पूर्व IPS अमिताभ ठाकुर का दावा निकला झूठा, वाराणसी SP की कार्यशैली पर खड़ा किया था सवाल!

पूर्व IPS अमिताभ ठाकुर का दावा निकला झूठा (File photo)

पूर्व IPS अमिताभ ठाकुर का दावा निकला झूठा (File photo)

वाराणसी (Varanasi) के पुलिस कमिश्नर (CP) ए सतीश गणेश ने बताया कि हम ई- मेल पर आए सभी प्रार्थना पत्र को देखते हैं ताकि जनता का विश्वास बना रहे.

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वाराणसी. उत्तर प्रदेश के वाराणसी (Varanasi) जिले कोराना संक्रमण (Corona Infection) का कहर जारी है. उधर पिछले दिनों अनिवार्य सेवानिवृत्ति (Compulsory Retirement) दिए जाने के बाद पूर्व आईपीएस अफसर अमिताभ ठाकुर (Amitabh Thakur) लगातार चर्चा में बने हुए हैं. सोशल मीडिया पर अमिताभ ठाकुर का एक पोस्ट पूरी तरह से निराधार साबित हुआ. अमिताभ ठाकुर ने ट्विटर अकाउंट से दावा किया है कि बनारस के एसपी द्वारा कोरोना का दवाई बताई गई है जिसमें उन्होंने कहा है कि छिलका सहित कच्चा आम बहुत लाभप्रद है. इस दावे की सच्चाई कुछ और निकली जो अमिताभ ठाकुर जैसे ईमानदार आईपीएस के विश्वनीयता पर सवाल खड़े कर देते हैं.

दरअसल अमिताभ ठाकुर ने अपने ट्विटर अकाउंट पर यह लिखा कि बनारस के एसपी का दावा है कि कोरोना के इलाज में छिलका सहित कच्चा आम बहुत लाभप्रद. इसके बाद उन्होंने लिखा ईश्वर जाने कितना सही कितना गलत, यह अवश्य है कि कोरोना ने हम सभी को डॉक्टर बना दिया है. इस पोस्ट के साथ ही उन्होंने वाराणसी पुलिस द्वारा एक प्रार्थना पत्र को भी चस्पा किया था. न्यूज 18 ने जब इस पोस्ट को देखा तो इसकी सच्चाई जानने के लिए हमने वाराणसी के पुलिस कमिश्नर ए सतीश गणेश से मुलाकात की और अमिताभ ठाकुर के इस दावे पर उनसे सवाल किया.


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पुलिसिया जांच में खुली पोल

लेकिन जो बातें सामने आई वह अमिताभ ठाकुर जैसे लोगों के लिए एक सवाल खड़ा करती है. बता दें कि अमिताभ ठाकुर ने जो प्रार्थना पत्र पोस्ट किया है वह वाराणसी पुलिस के ई-मेल अकाउंट पर vinkey india नाम से 4 मई को एक मेल. जिसमें प्रार्थना पत्र देने वाले ने वाराणसी पुलिस अधिकारियों के लिए यह संदेश दिया है कि कोरोना काल में छिलका सहित कच्चा आम बहुत लाभप्रद है. ई-मेल पर प्राप्त हर प्रार्थना पत्रों की तरह इस पत्र को भी पुलिस टीम द्वारा प्रिंट निकाला गया और एसपी को इसे भेजा गया ताकि प्रार्थना पर को गम्भीरता कायम रहे.

Fake साबित हुआ पूर्व आईपीएस का दावा



वाराणसी के पुलिस कमिश्नर ए सतीश गणेश ने बताया कि हम ई- मेल पर आए सभी प्रार्थना पत्र को देखते हैं ताकि जनता का विश्वास बना रहे. बिना पढ़े हमे कैसे मालूम पड़ेगा कि पीड़ित व्यक्ति या प्रार्थना देने वाले ने क्या लिखा है. वो अपनी परेशानी बता रहा है या हमें संदेश दे रहा है. उन्होंने बताया कि इस प्रार्थना पत्र को भी हमने पढ़ा, लेकिन अब तो ये भेजने वाले कि समझ की बात है कि वो हमें क्या भेजता है. लेकिन पुलिस टीम या एसपी बनारस द्वारा ऐसा कोई भी दावा नहीं किया गया है. ऐसे में अमिताभ ठाकुर द्वारा किया गया पोस्ट पूरी तरह से फेक साबित हुआ हैं.

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