वाराणसी की छात्रा का कमाल, अब महिलाओं को घरेलू हिंसा से बचाएगा COVID-19
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वाराणसी की छात्रा का कमाल, अब महिलाओं को घरेलू हिंसा से बचाएगा COVID-19
घरेलू हिंसा में महिलाओं के लिए होगा ये डिवाइस.

वाराणसी की इंजीनियर छात्रा अंजली श्रीवास्तव (Anjali Shrivastava) ने लॉकडाउन के दौरान एक ऐसी डिवाइस बनायी है जो घरेलू हिंसा (Domestic Violence) पर काफी हद तक रोक लगा सकती है.

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वाराणसी. कहते हैं हुनर उपयुक्त समय और संसाधनों का मोहताज नहीं होता है. इस उदाहरण को चरितार्थ किया है पीएम मोदी (PM Modi) के संसदीय क्षेत्र वाराणसी की एक इंजीनियर छात्रा अंजली श्रीवास्तव (Anjali Shrivastava) ने. उसने लॉकडाउन के दौरान एक ऐसा आविष्कार किया है जो घरेलू हिंसा (Domestic Violence) पर काफी हद तक रोक लगा सकता है और पीड़ित महिलाओं को इंसाफ दिलाने में काफी सहायक भी बन सकता है. खास बात यह है कि महिलाओं की मदद करने वाले इस यंत्र को छात्रा ने कोविड-19 का ही नाम दिया है.

ऐसे मिलेगी महिलाओं को मदद
कोरोना वायरस के कारण देश में लॉकडाउन चल रहा है. इस स्थिति में देश के सभी लोग अपने घर में ही परिवार के साथ समय बिता रहे हैं. हालांकि इस दौरान घरेलू हिंसा के मामले बढ़ने की खबरें भी आयी हैं. जबकि इन खबरों को ध्यान में रखते हुए बनारस की छात्रा ने महिलाओं के लिए एक सेफ्टी डिवाइस का आविष्कार किया, जो घरेलू हिंसा या किसी मकान में फंसी लड़की हो या हॉस्टल में रहने वाली लड़की हो उसके द्वारा सिर्फ एक बटन दबाने से उसके पास पुलिस या फिर महिला सहायक पुलिस पहुंच जाएगी. यह डिवाइस उस महिला की लोकेशन ट्रेस करते हुए 112 और 1090 पर ऑटोमेटिक कॉल कर देगी. वह भी इस डिवाइस का सिर्फ एक बटन दबाते ही.

छात्रा अंजली श्रीवास्तव ने कही ये बात
इस डिवाइस को बनाने वाली इंजीनियरिंग की पूर्व छात्रा अंजली श्रीवास्तव हैं, जो वर्तमान में दिल्ली की एक ट्रैवल एजेंसी में काम करती हैं. लेकिन लॉकडाउन के दरमियान वह अपने घर वाराणसी में 2 महीने से रह रही हैं. अंजली ने इन 2 महीनों में शुरुआती दौर में घरेलू हिंसा की कई खबर सुनी और इसके बाद उसने इस डिवाइस को बनाने का निर्णय किया. जबकि पूरे 1 महीने की मेहनत में घर में रखे हुए कबाड़ से यह डिवाइस बना डाली है.



अंजली बताती हैं कि इस डिवाइस को बनाने में उनके मात्र ढाई हजार रुपए खर्च हुए. इस डिवाइस में रेडियो फ्रीक्वेंसी के जरिए जीपीएस टेक्नोलॉजी को जोड़कर तैयार किया गया है. इसके अलावा इस डिवाइस में 1 से 5 इमरजेंसी पैनिक बटन जोड़े जा सकते हैं. इस वायरलेस पैनिक बटन को महिलाएं अपनी जरूरत के मुताबिक घर के अंदर छुपा कर कहीं भी रख सकती हैं. इसकी रेंज 200 मीटर के लगभग है. इसमें लगी बैटरी इसे 7 से 8 महीने तक चालू रख सकती है और वायरलेस बटन काफी छोटा है, इसलिए इसे कहीं भी छुपा कर रखा जा सकता है. जरूरत पड़ने पर बस एक बटन दबाकर पुलिस की मदद ली जा सकती है. इसके साथ ही घर के पते के साथ परिवार के सदस्यों का नाम ऑडियो रिकॉर्डिंग से कनेक्ट हो जाता है जिससे पुलिस को कार्रवाई करने में उचित सबूत मिल सकता है.

बहरहाल, अंजली की मां रेणुका बताती हैं कि महिलाओं के लिए उनकी बेटी द्वारा बनाई गयी इस डिवाइस से काफी मदद मिलेगी, क्योंकि महिलाएं घरेलू हिंसा के खिलाफ आवाज नहीं उठा पाती हैं और वह अपने आप को अकेले समझती हैं ऐसे में यह अविष्कार उन महिलाओं के लिए सहायक बन सकता है जो घर के बाहर निकलने में डरती हैं.

बहरहाल, इसमें कोई दो राय नहीं कि घर में रहने वाली या फिर घरेलू हिंसा की शिकार महिलाएं अपने आप को अकेला पड़ने के कारण इसके खिलाफ आवाज नहीं उठा पाती हैं, लेकिन अंजली द्वारा बनाई गयी ये डिवाइस उनके लिए मददगार साबित हो सकती है, जिसका नाम कोविड 19 है.

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