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  • BHU में 'भूत-विद्या' कोर्स में दाखिले से पहले जानें किस प्राचीन ग्रंथ में है इसका जिक्र, सुश्रुत ने भी दी है मान्यता

BHU में 'भूत-विद्या' कोर्स में दाखिले से पहले जानें किस प्राचीन ग्रंथ में है इसका जिक्र, सुश्रुत ने भी दी है मान्यता

BHU के आयुर्वेद संकाय में शुरू हो रहा है भूत विद्या का कोर्स

BHU के आयुर्वेद संकाय में शुरू हो रहा है भूत विद्या का कोर्स

इंटरनेशनल जर्नल ऑफ आयुर्वेद एंड फार्मा रिसर्च (International Journal of Ayurveda and Pharma Research) के अनुसार इस कोर्स का मुख्य आधार यजुर्वेद जिसमें सुश्रुत (Shushrut ) ने भूत विद्या (Bhoot Vidya) )को आयुर्वेद की एक शाखा के रूप में परिभाषित किया है.

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    वाराणसी. हमेशा से ही भूतों की दुनिया (Ghost world) या अप्राकृतिक रूप से रहस्यमयी दुनिया की हैरतअंगेज बातों को जानने की उत्सुकता लोगों में रही है. अगर आप भी मेडिकल छात्र हैं और भूत विद्या को समझना चाहते हैं, तो बीएचयू (BHU) में 'भूत विद्या' का अध्ययन कर सकते हैं. भारत के प्राचीन ग्रंथ आयुर्वेद में इस विद्या के बारे में वर्णन मिलता है. शल्य-चिकित्सा यानी सर्जरी के पितामह (father of surgery) माने जाने वाले आचार्य सुश्रुत ने भूत-विद्या को आयुर्वेद की शाखा बताया है. इन्हीं संदर्भों के आधार पर बीएचयू ने 'भूत विद्या' (Bhoot Vidya) पर 6 महीने का सर्टिफिकेट कोर्स शुरू किया है. इस कोर्स से संबंधित कक्षाओं का पहला सत्र जनवरी से शुरू होगा.

    क्या है भूत विद्या का स्रोत ?
    काशी हिन्दू विश्वविद्यालय इन दिनों फिर से सुर्खियों में है. वजह है आयुर्वेद संकाय में शुरू होने वाला भूत विद्या कोर्स. इस कोर्स को बीएचयू का फैकल्‍टी ऑफ आयुर्वेद शुरू करने जा रहा है. फैकल्‍टी ऑफ आयुर्वेद में 'भूत विद्या' का 6 महीने का सर्ट‍िफिकेट कोर्स होगा. यह कोर्स जनवरी 2020 से शुरू होगा. जिसके लिए आवेदन की प्रक्रिया दो दिनों में शुरू हो जाएगी. कोर्स की फीस 50 हजार रुपये होगी. यह विश्व का पहला विश्वविद्यालय है जो भूत विद्या का अध्ययन कराएगा.

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    आयुर्वेद संकाय के प्रोफ़ेसर 'भूत विद्या' कोर्स के बारे में जानकारी देते हुए


    इस कोर्स में मनोचिकित्सा के बारे में सिखाया जाएगा, ताकि अज्ञात कारणों से होने वाले मनोदैहिक विकारों (Psychosomatic disorders) और असामान्य मनोवैज्ञानिक स्थितियों का इलाज किया जा सके. इंटरनेशनल जर्नल ऑफ आयुर्वेद एंड फार्मा रिसर्च के अनुसार इस कोर्स का मुख्य आधार आयुर्वेद शास्त्र है, जिसमें सुश्रुत ने भूत विद्या को आयुर्वेद की एक शाखा के रूप में परिभाषित किया है. बैचलर ऑफ आयुर्वेद मेडिसिन एवं (BAMS) और बैचलर ऑफ मेडिसिन एंड बैचलर ऑफ सर्जरी (MBBS) रखने वाले मेडिकल छात्र या डॉक्टर इस कोर्स में दाखिला ले सकते हैं.

    बीएचयू से जुड़े शिक्षक ने कहा कि विश्वविद्यालय के छात्रों में इस कोर्स को लेकर काफी उत्साह दिख रहा है. काशी हिन्दू विश्वविद्यालय में 'भूत विद्या' का कोर्स शुरू करके आयुर्वेद संकाय ने पुरानी पद्धति से मनोचिकित्सा के बारे में छात्रों को शिक्षित करके न सिर्फ पुरातन पद्धति को जिंदा कर रहा है, बल्कि मनोदैहिक विकारों और असामान्य मनोवैज्ञानिक स्थितियों का इलाज भी करेगा. (रिपोर्ट- अनुज सिंह)

    ये भी पढ़ें-  BHU में पढ़ाई जाएगी 'भूत विद्या', जानें कैसे होगा एडमिशन, कितनी होगी फीस?


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