काशी में मिला भारत का सबसे पुराना शिव मंदिर, खुलेगा बौद्ध और जैन धर्म का राज!
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काशी में मिला भारत का सबसे पुराना शिव मंदिर, खुलेगा बौद्ध और जैन धर्म का राज!
काशी में मिला सबसे पुरातन शिव मंदिर

पुरातत्व विभाग की टीम इसे तीसरी शताब्दी से जोड़कर देख रही है. शिव मंदिर में जल निकासी की व्यवस्था पूरी तरह से वास्तु आधारित है. ट्रेंच की लंबाई-चौड़ाई बढ़ाकर प्राचीन और प्रारंभिक शिव मंदिर के पूर्ण स्वरूप को जानने का प्रयास किया गया.

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वाराणसी. बीएचयू (BHU) की पुरातत्व विभाग (Archaeology department) की टीम को खुदाई में बड़ी सफलता हासिल हुई है. खुदाई में काशी के सबसे प्राचीन शिवलिंग और शिव मंदिर (Shiva Temple) के संकेत मिले हैं. वाराणसी के पंचकोशी मार्ग पर बसे बभनियाव गांव में लॉकडाउन से पहले बीएचयू की पुरातत्व विभाग की टीम ने खुदाई शुरू की थी. लॉकडाउन से पहले जिस जगह से जटाधारी शिवलिंग मिला था. लॉकडाउन के बाद हुई खुदाई में अब वहां से एक प्राचीन शिव मंदिर उभर कर सामने आया है. पुरातत्व विभाग की टीम इसे तीसरी शताब्दी से जोड़कर देख रही है. शिव मंदिर में जल निकासी की व्यवस्था पूरी तरह से वास्तु आधारित है. ट्रेंच की लंबाई-चौड़ाई बढ़ाकर प्राचीन और प्रारंभिक शिव मंदिर के पूर्ण स्वरूप को जानने का प्रयास किया गया. जिसके बाद उत्खनन में अधिष्ठान का प्रमाण मिला, जो कि प्रारंभिक दौर के मंदिरों की विशेषता बयां करता है.

मालूम पड़ता है कि यहां एक ऊंचे अधिष्ठान पर गर्भ गृह का निर्माण कराकर शिवलिंग स्थापित किया गया होगा. ऐसा बीएचयू के प्राचीन भारतीय इतिहास संस्कृति और पुरातत्व विभाग की टीम को संकेत मिल रहे हैं. अब तक काशी में नगवा के कर्मदेशवर महादेव मंदिर को सबसे प्राचीन शिव मंदिर बताया जाता है, जो कि 10 वीं शताब्दी का माना जाता है. जबकि बभनियाव गांव में जो शिव मंदिर सामने आया है उसका इतिहास तीसरी शताब्दी की ओर इशारा कर रहा है. मंदिर के ऊपर का आधा निर्माण हटाया गया तो इससे लगा हुआ एक प्रदक्षिणा पथ भी सामने आया है. ऊंचे और वर्गाकार अधिष्ठान पर वृत्ताकार गर्भ ग्रह का निर्माण कर उसके अंदर वर्गाकार आधारित एक मुखी शिवलिंग की स्थापना की गई. शिवलिंग का पत्थर भी चुनार के बलवा मिट्टी का बना हुआ है. इसमें जटाधारी शिवलिंग का आकार मिला है.

बीएचयू के प्रोफेसर और इस प्रोजेक्ट के डायरेक्टर प्रोफेसर अशोक सिंह के मुताबिक उपलब्ध प्रमाणों से मालूम होता है इस मंदिर का पूर्वाविमुख प्रवेश द्वार मध्यम आकार का है यानी उपासक को मंदिर में प्रवेश करते समय निश्चित ही झुक कर जाना होता होगा. यानी भगवान के सामने हर इंसान बराबर है. चाहे वो राजा हो या रंक. एक अनुमान यह भी लगाया जा रहा है सीढ़ियां चढ़कर श्रद्धालुओं को ऊपर जाना होता होगा. बता दे इस मंदिर के सामने ही एक और शिव मंदिर और शिवलिंग पहले मिला था. मंदिर और शिवलिंग कुएं की खुदाई करते वक्त मिला था जिसके बाद गांव के लोगों ने यहां पर शिव मंदिर बना दिया जो गहरी सीढ़ियां उतर जाना पड़ता है.



प्रोफ़ेसर अशोक सिंह की माने तो फिलहाल इस प्रोजेक्ट पर और काम होना बाकी है. इस प्रोजेक्ट के पूरा होने के बाद इतिहास के कई पन्ने हमारे सामने खुल जाएंगे तो कई रहस्यों से भी पर्दा उठ जाएगा पहला यह कि क्या यह शिव मंदिर यूपी या अब भारत में भी सबसे पुराना है. दूसरा विदेशी शासक कनिष्क के शासन से भी जुड़ा रहस्य खुलेगा, क्योंकि अब तक कुषाण शासक कनिष्क जो बौद्ध और जैन धर्म से ही अत्यंत प्रभावित थे, तो क्या उन्होंने बाद में शैव धर्म को भी अंगीकार कर लिया था. दूसरी अहम बात ये कि क्या ये मंदिर काशी ही नहीं यूपी और देश का भी सबसे प्राचीन शिव मंदिर है. फ़िलहाल गांव वाले बहुत उत्साहित है और उन्होंने यहां पूजा भी शुरू कर दी है.
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