स्वयंभू ज्‍योतिर्लिंग भगवान विश्वेश्वर Vs ज्ञानवापी मस्जिद मामले में जानिए कब होगी अगली सुनवाई....
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स्वयंभू ज्‍योतिर्लिंग भगवान विश्वेश्वर Vs ज्ञानवापी मस्जिद मामले में जानिए कब होगी अगली सुनवाई....
वाराणसी की ज्ञानवापी मस्जिद को लेकर मुकदमा सुर्खियों में है (फ़ाइल तस्वीर-काशी विश्वनाथ मंदिर)

इलाहाबाद हाईकोर्ट (Allahabad High Court) का दो दशक पुराना स्‍टे खत्‍म होने से स्वयंभू ज्‍योतिर्लिंग भगवान विश्वेश्वर (Swayambhu Jyotirlinga Lord Vishweshwar) के मुकदमे की सुनवाई फिर से वाराणसी की सिविल जज (सीनियर डिवीजन-फास्‍ट ट्रैक कोर्ट) की कोर्ट में शुरू हो गई है. इस मामले में तीन फरवरी को मस्जिद पक्षकार की ओर से पुरातात्विक सर्वेक्षण (Archaeological survey) को लेकर अपना जवाब देना होगा.

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वाराणसी. अयोध्या (Ayodhya) में रामलला विराजमान (Ramlala) के पक्ष में सुप्रीम फैसले (Ayodhya verdict) के बाद अब वाराणसी की ज्ञानवापी मस्जिद (Gyanvapi masjid) को लेकर मुकदमा सुर्खियों में है. मंगलवार को इस मामले में वाराणसी की फास्ट ट्रैक कोर्ट (Fast Track Court) में सुनवाई थी लेकिन ज्ञानव्यापी मस्जिद पक्ष की ओर से नए वकील पेश हुए, जिन्होंने कुछ कागजात और दस्तावेज मांगे. जिसके बाद इसकी तारीख अब तीन फरवरी तक बढ़ा दी गई. वहीं इस मामले में वाद मित्र की ओर से पुरातात्‍विक सर्वेक्षण (Archaeological survey) कराने की अर्जी से हलचल तेज हो गई.

दो दशक पुराना स्‍टे खत्‍म
बता दें कि इलाहाबाद हाई कोर्ट का दो दशक पुराना स्‍टे खत्‍म होने से स्वयंभू ज्‍योतिर्लिंग भगवान विश्वेश्वर के मुकदमे की सुनवाई फिर से वाराणसी की सिविल जज (सीनियर डिवीजन-फास्‍ट ट्रैक कोर्ट) की कोर्ट में शुरू हो गई है. भगवान विश्‍वेश्‍वर की ओर से ज्ञानवापी परिसर का पुरातात्विक सर्वेक्षण कराए जाने की अर्जी पर मस्जिद पक्षकारों से उनका पक्ष मांगा गया है. लेकिन पिछली तारीख में ज्ञानव्यापी मस्जिद पक्ष की ओर से उनके एक वकील के बीमार और दूसरे वकील के शहर से बाहर होने की वजह बताते हुए अगली तारीख देने का प्रार्थना पत्र दिया गया था. इस बार सुन्नी वक्फ बोर्ड का प्रार्थना पक्ष सामने आया और उनकी ओर से नए वकील तौहीद खान इस केस के लिए नियुक्त हुए. नए वकील ने केस से जुड़े कुछ दस्तावेज मांगे, उसके बाद अपना पक्ष रखने की बात कही.

ज्ञानवापी मस्जिद के नव-नियुक्त वकील को सुनने के बाद कोर्ट ने दोनो पक्षों के वकील की मौजूदगी में अगली तारीख 3 फरवरी लगाई. अब तीन फरवरी को मस्जिद पक्षकार की ओर से पुरातात्विक सर्वेक्षण को लेकर अपना जवाब देना होगा. स्वयंभू ज्‍योतिर्लिंग भगवान विश्‍वेश्‍वर की ओर से पंडित सोमनाथ व्‍यास और अन्‍य ने ज्ञानवापी में नए मंदिर के निर्माण और हिंदुओं को पूजा-पाठ का अधिकार देने आदि को लेकर वर्ष 1991 में स्‍थानीय अदालत में मुकदमा दाखिल किया था. भगवान विश्‍वेश्‍वर के पक्षकारों की ओर से कहा गया था कि ज्ञानवापी मस्जिद ज्‍योतिर्लिंग विश्‍वेश्‍वर मंदिर का अंश है. वहां हिंदू आस्‍थावानों को पूजा-पाठ, राग-भोग, दर्शन आदि के साथ निर्माण, मरम्‍मत और पुनरोद्धार का अधिकार प्राप्‍त है.
पुरातात्‍विक सर्वे की अर्जी से बढ़ी हलचल


गौरतलब है कि इस मुकदमे में वर्ष 1998 में हाई कोर्ट के स्‍टे से सुनवाई स्थगित हो गई थी, जो अब सुप्रीम कोर्ट के फैसले के अनुपालन में फिर से शुरू हुई है. सिविल जज ने मुकदमे की सुनवाई शुरू करते ही दिवंगत वादी पंडित सोमनाथ व्‍यास और डॉ. रामरंग शर्मा के स्‍थान पर प्रतिनिधित्‍व करने के लिए पूर्व जिला शासकीय अधिवक्‍ता (सिविल) विजय शंकर रस्‍तोगी को वाद-मित्र नियुक्ति किया है. वाद मित्र की ओर से पुरातात्‍विक सर्वेक्षण कराने की अर्जी से हलचल तेज हो गई. कोर्ट ने इस अर्जी पर विपक्षी अंजुमन इंतजामिया मस्जिद और सुन्नी वक्‍फ बोर्ड (लखनऊ) से आपत्ति तलब की है. स्वयंभू ज्योतिर्लिंग श्रीकाशी विश्वनाथ की ओर वाद मित्र विजय शंकर रस्तोगी ने कोर्ट में दी गई अर्जी में कहा है कि कथित विवादित ज्ञानवापी परिसर में स्वयंभू विश्वेश्वर का शिवलिंग आज भी स्थापित है. मंदिर परिसर के हिस्‍सों पर मुसलमानों ने आधिपत्‍य करके मस्जिद बना दिया.

अर्जी में कहा गया है कि 15 अगस्त1947 को भी विवादित परिसर का धार्मिक स्वरूप मंदिर का ही था. इस मामले में केवल एक भवन ही नहीं, बल्कि बड़ा परिसर विवादित है. लंबे इतिहास के दौरान पूरे परिसर में समय-समय पर हुए परिवर्तन के साक्ष्‍य एकत्रित करने और धार्मिक स्‍वरूप तय करने के लिए भारतीय पुरातत्‍व सर्वेक्षण विभाग (एएसआई) से सर्वेक्षण कराया जाना जरूरी है. वाद मित्र ने भवन की बाहरी और अंदरूनी दीवारों, गुंबदों, तहखाने आदि के सबंध में एएसआई की निरीक्षण रिपोर्ट मंगाने की अपील की है.


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