वाराणसी: जमीन के नीचे मिला 4000 साल पुराना शिल्पग्राम, अब पता चलेगा कितनी पुरानी है काशी
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वाराणसी: जमीन के नीचे मिला 4000 साल पुराना शिल्पग्राम, अब पता चलेगा कितनी पुरानी है काशी
जमीन के नीचे मिला सैकड़ों वर्ष पुराना शिल्पग्राम

बीएचयू की टीम को प्रारंभिक जांच में आठवीं शताब्दी से पांचवी शताब्दी के बीच का एक मंदिर, चार साल पुराने मिट्टी के बर्तन और दो हजार साल पुरानी दीवारें मिली हैं.

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वाराणसी. काशी (Kashi), जिसके बारे में कहा जाता है कि ये इतिहास से भी पुरातन है और पुरानों से भी ज्यादा पुरानी है. शिव के त्रिशूल पर बसी है और दुनिया का सबसे पुराना शहर है. लेकिन विज्ञान आस्था को नहीं मानता. एक बार फिर विज्ञान की कसौटी पर काशी की प्राचीनता परखने की तैयारी पूरी हो गई है. इस बार काशी के कालखंडों का एक नया अध्याय खुलेगा. जी हां, वाराणसी (Varanasi) से करीब 15 किमी दूर स्थित बभनियाव गांव में बीएचयू (BHU) के प्राचीन इतिहास, संस्कृति और पुरातत्व विभाग को कुछ प्राचीन मूर्तियां और अवशेष मिले हैं. विशेषज्ञों का अनुमान है कि ये करीब 3500 से 4000 साल पुराने है. जिसे शिल्प ग्राम से जोड़ा जा रहा है.

दो हजार साल पुरानी दीवारें भी मिली

इसी अनुमान को विज्ञान की कसौटी पर कसने के लिए बुधवार से इस इलाके में पुरातात्विक सर्वेक्षण के लिए खुदाई शुरू होगी. इस इलाके से बीएचयू की टीम को प्रारंभिक जांच में आठवीं शताब्दी से पांचवी शताब्दी के बीच का एक मंदिर, चार साल पुराने मिट्टी के बर्तन और दो हजार साल पुरानी दीवारें मिली हैं. जो मिट्टी है, उस आधार पर विशेषज्ञ एक मोटे अनुमान के तौर पर कह रहे हैं कि ये संरचना करीब 3500 से 4000 साल पुरानी है और एक बस्ती होने की ओर इशारा करती है. जो कि इतिहास में दर्ज शिल्प ग्राम की तरफ इशारा करती है.



बुधवार से होगी खुदाई



बभनियाव गांव में इतनी प्राचीन संरचना मिलने का एक खास जुड़ाव ये भी है कि ये इलाका पुरानी काशी से करीब 15 से 20 किमी दूर है. ऐसे में ये प्राचीन काशी के केंद्र का एक उपकेंद्र हो सकता है. अब प्रमाणिक तौर पर इसकी पुष्टि के लिए बुधवार से टीम यहां खुदाई करेगी. माना जा रहा है कि अविनाशी काशी के कालखंडों पर ये सर्वे नई रोशनी डालेगा. बता दें कि इससे पहले भी काशी के पौराणिकता से जुड़े कई साक्ष्य मिल चुके हैं. इसमे कुछ समय पहले राजघाट की खुदाई में मृदभांडों और पुरातात्विक अवशेष मिले थे. जिसके बाद माना गया था कि काशी का इतिहास उत्तर वैदिक काल में 1700 से 1500 ईसापूर्व रहा होगा. यही नही, रामनगर और अकथा में मृदभांडों की कार्बन डेटिंग में 1750 ईसा पूर्व होने की बात सामने आई थी. ऐसे में आज से होनी वाली इस खुदाई पर काशी ही नहीं, देशभर के इतिहासकारों की नजरें लगी हुई हैं.

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