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काशी में बाबा विश्वनाथ की चौखट पर पूरी होगी मोक्ष की कामना, जानें क्या है बैद्यनाथ भवन

काशी में बाबा विश्वनाथ की चौखट पर पूरी होगी मोक्ष की कामना, जानें क्या है बैद्यनाथ भवन

काशी विश्वनाथ धाम में बना मुमुक्षु भवन  12 अगस्त से शुरू हो रहा है.

काशी विश्वनाथ धाम में बना मुमुक्षु भवन 12 अगस्त से शुरू हो रहा है.

Varanasi News: मोक्ष प्रदान करने वाले बाबा विश्वनाथ की चौखट पर ही मोक्ष की कामना पूरी होगी. काशी विश्वनाथ धाम में बना मुमुक्षु भवन 12 अगस्त से शुरू हो रहा है और इसका नाम है श्री बैजनाथ भवन.

हाइलाइट्स

दो मंजिला बैजनाथ भवन में 40 के करीब बुजुर्ग रह सकते हैं.
श्री काशी विश्वनाथ मंदिर और धाम की वेबसाइट पर उपलब्ध है.जानकारी.

वाराणसी. गंगा किनारे बसी धर्म नगरी वाराणसी को मोक्ष की नगरी भी कहा जाता है. धार्मिक मान्यता है कि यहां प्राण त्यागने वाले को खुद बाबा विश्वनाथ तारक मंत्र यानी मोक्ष प्रदान करते हैं इसीलिए सैकड़ों सालों से अपने जीवन के अंतिम पलों काशी में आकर कई बुजर्ग रहते हैं. अब मोक्ष प्रदान करने वाले बाबा विश्वनाथ की चौखट पर ही मोक्ष की कामना पूरी होगी. काशी विश्वनाथ धाम में बना मुमुक्षु भवन 12 अगस्त से शुरू हो रहा है और इसका नाम है श्री बैजनाथ भवन. आइए आपको इसके बारे में बताते हैं…

इस भवन के संचालन की जिम्मेदारी मुंबई की तारा संस्था को मिली है. देशभर के अलग अलग हिस्सों के लोग इस भवन में रहने के लिए संपर्क करने लगे हैं. इस भवन में रहने वाले बुजुर्गों को ना केवल नियमित बाबा विश्वनाथ के दर्शन होंगे बल्कि वे मोक्षदायिनी मां गंगा की गोद में स्नान भी कर सकेंगे. करीब 1161 वर्ग मीटर में बने इस दो मंजिला बैजनाथ भवन में 40 के करीब बुजुर्ग रह सकते हैं. यहां 65 साल के ऊपर की आयु वाले बुजुर्गों के रहने की व्यवस्था होगी. इसमें भी जो बुजुर्ग अशक्त होंगे, उनको प्राथमिकता मिलेगी. भवन से जुड़ी तमाम तरह की जानकारी श्री काशी विश्वनाथ मंदिर और धाम की वेबसाइट पर उपलब्ध है. खास बात यह है कि अशक्त बुजुर्गों के लिए केयरटेकर की भी सुविधा मिलेगी जो उनके खाने-पीने, कपड़े धोने आदि की व्यवस्था देखेगा.

यह होगा नियम
यहां रहने वाले बुजुर्गों को बार.बार यहां से जाने की इजाजत नहीं होगी. एक बार जो बुजुर्ग मुमुक्षु भवन छोड़कर जाएंगे उन्हें दोबारा प्रवेश नहीं मिलेगा. केवल परिजनों की सहमति से ही इस मुमुक्षु भवन में प्रवेश मिलेगा. यहां रहने की व्यवस्था नि:शुल्क होगी.

दरअसल, यह माना जाता है कि वाराणसी में प्राण त्यागने से मोक्ष की प्राप्ति होती है. ऐसे में बुजुर्गों की ख्वाहिश रहती है कि वे अंतिम वर्षों में यहां आकर रहें. काशी में मोक्षप्राप्ति के लिए भवन बने हुए हैं, इन भवनों को मुमुक्षु भवन कहते हैं.

अभी तक अस्सी और गोदौलिया में एक एक मुमुक्षु भवन बना है, जो चैरिटेबल संस्था की ओर से संचालित किए जाते हैं.

Tags: Kashi Vishwanath Dham, UP news, Varanasi news

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