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नरेंद्र मोदी का रोड शो: PM ने काशी के अल्हड़ मिजाज को आत्मीयता से अपनाया है

भूपेंद्र चौबे | News18 Uttar Pradesh
Updated: April 25, 2019, 8:47 PM IST
नरेंद्र मोदी का रोड शो: PM ने काशी के अल्हड़ मिजाज को आत्मीयता से अपनाया है
रोड शो के दौरान पीएम मोदी

आज जो सबसे बड़ी चीज साफ हुई वो ये कि नरेंद्र मोदी से बनारस की जनता मंत्र मुग्ध है.

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आज जो सबसे बड़ी चीज साफ हुई वो ये कि नरेंद्र मोदी से बनारस की जनता मंत्र मुग्ध है. पिछले पांच साल में हमने नरेंद्र मोदी का तीसरा रोड शो देखा है. पहली बार, 2014 में जब वे प्रधानमंत्री पद के दावेदार थे, उसके बाद 2017 में जब वे बीजेपी को प्रदेश में अपूर्व जीत दिलाने का प्रयास कर रहे थे और अब 2019 में जब पिछले दो चुनावों के नतीजों को दुहराने का प्रयास कर रहे हैं.

काशी की जनता मंत्रमुग्ध इसलिए है, क्योंकि काशी का जो अल्हड़पन है, काशी का मिजाज है, जिसे समझने के लिए लोग दुनिया भर से यहां आते हैं, मोदी उस काशीपन से अपनी आत्मीयता बनाने में सफल रहे हैं. चाहे बात काशी की सड़कों की हो, घाटों की सफाई की हो, या फिर काशी के बाहर मोदी द्वारा गोद लिए गए गांव में विकास की.

काशी का मन जीतने की कोशिश

यहां एक तरफ पीएम मोदी की लोगों का मन जीतने की कोशिश है और दूसरी ओर प्रियंका का लोगों के मन में यहां से लड़ने की उम्मीद की लौ जगा कर फिर उसे बुझा देना है. प्रियंका गांधी शायद ये भूल गईं कि अरविंद केजरीवाल जब मोदी के खिलाफ यहां से लड़े तो उनकी पार्टी का बस जन्म ही हुआ था. फिर भी वो मोदी के सामने सिर्फ दो लाख वोट लाए. 2009 में जब मुरली मनोहर जोशी जब यहां से चुनाव लड़ रहे थे तब उन्हें महज 16 हजार वोटों से जीत मिली थी. जोशी के प्रतिद्वंद्वी मुख्तार अंसारी को भी साढ़े तीन लाख वोट मिले थे. तो क्या प्रियंका गांधी बीजेपी के नेता को इस चुनाव में चुनौती देने में सक्षम नहीं थीं?



मोदी का रोड शो इसलिए भी मायने रखता है, क्योंकि वे लंका से चल कर जिन रास्तों से होते हुए दशाश्वमेध घाट तक पहुंचे, ये वो रास्ते हैं जहां पर बनारस का उद्यमी और कारोबारी रहता है. कहीं न कहीं ये भी संदेश देने का प्रयास है कि नोटबंदी, जीएसटी जैसे मुद्दे, जिनको लेकर विपक्ष मोदी पर हमला करता रहा है, उन मुद्दों से मोदी अपने को कमजोर नहीं समझते. बल्कि और ज्यादा मजबूत मानते हैं.

कांग्रेस ने माना मोदी का तोड़ नहींमोदी के सिर पर सबसे बड़ा सेहरा प्रियंका गांधी ने ही बांध दिया. पहले प्रियंका का ये कहना कि क्या वे लड़ जाएं बनारस से और फिर उनका ये कहना कि अगर उनकी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष कहेंगे तो वे लड़ जाएंगी. फिर आज अजय राय जैसे नेता को पार्टी का टिकट दे देने से कहीं न कहीं ये संदेश जाता है कि कांग्रेस ने ये मान लिया है कि पार्टी के पास मोदी का कोई तोड़ नहीं है.

एक ओर नामांकन भरते समय मोदी एनडीए के सभी घटक दलों के साथ रहेंगे, दूसरी ओर राहुल गांधी और प्रियंका गांधी इस चुनाव में अपने लिए नए मित्र तलाश नहीं पाए.

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First published: April 25, 2019, 8:43 PM IST
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