UP: शहीद के शव के सामने BJP विधायक से भिड़ गए पूर्व विधायक, 'औकात' तक पहुंची बात
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UP: शहीद के शव के सामने BJP विधायक से भिड़ गए पूर्व विधायक, 'औकात' तक पहुंची बात
चंदौली में शहीद के शव के सामने ही विधायक और पूर्व विधायक में विवाद हो गया.

चंदौली (Chandauli) में शहीद का शव पहुंचने के साथ ही विवाद भी शुरू हो गया. सैनिक को माकूल सम्मान न मिलने से नाराज परिजन और ग्रामीण धानापुर थाना चाौराहे पर शव और तिरंगे के साथ धरने पर बैठ गए.

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चंदौली. जम्मू-कश्मीर (Jammu and Kashmir) में राजौरी आर्मी बेस पर तैनात सूबेदार कुलदीप मौर्य का पार्थिव शरीर बीते मंगलवार की सुबह उनके गृह जनपद उत्तर प्रदेश (UP) के चन्दौली पहुंचा. शव पहुंचने के साथ ही विवाद शुरू हो गया. सैनिक को उचित सम्मान न मिलने से नाराज परिजन और ग्रामीण धानापुर थाना चाौराहे पर शव और तिरंगे के साथ धरने पर बैठ गए. यहां तक तो सब ठीक था और सैनिक के परिवार और गांव वालों की मांग भी जायज थी. जिसे सरकार ने स्वीकार भी कर लिया और राजकीय सम्मान के साथ अंत्‍येष्टि हुई. इन सब के बीच सैनिक का गांव राजनैतिक वर्चस्व का अखाड़ा बन गया.

सैयदराजा से पूर्व विधायक मनोज सिंह और वर्तमान विधायक सुशील सिंह भीड़ गए. अब इसका वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है. दरअसल मंगलवार की सुबह सूबेदार कुलदीप मौर्य का पार्थिव शरीर सेना की गाड़ी के बजाय साधारण तरीके से एक एम्बुलेंस से भेज दिया गया. जिससे परिजन और ग्रामीणों में आक्रोश व्याप्त हो गया. सपाइयों के धरने में शामिल होने के बाद परिदृश्य ही बदल गया और विवाद की स्थिति बन गई.

इस तरह बढ़ा विवाद
इस मामले समाजवादी पार्टी की बढ़त को देखते हुए मौके पर भाजपा नेताओं का जमावड़ा भी लगने लगा. सैयदराजा विधायक सुशील सिंह, महेंद्र पांडेय के करीबी सूर्यमणि तिवारी, पूर्व जिलाध्यक्ष राणा प्रताप सिंह समेत अन्य नेताओं ने मोर्चा संभाला. सेना की वाराणसी बटालियन (39 जीटीसी) ने शहीद को सम्मान देने की तैयारी शुरू की तो धरना समाप्त हुआ, लेकिन विवाद नहीं. जवान के शव यात्रा के दौरान सैयदराजा से भाजपा विधायक सुशील सिंह और इसी सीट से पूर्व विधायक व सपा के राष्ट्रीय सचिव मनोज सिंह आपस में उलझ गए. वह भी एक बार नहीं बल्कि दो दफा. दोनों नेताओं में कहासुनी में बात एक दूसरे को देख लेने और औकात तक आ पहुंची. दोनों नेताओं के समर्थक भी हो हल्ला मचाने लगे.
बीच-बचाव से संभला मामला


बहरहाल दोनों दलों के कुछ नेताओं ने बीच बचाव कर मामले को संभाला. लेकिन अब वर्चस्व की लड़ाई का वीडियो वायरल हो गया और लोगों के बीच चर्चा का विषय बना हुआ है. खास बात यह रही की दोनों नेता एक दूसरे को देख लेने की धमकी देते रहे. वहीं दूसरी तरफ पुलिस प्रशासन के लोग मूकदर्शक बने रहे. गौरतलब है कि इन दोनों नेताओं की राजनैतिक अदावत पुरानी है.

माफिया से माननीय बने नेता
इस सीट पर माफिया से माननीय बने बृजेश सिंह चुनाव मैदान में उतरे, लेकिन निर्दलीय प्रत्याशी के रूप में मनोज सिंह ने बृजेश सिंह को शिकस्त दी और चर्चा में आये. उन दोनों के बीच अदावत यहीं खत्म नहीं हुई. वर्ष 2017 के विधानसभा चुनाव में बृजेश सिंह के भतीजे सुशील सिंह ने बीजेपी के टिकट पर चुनाव लड़ा और मनोज सिंह को शिकस्त दी. यही नहीं वाराणसी एमएलसी सीट पर भी दोनों परिवार आमने सामने आ गए. जहां बृजेश सिंह के सामने सपा प्रत्यासी के रूप में मनोज सिंह डब्लू की बहन मीना सिंह चुनाव मैदान में थीं, लेकिन वे भाई की तरह इतिहास दोहराने में कामयाब नहीं हो सकी. जिसके बाद से ही सैयदराजा इन दोनों परिवारों के राजनीतिक वर्चस्व की लड़ाई का केंद्र का बन गया है.
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