काशी विश्वनाथ मंदिर और ज्ञानवापी मस्जिद विवाद: 15 अक्टूबर को होगी अगली सुनवाई

काशी विश्वनाथ मंदिर और ज्ञानवापी मस्जिद विवाद (file photo)
काशी विश्वनाथ मंदिर और ज्ञानवापी मस्जिद विवाद (file photo)

याचिका में मस्जिद की ओर से दोनों पक्षों का कहना है कि इस मामले की सुनवाई का अधिकार सेंट्रल सुन्नी वक्फ बोर्ड (Central Sunni Waqf Board) लखनऊ को है न कि अवर न्यायालय वाराणसी को.

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वाराणसी. वाराणसी में श्रीकाशी विश्वनाथ मंदिर से जुड़े ज्ञानवापी मस्जिद विवाद में अब सबकी निगाहें 15 अक्टूबर को लगी हैं. ऐसा इसलिए कि अब इस मुकदमे की सुनवाई वाराणसी (Varanasi) के सीनियर जज सिविल डिवीजन फास्ट ट्रैक कोर्ट में चलेगा या नहीं, इस पर जिला जल की अदालत फैसला करेगी. मंगलवार को दोनों पक्षों की बहस सुनने के साथ कोर्ट ने मूल पत्रावलियों का अवलोकन किया. इस बाबत जिला जज वाराणसी कोर्ट में सुनवाई को लेकर सुबह से ही परिसर में दोपहर में सुनवाई शुरू होने तक काफी गहमागहमी बनी रही. हालांकि, दोपहर बाद इस मामले में अगली तिथि 15 अक्टूबर की पड़ गई.

पिछली तारीख पर जिला जज की अदालत ने विलंब होने के कारण सुन्नी सेंट्रल वक्फ बोर्ड पर 3 हजार रुपए का जुर्माना लगाते हुए निगरानी याचिका में मियाद अधिनियम के तहत माफी के सुन्नी वक्फ बोर्ड के आवेदन को स्वीकार कर लिया है. इसके बाद आज सुन्नी सेंट्रल वक्फ बोर्ड और इंतजामिया कमेटी की याचिका पर सुनवाई हुई. कोर्ट ने दोनों पक्षों की बहस सुनने और पत्रावालियों का अवलोकन करने के बाद इस मामले में 15 अक्टूबर की तारीख नियत की.

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याचिका में मस्जिद की ओर से दोनों पक्षों का कहना है कि इस मामले की सुनवाई का अधिकार सेंट्रल सुन्नी वक्फ बोर्ड लखनऊ को है न कि अवर न्यायालय वाराणसी को. लेकिन खास बात ये है कि अगर हर तारीख के बीच के अंतराल को देखें तो न्यायालय की ओर से भी इस मामले में तेजी से सुनवाई हो रही है.
वर्ष 1991 से कोर्ट में लंबित प्रकरण 

वहीं दूसरी ओर प्राचीन मूर्ति स्वयंभू ज्योतिर्लिंग भगवान विश्वेश्वर महादेव की पैरवी के लिए अदालत से नियुक्त वादमित्र विजय शंकर रस्तोगी ने वर्ष 1991 से लंबित इस प्रकरण में आवेदन देकर ज्ञानवापी परिसर का पुरातात्विक सर्वेक्षण कराए जाने और पूजा-पाठ की अनुमति दिए जाने का अनुरोध किया है. फिलहाल याचिका के मुताबिक, पहले ये तय होगा कि इसकी सुनवाई वाराणसी में मौजूदा कोर्ट में होगी या नहीं.
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