Sharad Purnima 2020: जानिए सात साल बाद शुक्रवार को निकला चांद क्यों है खास! ऐसे करें लक्ष्मी पूजन तो होगी धनवर्षा

13 साल बाद 2033 में सात अक्टूबर फिर अनुपम संयोग बनेगा.
13 साल बाद 2033 में सात अक्टूबर फिर अनुपम संयोग बनेगा.

शरद पूर्णिमा (Sharad Purnima) का हिंदू धर्म में खास महत्‍व है. जबकि इस बार तो करीब सात साल बाद शरद पूर्णिमा का अनुपम संयोग बन रहा है

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वाराणसी. आश्विन मास के शुक्ल पक्ष की पूर्णिमा (Purnima) तिथि को शरद पूर्णिमा या आश्विन पूर्णिमा कहते हैं. करीब सात साल बाद शुक्रवार को शरद पूर्णिमा का अनुपम संयोग इस साल बन रहा है. यही नहीं, इस साल सर्वार्थ सिदि योग भी बन रहा है, जिसे काशी के ज्योतिष बेहद महत्वपूर्ण मान रहे हैं. इस साल 30 अक्टूबर शुक्रवार (30 October Friday) की शाम करीब पांच बजकर 46 मिनट पर पूर्णिमा तिथि लग रही है,जो कि अगले दिन 31 अक्टूबर शनिवार की रात्रि आठ बजकर 19 मिनट तक रहेगी. हालांकि उदया तिथि के अनुसार पूर्णिमा तिथि 31 अक्टूबर को रहेगी. यानी स्नान, दान, व्रत और धार्मिक पूजा इसी दिन संपन्न होंगे.

जबकि उत्तर भारत में इस दिन की खास मान्यता खीर से जुड़ी हुई है. ऐसा कहा जाता है कि इस दिन अमृतवर्षा होती है. इसलिए चंद्रमा (Moon) के नीचे रखी खीर खाने से कई प्रकार की परेशानियां खत्म होती हैं. वहीं, काशी में इस बार शरद पूर्णिमा पर तुलसी परिक्रमा होगी, जो कि 24 घंटे अनवरत चलेगी. इसके अलावा बंगाली समुदाय में कोजागरी लोक्खी पूजा के दिन दुर्गापूजा वाले स्थान पर मां लक्ष्मी की विशेष रूप से प्रतिमा स्थापित की जाती है और उनकी पूजा की जाती है.

इस वजह से खास है शरद पूर्णिमा
महामंडलेश्वर स्वामी आशुतोषानंद गिरी महाराज ने बताया कि शरद पूर्णिमा वृंदावन और कृष्ण से जुड़ी है. तुलसी जी का एक नाम वृंदा भी है. इसलिए इस बार पूरे शरद पूर्णिमा के नक्षत्र तक लगातार भक्त तुलसी की परिक्रमा करेंगे. इसके लिए तैयारियां पूरी कर कर ली गई हैं. काशी विद्ध्त परिषद के महामंत्री और बीएचयू धर्म विज्ञान संकाय के प्रोफेसर राम नारायण दिवेदी ने बताया कि शरद पूर्णिमा के खास नक्षत्र की बात करें तो पांच शुभ योगों में चंद्रमा का योग 16 कलाओं से युक्त होगा. जबकि स्वामी आशुतोषानंद गिरी महाराज की मानें तो पूर्णिमा पर तिथि, वार और नक्षत्र से मिलकर सर्वार्थ सिद्धि योग बन रहा है. इसके साथ ही लक्ष्मी, शंख, महाभाग्य और शश नाम के चार राजयोग भी बन रहे हैं. पौराणिक मान्यता है कि समुद्र मंथन के दौरान शरद पूर्णिमा पर ही देवी लक्ष्मी प्रकट हुई थीं. शुक्रवार को पूर्णिमा होने से इसलिए लक्ष्मी प्राप्ति का योग और प्रबल हो जाता है. सात साल बाद बना ये संयोग अब 13 साल बाद 2033 में सात अक्टूबर को ही बनेगा.
शरद पूर्णिमा तिथि


शरद पूर्णिमा तिथि प्रारंभ- 30 अक्टूबर को शाम 05 बजकर 45 मिनट से
शरद पूर्णिमा तिथि समाप्त- 31 अक्टूबर को रात 08 बजकर 19 मिनट पर
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