वाराणसी: अभी भी Unlock नहीं हो पाए काशी के कोतवाल काल भैरव, ये है समस्या
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वाराणसी: अभी भी Unlock नहीं हो पाए काशी के कोतवाल काल भैरव, ये है समस्या
अभी तक नहीं खुल सका काल भैरव मंदिर

काल भैरव मंदिर को न खोलने के पीछे की वजह यहां की संकरी गलियां और आगे तक दुकानों का होना.

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वाराणसी. सरकार द्वारा तय गाइडलाइन के मुताबिक वाराणसी (Varanasi) में शापिंग मॉल के साथ ही धार्मिक स्थलों को भी खोल दिया गया है. सोमवार को काशी पुराधिपति बाबा विश्वनाथ (Baba Vishwanath) ने भी भक्तों को दर्शन देना शुरू कर दिया. इसके अलावा करीब एक दर्जन मंदिरों में भक्तों के जयकारे गूंजने लगे हैं, लेकिन काशी की न्याय व्यवस्था को संभालने की आस्था से जुड़ा काशी के कोतवाल काल भैरव (Kaal Bhairav Temple) के कपाट भक्तों के लिए नहीं खुल पाए हैं. काल भैरव मंदिर में अभी भी सन्नाटा है. भक्तों को अभी और इंतजार करना पड़ेगा.

काल भैरव मंदिर को न खोलने के पीछे की वजह यहां की संकरी गलियां और आगे तक दुकानों का होना. सरकार द्वारा तय गाइडलाइन का पालन कराना यहां प्रशासन और मंदिर कमेटी के लिए मुश्किल दिख रहा है. ऐसे मे मंगलवार को भी भक्तों के लिए मंदिर के कपाट बंद रहे. मंदिर के अंदर महंत परिवार के सदस्यों ने मंदिर खोलने के लिए मानकों का पालन कराने के विषय पर चर्चा की. हर दिन की तरह यहां सिर्फ महंत परिवार की ओर से नित्य आरती और पूजन किया गया.

ये है वजह



दरअसल, जिस जगह मंदिर स्थित है, वो पूरा इलाका तंग गलियों का है. मंदिर वाली गली में अगर एक दर्जन भक्त भी प्रवेश करेंगे तो भीड़ जैसा माहौल हो जाएगा. गली में भी आगे तक पूजन सामग्री और फूल की दुकानें हैं. ऐसे में सोशल डिस्टेसिंग समेत अन्य मानक का पालन कराना किसी चुनौती से कम नहीं है. इसलिए जिला प्रशासन और मंदिर प्रशासन लगातार बैठक कर ऐसी कार्ययोजना बनाने की कोशिश कर रहे हैं, जिससे मंदिर भी खुल सके और गाइडलाइन का पालन भी हो सके. फिलहाल मंदिर के कपाट बंद होने से भक्त निराश हैं. काशी के कोतवाल काल भैरव को न्याय का देवता माना जाता है. इसलिए यहां बड़ी संख्या में लोग अपनी अर्जी लेकर पहुंचते हैं. खुद देश के प्रधानमंत्री और काशी के सांसद नरेंद्र मोदी भी यहां कई बार मत्था टेक चुके हैं.
काल भैरव मंदिर की बड़ी मान्यता है

काशी की मान्यता है कि जब भी कोई नया काम किया जाता है, उसकी इजाजत काशी के कोतवाल से लेनी पड़ती है. पीएम मोदी ने भी नामांकन से पहले बाबा का आशीर्वाद लिया था. इसके लिए डीएम से लेकर कमिश्नर तक, एसएसपी से लेकर आईजी, एडीजी तक, जो भी बड़े और छोटे अफसर यहां हाजिरी लगाने के बाद ही अपना चार्ज संभालते हैं. खुद शहर की कोतवाली में कोतवाल की कुर्सी पर इंस्पेक्टर नहीं बैठते बल्कि काल भैरव की तस्वीर ही रखी रहती है. फिलहाल इंतजार कब तक करना होगा, इसका सही अनुमान किसी को नहीं, लेकिन एक बात तो तय है कि काशी के कोतवाल की चौखट पर हाजिरी लगाने वाले निराश होकर लौट रहे हैं.

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