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राम मंदिर ट्रस्ट को लेकर घमासान, शंकराचार्य स्वरूपानंद सरस्वती के शिष्य बोले- जाएंगे कोर्ट
Ayodhya News in Hindi

News18 Uttar Pradesh
Updated: February 6, 2020, 3:12 PM IST
राम मंदिर ट्रस्ट को लेकर घमासान, शंकराचार्य स्वरूपानंद सरस्वती के शिष्य बोले- जाएंगे कोर्ट
शंकराचार्य स्वरूपानंद के शिष्य प्रतिनिधि स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद

उधर बहराइच में डॉ राम विलास वेदांती ने ट्रस्ट में सम्मिलित न होने पर कहा कि मैं नाम के लिए नहीं, काम के आंदोलन में सम्मिलित हुआ था. राम का काम होना चाहिए. राम का मंदिर बनना चाहिए. मेरा नाम हो या ना हो, काम होना चाहिए. मैं नाम के पीछे नहीं पड़ता.

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वाराणसी. राम मंदिर ट्रस्ट (Ram Mandir Trust) के ऐलान के साथ ही इसके विरोध में संतों के सुर तेज होते दिख रहे हैं. अयोध्या (Ayodhya) में राम जन्म भूमि न्यास के अध्यक्ष नृत्य गोपाल दास ने मामले में ट्रस्ट को लेकर अपना विरोध स्पष्ट कर दिया है और गुरुवार को अयोध्या में संतों की आपात बैठक बुलाई है. वहीं अब शंकराचार्य स्वरूपानंद सरस्वती के शिष्य प्रतिनिधि स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने भी ट्रस्ट को लेकर विरोध जता दिया है. स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने कहा कि वो ट्रस्ट के खिलाफ कोर्ट में अपील करेंगे. उन्होंने केंद्र सरकार पर कोर्ट की अवमानना कर ट्रस्ट बनाए जाने का आरोप लगाया है. उन्होंने ट्रस्ट में शामिल संतों को लेकर आपत्ति जताई.

अयोध्या में संतों की बैठक में होगा निर्णय
बता दें कि इससे पहले ट्रस्ट के गठन के बाद राम जन्मभूमि न्यास के अध्यक्ष महंत नृत्य गोपाल दास ने आरोप लगाया कि अयोध्यावासी संत-महंतों का ट्रस्ट के माध्यम से अपमान किया गया है. उन्होंने कहा कि जिन्होंने राम मंदिर निर्माण के लिए अपना पूरा जीवन कुर्बान कर दिया, उनका इस ट्रस्ट में कहीं कोई नामो-निशान तक नहीं है. नृत्य गोपाल दास ने कहा कि जो ट्रस्ट बना है, उसमें अयोध्यावासी संत-महंतों की अवहेलना की गई है. गुरुवार को दोपहर तीन बजे संत समाज की बैठक होगी. इस बैठक में हम निर्णय लेंगे.

'राम के लिए घर छोड़ा था, पद के लिए नहीं'

उधर बहराइच में डॉक्टर राम विलास वेदांती ने ट्रस्ट में सम्मिलित न होने पर कहा कि मैं नाम के लिए नहीं, काम के आंदोलन में सम्मिलित हुआ था. राम का काम होना चाहिए. राम का मंदिर बनना चाहिए. मेरा नाम हो या ना हो, काम होना चाहिए. मैं नाम के पीछे नहीं पड़ता. उन्होंने कहा कि मैंने तो 25 बार जेल की यातना सही है. मैंने मुलायम, अखिलेश, मायावती और कांग्रेस की लाठी-गोली सही है. अपमान सहा है. मैंने कभी नहीं कहा कि मेरा नाम रखा जाए. मैंने रामलला के लिए घर छोड़ा था पद के लिए नहीं.

(इनपुट: उपेंद्र द्विवेदी)

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First published: February 6, 2020, 2:36 PM IST
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