लाइव टीवी

Mahashivratri 2020: जब तक कजरी, चैती और फाग नहीं सुन लेते, तब तक यहां सोते नहीं हैं भगवान शिव
Varanasi News in Hindi

Upendra Dwivedi | News18 Uttar Pradesh
Updated: February 20, 2020, 11:17 PM IST
Mahashivratri 2020: जब तक कजरी, चैती और फाग नहीं सुन लेते, तब तक यहां सोते नहीं हैं भगवान शिव
काशी के गंगा घाट के किनारे तंग गलियों में स्थित है श्री आत्माविरेश्वर महादेव का प्राचीन मंदिर.

बनारस में एक ऐसा शिवालय है जिसे पृथ्वी का सबसे पुराना शिवलिंग (Shivling) माना जाता है. यहां बाबा तब तक नहीं सोते, जब तक मौसम के मिजाज के मुताबिक संगीत नहीं सुन लेते. यही नहीं, ये परंपरा सदियों से चली आ रही है.

  • Share this:
वाराणसी. शिव के त्रिशूल पर बसे बनारस (Banaras) की एक पहचान यहां के संगीत घराने से भी है, लेकिन आप यह सुनकर आप चौंक जाएंगे कि इसी बनारस में एक ऐसा शिवालय है, जिसे पृथ्वी का सबसे पुराना शिवलिंग (Shivling) माना जाता है. यही नहीं, यहां बाबा तब तक नहीं सोते, जब मौसम के मिजाज के मुताबिक संगीत नहीं सुन लेते. पीढ़ियों पुरानी ये परंपरा आज भी यहां जीवंत है और स्थानीय कलाकारों द्वारा रोज निभाई जाती है.

यहां है ये मंदिर
काशी के गंगा घाट के किनारे तंग गलियों में स्थित है श्री आत्माविरेश्वर महादेव का प्राचीन मंदिर. मान्यता है कि बाबा विश्वनाथ की आत्मा यहीं बसती है, इसलिए इसका नाम आत्माविरेश्वर महादेव है. यहां शिव अग्नि के रूप में विराजित हैं, लेकिन सामान्य मनुष्य को ये पत्थर के रूप में दिखाई देते हैं. मां शीतला के पास स्थित इस मंदिर में शिव और संगीत का बेहद करीब नाता दिखाई देता है. यूं तो भारत में संगीत की परपंरा अनादिकाल से ही रही है. शायद इसीलिए सनातन धर्म के सभी देवी देवताओं के पास अपना एक अलग वाद्य यंत्र है.

विष्णु के पास शंख है तो शिव के पास डमरू. नारद मुनि और सरस्वती के पास वीणा है तो भगवान श्रीकृष्ण के पास बांसुरी, लेकिन इस शिवालय में बाबा का मन सिर्फ डमरू की ध्वनि से प्रसन्न नहीं होता है बल्कि यहां हर रोज श्रृंगार आरती के बाद बाबा के सोने से पहले संगीत की महफिल सजती है और तक तब तक चलती है, जब तक बाबा सो नहीं जाते और फिर होती है शयन आरती. संगीत भी मौसम के मुताबिक यानी कभी कजरी, कभी चैती, कभी फाग तो कभी भोजपुरी भजन.



न्‍यूज़ 18 ने की पड़ताल


इस तथ्य की पड़ताल के लिए न्यूज़ 18 की टीम जब पहुंची तो श्रृंगार आरती का समय हो गया था. कुछ देर बाद बाबा की आरती हुई. फिर महादेव के उद्घोष के बीच यहां विधिवत पौराणिक तरीके से आरती हुई. यहां उतनी ही और वैसे ही आरती होती है, जैसे बाबा विश्वनाथ की आरती होती है. जैसे ही आरती खत्म हुई, सभी ने गीतों की किताब हाथों में थाम ली. चूंकि होली नजदीक आ गई थी, इसलिए सभी ने फाग गाना शुरू कर दिया. आनंदबन आजु मचो होरी आनंदवन की सुरों पर सभी ने अपने सुर मिलाए. ये नजारा अदभुत था. उसके बाद गीतकार राजन तिवारी और श्रद्धा पांडेय ने हारमोनियम पर अपनी स्वरांजलि बाबा को अर्पित की. काफी समय तक संगीत की महफिल यूं ही सजी और यूं लग रहा था कि मानो वाकई बाबा फाग पर आनंद ले रहे हों. आपको बता दें कि ये प्रथा पीढ़ियों पुरानी है और काफी लोग अपने दादा के समय से इसे देखते आ रहे हैं.

 

मंदिर व्‍यवस्‍थापक ने कही ये बात
मंदिर की व्यवस्था देखने वाले मुदित अग्रवाल बताते हैं कि यहां हर रोज बाबा संगीत सुनकर ही सोते हैं. हर रोज यहां मौसम के हिसाब से बाबा को संगीत सुनाया जाता है. संगीत सुनने के बाद फिर 11 बजे बाबा की शयन आरती होती है. इस मंदिर के बारे में काशी में एक मान्यता ये भी है कि जिस दंपत्ति को औलाद नहीं होती, बाबा उनकी झोली भरते हैं. इस बात की तस्दीक यहां के लोगों के किस्सों में होती है. विख्यात भोजपुरी गायक राजन तिवारी और श्रद्धा पांडेय यहां अपनी स्वरांजलि देने अक्सर आते हैं. वे बताते हैं कि काशी ही नहीं पूरी दुनिया में ये एकलौता शिवालय है, जहां संगीत से शिव के रिश्ते की बानगी देखने को मिलती है. यहां स्वरांजलि देने के बाद एक ऐसी आत्म संतुष्टि मिलती है जिसको शब्दों में बयान नहीं किया जा सकता है. मान्यता है कि ध्वनि और शुद्ध प्रकाश से ही ब्रह्मांड की रचना हुई है. चारों वेद, स्मृति, पुराण आदि ग्रंथों में धर्म, अर्थ, काम और मोक्ष को साधने के हजारों हजार उपाए बताए गए हैं. इन उपायों में से एक है संगीत. संगीत आत्मा के सबसे नजदीक होता है और इसकी कोई भाषा नहीं होती. शायद इसीलिए शिवनगरी काशी में संगीत और शिव का ऐसा रिश्ता है जो आत्माविरेश्वर महादेव में पीढ़ियों से जीवंत है.

 

ये भी पढ़ें-
शिव मंदिर का निर्माण करा भाईचारे की मिसाल पेश कर रही हैं फातिमा, जानिए पूरा मामला

 

HOLI से पहले हो सकता है जेपी नड्डा की नई टीम का ऐलान,रेस में हैं UP के ये नेता

News18 Hindi पर सबसे पहले Hindi News पढ़ने के लिए हमें यूट्यूब, फेसबुक और ट्विटर पर फॉलो करें. देखिए वाराणसी से जुड़ी लेटेस्ट खबरें.

First published: February 20, 2020, 11:06 PM IST
पूरी ख़बर पढ़ें अगली ख़बर
corona virus btn
corona virus btn
Loading