वाराणसी में सजी अनोखी महफिल, एक तरफ धधकती चिताएं, दूसरी ओर गूंजी नगर वधुओं के घुंघरुओं की झंकार

वाराणसी में धधकती चिताओं के बीच नगर वधुओं ने महाश्मशान नाथ को रिझाया

वाराणसी में धधकती चिताओं के बीच नगर वधुओं ने महाश्मशान नाथ को रिझाया

Varanasi News: बाबा महाश्मशान नाथ के वार्षिक शृंगार महोत्सव की अंतिम निशा में सोमवार को संध्या पूजन के बाद राग-विराग का मेला घुंघरू की झंकार से शुरू हुआ, जो देर रात तक आबाद रहा.

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वाराणसी. कोरोना संक्रमण के बीच धर्मनगरी वाराणसी में एक अनोखी महफिल सजी. काशी में चैत्र नवरात्र पर सप्तमी के दिन महाश्मशान घाट पर सजने वाली इस महफ़िल में एक तरफ जलती चिताओं की लपटें आसमान छू रही थीं, तो दूसरी ओर घुंघरुओं की झंकार बंदिशों की दीवार तोड़ रही थी. बाबा महाश्मशान नाथ के वार्षिक शृंगार महोत्सव की अंतिम निशा में सोमवार को संध्या पूजन के बाद राग-विराग का मेला घुंघरू की झंकार से शुरू हुआ, जो देर रात तक आबाद रहा. सुध-बुध खो कर नृत्यांजलि प्रस्तुत करती नगर वधुओं से महाश्मशान पूरी रात जीवंत रहा.

कोरोना महामारी के मद्देनजर सांकेतिक रूप में इसका आयोजन हुआ. मंदिर प्रबंधन की मौजूदगी में परम्परा का निर्वहन हुआ. मंदिर परिसर में ही नगर वधुओं ने हाजिरी लगाई. इस दौरान सामान्य भक्तों के आवागमन पर रोक रही. मान्यता है कि कभी न ठंडे होने वाले मणिकर्णिका घाट पर बाबा महाश्मशान को साक्षी मानकर ये नगर बधुएं अपना जन्म सफल करने के लिए नृत्य करती हैं.

वर्षों पुरानी है परंपरा

मणिकर्णिका घाट पर महाश्मशान नाथ के शृंगार उत्सव में 354 साल की परंपरा के अनुसार गणिकाओं ने सोमवार को नृत्य-संगीत का नज़ारा पेश किया. तीन दिन चलने वाले महाश्मशान महोत्सव की आखिरी निशा को शाम करीब आठ बजे से ही मणिकर्णिका महाश्मशान में एक तरफ जहां चिताएं धधक रही थीं तो दूसरी ओर महाश्मशान नाथ के समक्ष नगर वधुएं नृत्य कर रही थीं. प्रांगण में नर्तकियों के घुंघरुओं की गूंज से धधकती चिताओं के बीच शोक और प्रसन्नता का समन्वय देखते ही बन रहा था.
इस अद्भुत परम्परा ने संगीत रसिकों, श्रद्धालुओं के साथ ही विदेशी जिज्ञासुओ को दांतों तले उंगली दबाने पर विवश कर दिया. बाबा श्मशान नाथ के त्रिदिवसीय शृंगार के अंतिम दिन पंचमकार का भोग लगाकर तांत्रोकत विधान से भव्य आरती मंदिर के पुजारी लल्लू महाराज ने की . बेला, गुलाब, गेंदा के पुष्पो से भव्य शृंगार किया गया. भांग एवं खोए की बर्फी सहित ठंडई का भोग लगाया गया. फिर महाआरती की गई. आरती बाद प्रसाद भक्तों में वितरित किया गया.
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