वाराणसी: Corona के खात्मे के लिए लोग इस मंदिर में एप्लीकेशन डालकर भगवान से कर रहे फरियाद
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वाराणसी: Corona के खात्मे के लिए लोग इस मंदिर में एप्लीकेशन डालकर भगवान से कर रहे फरियाद
श्रद्धालुओं की सुरक्षा को ध्‍यान में रखते हुए सरकार द्वारा बनाएं गए नियमों के तहत ही मंदिर में दर्शन और पूजन संभव हो सकेगा.

वाराणसी (Varanasi) के मैदागिन इलाके के सकरी गली में स्थित बाबा काल भैरव का मंदिर विश्व विख्यात है. इन्हें काशी का कोतवाल भी कहा जाता है.

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वाराणसी. जब इंसान हर दरवाजे से निराश हो जाता है तो उसे सहारा मिलता है उस दरवाजे का जो हर इंसान के लिए खुला होता है. वो दरवाजा होता है भगवान का. जहां दुखी इंसान इस उम्मीद से आता है कि जिस अर्जी को किसी ने नहीं सुना या पढ़ा उसे भगवान जरूर समझेंगे और पूरा भी करेंगे. लेकिन कोविड 19 (COVID-19) के इस महामारी ने इस दरवाजे को भी बंद कर दिया है. बावजूद इसके भक्तों की श्रद्धा और भक्ति उनके प्रति कम नहीं दिखी रही है. कुछ ऐसा ही नजारा दिखा धर्म नगरी काशी (Kashi) में जहां काशी के कोतवाल काल भैरव के मंदिर (Kotwal Kal Bhairav Temple) के बन्द कपाट पर सैकड़ों अर्जियां हर हर रोज मिल रही हैं. लोगों में आस्था है कि मंदिर के कपाट भले ही बन्द हो लेकिन भक्तों के पीड़ा का पत्र भगवान जरूर पढ़ेंगे.

वाराणसी के मैदागिन इलाके के सकरी गली में स्थित बाबा काल भैरव का मंदिर विश्व विख्यात है. इन्हें काशी का कोतवाल भी कहा जाता है. लेकिन पिछले दो महीने से इस मंदिर के बाहर ताला लटका हुआ है. भक्त बाहर से ही अपनी हाजिरी लगा के जा रहे हैं. मन्दिर के महंत सुमित महाराज का कहना है कि बाबा काल भैरव के मंदिर में अगर अपना एप्लिकेशन यानी अर्जी दी जाए तो काल भैरव उस अर्जी को पढ़ कर पीड़ित भक्तों का कष्ट दूर करते हैं. लॉकडाउन के कारण मन्दिर भले ही बन्द है लेकिन भक्त हर रोज अपनी अर्जियां लेकर इस बन्द कपाट के द्वार पर ही रख जाते हैं.

मंदिर के मुख्य द्वार पर हर रोज पत्र मिल रहे हैं
जो पत्र काल भैरव के कपाट यानी मंदिर के मुख्य द्वार पर हर रोज मिल रहे हैं उनमें अलग-अलग तरीके की अर्जियां शामिल हैं. किसी ने अपनी शादी का न्योता दिया है तो कोई अपनी पीड़ा लिख के डाला है. लेकिन सबसे ज्यादा पत्र मिले हैं इस कोविड 19 को खत्म करने के लिए. स्थानीय नागरिक राजेन्द्र द्विवेदी और श्याम ने बताया कि पत्र के माध्यम से हम अपना कष्ट बाबा तक पहुंचाते हैं. इन दिनों हम पत्र के माध्यम से इस महामारी को दूर करने के लिए अर्जियां दे रहे हैं, जिसमें लिखा है कि इस महामारी को जल्द से जल्द खत्म करने की कृपा करें. भक्त हर रोज इस मंदिर के बाहर आते हैं तो कुछ माथा टेक के चले जाते हैं. लेकिन कुछ हर रोज अपनी अर्जी लेकर आते हैं और बाबा के द्वार पर उसे रख के चले जाते हैं.
धर्म नगरी में काशी के कोतवाल के बाबा काल भैरव के प्रति ये लोगो की आस्था ही है जो इस महामारी में भी कम नहीं हुई और मंदिर बन्द होने के बावजूद बाबा के भक्तों ने अपनी अर्जियां देना चालू रखा है, इस उम्मीद में कि इस महामारी से काशी समेत दुनिया को बाबा जरूर जीत दिलाएंगे.



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