहे हैं. इन्फ्रास्ट्रक्चर विकास, औद्योगिकरण, निवेश और डिजास्टर मैनेजमेंट पर विशेष पकड़ है. बीते साल कोरोना काल की शुरुआत में प्रधानमंत्री कार्यालय में थे. विशेष रूप से कोविड से लडऩे के लिए जरूरी साधन- समान देश विदेश से जुटाने में बहुत काम किया.
आईएएस की नौकरी छोड़ते समय भारत सरकार में एमएसएमई मंत्रालय के सचिव रहे. पिछले साल इसी समय पर जब कोविड की पहली लहर पीक पर थी. लाखों उद्यम बंद हो गए थे और करोड़ों मजदूर सडक़ों पर थे. उन्होंने इस सेक्टर को बचाने के लिए पीएम मोदी के लीडरशिप में बड़ा रोल प्ले किया. कहा जाता है कि पीएम बनने के बाद खुद नरेंद्र मोदी उनको गुजरात से दिल्ली ले गए. जहां महत्वपूर्ण जिम्मेदारी एके शर्मा को सौंपी गई.

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