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Varanasi News: गंगा पर भी दिख रहा जलवायु परिवर्तन का असर, मार्च में ही घाटों से दूर हुआ पानी

वाराणसी में घाटों से दूर हुई  मैया

वाराणसी में घाटों से दूर हुई मैया

Varanasi News: मौसम में ये अप्रत्याशित बदलाव केवल इंसानों में ही नहीं बल्कि नदी और सरोवरों पर भी दिखना शुरू हो गया है. आलम ये है कि काशी के घाटों से गंगा दूर होती जा रही हैं.

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वाराणसी. जलवायु परिवर्तन का असर इंसानों पर ही नहीं बल्कि मोक्षदायिनी मां गंगा (River Ganga) पर भी दिखाई दे रहा है. धर्मनगरी वाराणसी (Varanasi) में मार्च के पहले हफ्ते में ही गंगा ने घाटों को काफी पीछे छोड़ दिया है. जबकि ये तस्वीर आमतौर पर मई-जून में दिखाई देती है. अभी फरवरी बीती है और मार्च की शुरुआत हुई है. लेकिन घरों में पंखे और होटलों में एसी चलना शुरू हो गए हैं. मौसम में ये अप्रत्याशित बदलाव केवल इंसानों में ही नहीं बल्कि नदी और सरोवरों पर भी दिखना शुरू हो गया है. आलम ये है कि काशी के घाटों से गंगा दूर होती जा रही हैं.

गंगा के पानी का घाट की सीढ़ियों से दूर जाने की ये तस्वीर सबसे ज्यादा विश्व प्रसिद्ध अस्सी घाट पर देखने को मिलती है. घाट और गंगा के बीच तस्वीर में आपको साफ तौर पर एक बड़ा मैदान दिखाई दे रहा होगा. बताया जा रहा है कि यहां अभी से गंगा सीढ़ियों से तकरीबन 60 फीट दूर बह रही हैं. बचपन से घाट किनारे पले बढ़े नौजवान साजन और फिरोज भी हैरान हैं. साजन का कहना है कि वो बचपन से ही मां गंगा की गोद में तैरते आए हैं. लेकिन पहली बार ये देखने को मिल रहा है कि गंगा मइया घाट छोड़कर इतनी दूर चली गई हैं. वहीं फिरोज का कहना है कि अभी से जब ये हालात हैं तो प्रचंड गर्मियों में क्या होगा.

गंगा वैज्ञानिक ने कही ये बात 
वहीं गंगा वैज्ञानिक प्रोफेसर बीडी त्रिपाठी इसे मौसम के मिजाज का बदलना बताते हैं. वो कहते हैं कि ये खुशी की बात है कि गंगा अब पहले से ज्यादा निर्मल और साफ हुई हैं. घुलनशील आक्सीजन का स्तर भी बढ़ गया है. यानी आचमन योग्य गंगा हो रही हैं लेकिन बावजूद इसके जलवायु परिवर्तन चिंताजनक हैं. जब बारिश चाहिए तो होती नहीं. जब पानी नहीं चाहिए तो बेमौसम बारिश हो जा रही है. फिलहाल अलग अलग घाटों में गंगा की ये स्थिति अलग-अलग हैं. कहीं दस फीट तो कहीं बीस, तीस और चालीस फीट तक गंगा ने घाट के किनारे को छोड़ दिया है.
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