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Varanasi News:जानिए क्यों पांच मिनट की लीला को देखने के लिए जुटती है लाखों की भीड़,नाटी इमली का भरत मिलाप में क्या है खास

Varanasi News:जानिए क्यों पांच मिनट की लीला को देखने के लिए जुटती है लाखों की भीड़,नाटी इमली का भरत मिलाप में क्या है खास

नाटी

नाटी इमली का विश्व प्रसिद्ध भरत मिलाप सम्पन्न

देश की सांस्कृतिक राजधानी काशी आज भी अपनी परम्पराओं को संजोए हुए है.विश्व प्रसिद्ध भरत मिलाप जो बीते 478 वर्षो से निरंतर चला आ रहा है. नाटी इमली के ऐतिहासिक मैदान में होने वाले इस विश्वप्रसिद्ध लीला को देखने के लिए दूर-दूर से भक्त काशी आते हैं. महज 5 मिनट की इस लीला को देखने के लिए नाटी इमली में लाखों की भीड़ इकट्ठा होती है.

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    भोले की नगरी काशी (Kashi) के ऐतिहासिक नाटी इमली के मैदान में भगवान राम का भरत से मिलाप हुआ. भगवान राम,लक्ष्मण,भरत और शत्रुघ्न ने जैसे ही लीला स्थल पर एक दूसरे को गले गलाया हर हर महादेव के जयकारों से पूरी काशी गूंज उठी. लीला स्थल पर मौजूद लाखों भक्त इस ऐतिहासिक पल के साक्षी बने.
    देश की सांस्कृतिक राजधानी काशी आज भी अपनी परम्पराओं को संजोए हुए है. वाराणसी (Varanasi) के इसी परम्पराओं में एक है नाटी इमली का विश्व प्रसिद्ध भरत मिलाप जो बीते 478 वर्षो से निरंतर चला आ रहा है. नाटी इमली के ऐतिहासिक मैदान में होने वाले इस विश्वप्रसिद्ध लीला को देखने के लिए दूर-दूर से भक्त काशी आते हैं. महज 5 मिनट की इस लीला को देखने के लिए नाटी इमली में लाखों की भीड़ जुटती है.
    इस लीला को देखने के लिए काशी राज परिवार के मुखिया कुंवर अंनत नारायण सिंह भी पूरे शाही ठाठ बाट के साथ आते हैं और लीला का दीदार करते हैं. परंपरा के तहत इस लीला में कुंवर अंनत नारायण सिंह सोने की गिन्नी भी देते हैं.

    हो जाते है प्रभु के दर्शन
    भक्तों की ऐसी आस्था है कि इस लीला स्थल पर स्वयं उन्हें प्रभु श्री राम के दर्शन होते हैं. यही वजह है कि पांच मिनट के इस लीला को देखने के लिए लाखों की भीड़ घण्टों पहले आकर लीला स्थल पर खड़ी हो जाती है.मैदान से लेकर आस पास के छतों तक सिर्फ और सिर्फ भक्त इस आस से खड़े होते है कि उन्हें भी किसी तरह इस ऐतिहासिक पल के दर्शन हो जाए.
    478 सालों से चली आ रही परम्परा
    चित्रकूट लीला समिति के सयुंक्त मंत्री  कृष्ण मोहन अग्रवाल ने बताया कि भगवान राम के अनन्य भक्त मेघाभगत ने इस लीला की शुरुआत की थी. बीते 478 सालों से ये लीला निरन्तर चली आ रही है.

    Tags: Varanasi news

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