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23 साल की कड़ी मेहनत के बाद 'लाल' हुई भिंडी, वैज्ञानिकों ने किया कमाल

News18 Uttar Pradesh
Updated: September 23, 2019, 11:07 AM IST
23 साल की कड़ी मेहनत के बाद 'लाल' हुई भिंडी, वैज्ञानिकों ने किया कमाल
वैज्ञानिकों ने 23 साल की मेहनत के बाद भिंडी की नई किस्म विकसित करने में सफलता पाई है.

भारतीय कृषि वैज्ञानिकों को एक बड़ी सफलता मिली है. करीब 23 साल की कड़ी मेहनत के बाद भिंडी की नई प्रजाति विकसित की है. खास बात है कि यह भिंडी हरी होने की बजाय लाल (Red Ladyfinger) है.

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वाराणसी. भारतीय कृषि वैज्ञानिकों को एक बड़ी सफलता मिली है. करीब 23 साल की कड़ी मेहनत के बाद भिंडी की नई प्रजाति विकसित कर ली गई है. यह कमाल भारतीय सब्जी अनुसंधान संस्थान (Indian Institute Of Vegetable Research- IIVR) के वैज्ञानिकों ने किया है. सबसे खास बात है कि यह भिंडी हरी होने की बजाय लाल है और इसी कारण इसका नाम 'काशी लालिमा' (Kashi Lalima) रखा गया है.

उत्तर प्रदेश (Uttar Pradesh) के वाराणसी (Varanasi) में स्थित भारतीय सब्जी अनुसंधान संस्थान (IIVR) की यह सफलता काफी खास है. जागरण की खबर के मुताबिक, वैज्ञानिकों ने बताया कि यह भिंडी एंटी ऑक्सीडेंट, आयरन और कैल्शिय सहित तमाम पोषक तत्वों से भरपूर है. इसकी कई किस्मों को वैज्ञानिकों ने विकसित किया है. आम भिंडी के मुकाबले इसकी कीमत ज्यादा है. काशी लालिमा भिंडी की अलग-अलग किस्मों की कीमत 100 से 500 रुएए किलो तक है.

अब भारतीय किसान करेंगे उत्पादन
भारत में हरी भिंडी ही प्रचलन में है. लाल रंग की भिंडी पश्चिमी देशों में मिलती है और भारत भी वहीं से अपने उपयोग के लिेए मंगाता है. लेकिन, देश में इसकी किस्म विकसित हो जाने के बाद इसे आयात करने की जरूरत नहीं पड़ेगी. अब भारतीय किसान भी इसका उत्पादन कर सकेंगे.

1995-96 में शुरू हुआ था काम
संस्थान ने बताया कि 1995-96 में ही इसके लिए काम शुरू हो गया था. लेकिन अब जाकर सफलता मिली है. संस्थान से काशी लालिमा भिंडी का बीज आम लोगों के लिए दिसंबर से मिलने लगेगा. इससे किसानों को लाभ होगा ही, साथ ही आम लोग भी इससे भरपूर पोषक तत्व पाएंगे.

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First published: September 23, 2019, 10:29 AM IST
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