क्‍या कोरोना संक्रमितों के ल‍िए वैक्‍सीन की एक डोज काफी? जानें क्‍या कहता है BHU के वैज्ञानिक का शोध

कोरोना वैक्‍सीन को लेकर बनारस ह‍िंदू व‍िश्‍वव‍िद्यालय का नया शोध

कोरोना वैक्‍सीन को लेकर बनारस ह‍िंदू व‍िश्‍वव‍िद्यालय का नया शोध

Uttar Pradesh News: बनारस ह‍िंदू व‍िश्‍वव‍िद्यालय के प्रोफेसर ज्ञानेश्वर चौबे ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को एक पत्र ल‍िखा है. इसमें उन्‍होंने अपने शोध का हवाला देते हुए सुझाव द‍िया है क‍ि कोरोना संक्रम‍ितों को एक डोज वैक्‍सीन ही लगनी चाह‍िए.

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कोरोना संक्रम‍ितों को लेकर उत्‍तर प्रदेश के बनारस ह‍िंदू व‍िश्‍वव‍िद्यालय (बीएचयू) के वैज्ञान‍िकों ने एक शोध क‍िया है. इस शोध के मुताबिक, कोरोना से संक्रमित हो चुके लोगों के लिए वैक्सीन का एक डोज काफी है. इस शोध को करने वाले प्रोफेसर ज्ञानेश्वर चौबे ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को एक पत्र भी ल‍िखा है. उन्‍होंने इस पत्र में प्रधानमंत्री को सुझाव द‍िया है क‍ि कोरोना संक्रम‍ितों को एक डोज वैक्‍सीन ही लगनी चाह‍िए.

नवजाब थी कोरोना पॉज‍िट‍िव और मां नेगेट‍िव

आपको बता दें क‍ि वाराणसी में कोरोना का ऐसा मामला सामने आया था जिसने डॉक्टरों और विशेषज्ञों को चौंका दिया था. यह मामला है एक नवजात बच्ची का जो जन्म लेते ही कोरोना पॉज‍िटिव पाई गई, जबकि उस को जन्म देने वाली मां नेगेटिव थी. बीएचयू के जंतु विज्ञानी की माने तो यूएस के बाद पूरी दुनिया में यह दूसरा मामला बताया गया था. हालांकि बच्ची की दोबारा जांच की बाद भी कही जा रही है उसके बाद ही कहीं जाकर तस्वीर साफ हो पाएगी. बताया जाता है चंदौली ज़िले की रहने वाली सुप्रिया प्रजापति को 24 मई को बीएचयू में भर्ती कराया गया था.ऑपरेशन से डिलीवरी हुई जिसके बाद सुप्रिया ने एक बच्ची को जन्म दिया था. जन्म के बाद जब माँ और बच्ची का कोरोना टेस्ट हुआ तो बच्ची पॉजिटिव पाई गई जबकि मां सुप्रिया की कोरोना जांच निगेटिव है.

ऐसे में इस केस में बनारस हिंदू विश्वविद्यालय के चिकित्सा अधीक्षक प्रो केके गुप्ता ने बताया कि फिलहाल मां और बच्ची दोनों स्वस्थ हैं और एडमिट है. इस केस में एक बार फिर जांच कराई जाएगी ताकि स्थिति साफ हो जाए. वही स्वास्थ्य विभाग भी मान रहा है कि अब तक का सबसे अलग मामला है. इसलिए एक बार फिर से बच्ची और माँ की कोरोना जांच की जाएगी. वही कोविड पर लगातार शोध कर रहे बनारस हिंदू विश्वविद्यालय के जंतु विज्ञानी प्रोफ़ेसर ज्ञानेश्वर चौबे बताते हैं यह भारत में पहला मामला हो सकता है, लेकिन ओपचारिक रूप से तभी कुछ शोध आगे बढ़ सकता है जब एक बार फिर से मां और बच्ची की दोबारा कोरोना जांच की जाए.

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