Lockdown वाराणसी: महाश्‍मशान घाट पर कौन सी साधना करना चाहती थी रूसी महिला!
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Lockdown वाराणसी: महाश्‍मशान घाट पर कौन सी साधना करना चाहती थी रूसी महिला!
कौन सी साधना करना चाहती थी रूसी महिला

दरअसल, ये कहानी लॉकडाउन के पहले की है. जोया अपने दो बेटों और एक अमेरिकी दोस्त के साथ वाराणसी के मणिकर्णिका घाट के सामने गंगा किनारे रेती पर पहुंची.

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वाराणसी. पूरी दुनिया में डर और दहशत का दूसरा नाम बन चुके कोरोना वायरस (COVID-19) से लड़ रहे देश में लॉक डाउन (Lockdown) है. इस बीच लॉकडाउन के चलते वाराणसी के श्मशान घाट पर अनुष्‍ठान करने की अनुमति नहीं मिलने पर रूसी महिला और उसके दोस्तों ने जमकर हंगामा किया. उनका कहना था कि हर अमावस्‍या के दिन वह साधना करते हैं. अगर रोका गया तो साधना भंग हो जाएगी.

काशी का महाश्मशान मणिकर्णिका घाट ऐसे तंत्र और तप साधना का प्रमुख केंद्र है. न केवल देश बल्कि विदेशों से बड़ी संख्या में लोग यहां पहुंचकर तप साधना करते हैं. यूं तो यहां हमेशा कोई न कोई तप, जप और साधना चलती रहती है लेकिन अमावस्या की रात सबसे ज्यादा तप और साधना यहां होती है. शायद ऐसे ही किसी तप और साधना को करने के लिए लॉकडाउन से पहले अपने दो बेटों और एक अमेरिकी दोस्त के साथ रुसी महिला जोया भी बनारस पहुंची थी. लेकिन इस बार जब अमावस्या आई तो लॉकडाउन था. जिसकी वजह से मणिकर्णिका घाट पर भी किसी तरीके की भीड़ और पूजा पाठ की इजाजत नहीं थी.

जिस वजह से रुसी महिला की ये इच्छा पूरी नहीं हुई. इसको लेकर जोया, उसके बेटों और दोस्त ने क्वारंटीन सेंटर में हंगामा किया. दरअसल, ये कहानी लॉकडाउन के पहले की है. जोया अपने दो बेटों और एक अमेरिकी दोस्त के साथ वाराणसी के मणिकर्णिका घाट के सामने गंगा किनारे रेती पर पहुंची. यहां उसके एक कुटिया बनाई और वहीं रहने लगी. वहीं उसने अपने लिए खाने पीने का सामान भी इकठ्ठा कर लिया. चर्चा है कि उसे इंतजार था, अमावस्या का. इस बीच कोरोना संक्रमण के कारण लॉकडाउन हो गया और नाव संचालन भी गंगा में बंद हो गया.



इसी वजह से एक दिन जब पानी और कुछ सामान के लिए कुटिया से निकलकर जोया, उसके दोनों बेटे और दोस्त गंगा उस पर डोमरी गांव के आसपास पहुंचे तो लोगों ने इसकी सूचना पुलिस को दी. पुलिस ने पर्यटन विभाग को इसकी सूचना दी. आला अधिकारियों के आदेश पर गंगा उस पार रामनगर के साहित्यननाका स्थित क्वारंटाइन सेंटर में चारों को भेज दिया गया. क्योंकि इस वक्त तक एयरपोर्ट भी बंद हो गए थे. लेकिन जोया को अमावस्या यानी 22 मार्च के महाश्मशान मणिकर्णिका घाट पर पूजन करना था.
इसलिए वो अपने दोनो बेटों और दोस्त के साथ क्वारंटीन सेंटर से निकलकर महाश्मशान जाने लगी लेकिन पुलिस ने उन्हें जाने नहीं दिया. जिस पर नाराज होकर सभी ने हंगामा किया. यहां तक की सुबह खाना भी नहीं खाया. सूचना पर रामनगर नगर पालिका के ईओ और पर्यटन विभाग के निरीक्षक भी पहुंचे और उन्हें समझाने का प्रयास किया. एक ओर संक्रमण के खतरे को देखते हुए अफसर निकलने की इजाजत नहीं दे रहे थे दूसरी ओर बेचैन जोया महाश्मशान जाने की जिद पर अड़ी रही.

कई घंटे तक वो कभी नाराज होकर तो कभी गुजारिश करने के अंदाज में मांग करती रही लेकिन बाद में मामला किसी तरह से शांत हो गया. इस घटना की इलाके में खूब चर्चा रही. एक सवाल जो सभी के बीच से उठ रहा था कि महाश्मशान मणिकर्णिका घाट पर आखिर जोया को अमावस्या को कौन का अनुष्ठान करना था.

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