वाराणसी: सदियों पुरानी गुरुकुल परंपरा हुई ऑनलाइन, मोबाइल पर शुरू हुई वेदों की शिक्षा
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वाराणसी: सदियों पुरानी गुरुकुल परंपरा हुई ऑनलाइन, मोबाइल पर शुरू हुई वेदों की शिक्षा
वाराणसी में मोबाइल एप से दी जा रही वेदों की शिक्षा

इस लॉकडाउन में एक बार फिर से इस शिक्षा पर ग्रहण मंडराया लेकिन वेदों के विद्वानों ने इसे बचाने के लिए ऑनलाइन शिक्षा की शुरुआत की है. मोबाइल में ऐप से इस शिक्षा को पढ़ाने की जिम्मेदारी ली काशी हिन्दू विश्वविद्यालय के संस्कृत विभाग के प्रोफ़ेसर श्री राम नारायण द्विवेदी ने.

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वाराणसी. सदियों पुरानी गुरुकुल परम्परा (Gurukul Education) इन दिनों आधुनिकता के पहियों के सहारे आगे बढ़ रहा है. लॉकडाउन (Lockdown) के चलते देश में व्यापार से लेकर शिक्षा तक प्रभावित हुए हैं, जिसमें सबसे ज्यादा नुकसान विद्यार्थियों का हो रहा है. हालांकि आधुनिकता के चादर ने इस प्रभाव को कम जरूर किया है जिससे घर बैठे विद्यार्थी अपने पठन-पाठन के कार्य को आगे बड़ा रहे हैं. हम बात कर रहे हैं ऑनलाइन शिक्षा (Online Education) की जो इन दिनों अंग्रेजी माध्यम स्कूलों के छात्रों का सहारा बना हुआ है. ऐसे में लॉकडाउन से  प्रभावित हो चुकी गुरुकुल परम्परा ने भी ऑनलाइन शिक्षा की ओर रुख किया है. मोबाइल व लैपटॉप के माध्यम से गुरुकुल में पढ़ने वाले छात्र वेदों और संस्कृत भाषा का ज्ञान धर्म नगरी काशी से विद्वानों के जरिये प्राप्त कर रहे हैं.

BHU के प्रोफ़ेसर ने की पहल

काशी की गुरुकुल परम्परा सदियों पुरानी मानी जाती है. देश में कई बड़े विद्वान इसी गुरुकुल परम्परा से निकले है. वक्त की आपधापी और आधुनिकता के चादर ने इस परम्परा को धूमिल किया, लेकिन काशी आज भी इसे संभाले और संजोय हुए है. इस लॉकडाउन में एक बार फिर से इस शिक्षा पर ग्रहण मंडराया लेकिन वेदों के विद्वानों ने इसे बचाने के लिए ऑनलाइन शिक्षा की शुरुआत की है. मोबाइल में ऐप से इस शिक्षा को पढ़ाने की जिम्मेदारी ली काशी हिन्दू विश्वविद्यालय के संस्कृत विभाग के प्रोफ़ेसर श्री राम नारायण द्विवेदी ने जो लॉकडाउन के कारण अपने घर जा चुके विद्यार्थियों या वाराणसी में ही मठों में फंसे हुए छात्रों को वेदों की शिक्षा दे रहे हैं.



वीडियो एप के जरिए दी जा रही वेदों की शिक्षा



प्रो. राम नारायण द्विवेदी का कहना है कि वेदों की शिक्षा काशी हिन्दू विश्वविद्यालय में लगातार जारी है. लेकिन इस लॉकडाउन के कारण पढ़ाई पूरी तरह से ठप हो गई थी. ऐसे में हमने घर बैठे ही ऑनलाइन शिक्षा का सहारा लिया. उनका कहना है कि भले ही हमें इस आधुनिक ब्लैक बोर्ड का ज्ञान न था, लेकिन आवश्यकता ही अविष्कार की जननी होती है, इसलिए हमने इस मोबाइल एप के वीडियों एप की जानकारी ली और देश विदेश में रहने वाले छात्रों को  इससे जोड़ा. जो आज इस एप के माध्यम से प्रत्येक दिन क्लास लेते हैं.

छात्रों को भी हुई सहूलियत

देश विदेश में रहने वाले छात्रों को जहां इस ऑनलाइन शिक्षा से मदद मिली तो वहीं काशी में ही रहने वाले विद्यार्थियों के चेहरे पर भी इस शुरुआत से मुस्कान आई. वेदों और संस्कृत भाषा का शिक्षा लेने वाले कई छात्र आज अपने घरों से या मठों में रहकर इस ऑनलाइन शिक्षा से जुड़े हैं. जिससे उन्हें इस लॉकडाउन में भी अपनी पढ़ाई पूरी करने का अवसर मिला. इसी के साथ ही उन्हें इस समय का सदुपयोग करने का भी उपाय मिला जिसमें वो अपनी शिक्षा और मजबूत कर रहे हैं.

वेदों के शिक्षा की इस आवश्यकता ने दो युगों का मिलन कराया जिसमें पुरातन विधि के साथ ही अब आधुनिकता का भी चादर चढ़ा. बेशक इस मिलन ने जहां वेद के छात्रों को सहारा दिया तो वहीं गुरुकुल के विद्वानों को भी आज के समय के अनुसार ऑनलाइन शिक्षा की अहमियत को समझाया.
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