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वाराणसी में इस यूनिवर्सिटी ने CAA पर शुरू किया कोर्स, मिलेगा डिप्लोमा सर्टिफिकेट

News18 Uttar Pradesh
Updated: January 18, 2020, 12:35 PM IST
वाराणसी में इस यूनिवर्सिटी ने CAA पर शुरू किया कोर्स, मिलेगा डिप्लोमा सर्टिफिकेट
उत्तर प्रदेश राजर्षि टंडन ओपन यूनिवर्सिटी ने सीएए पर एक नया कोर्स शुरू किया है.

यूनिवर्सिटी के समन्वयक प्रोफेसर सीके सिंह बताते हैं कि इसमें 3 महीने का कोर्स होगा. इसके बाद इसका बाकायदा सर्टिफिकेट भी दिया जाएगा. उन्होंने बताया कि इस पाठ्यक्रम के कोर्स जनवरी से ही शुरू हो गए हैं और इसके ऑनलाइन फॉर्म भी मिलने लगे हैं.

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वाराणसी. नागरिकता संशोधन कानून (CAA) को लेकर जहां देश की राजधानी दिल्ली (Delhi) में जामिया (Jamia) और शाहीन बाग में अब भी विरोध-प्रदर्शन हो रहा है, वहीं उत्तर प्रदेश (Uttar Pradesh) में एक ऐसा यूनिवर्सिटी भी है जिसने इस कानून को कोर्स की शक्ल दे दी है. यूनिवर्सिटी से बाकायदा इसमें डिप्लोमा की डिग्री भी दी जाएगी. वाराणसी (Varanasi) में उत्तर प्रदेश राजश्री टंडन मुक्त विश्वविद्यालय (UPRTOU) ने सीएए पर कोर्स शुरू किया है. इसके तहत इस कानून में जितनी बातें हैं, इसे विस्तार से समझाया और पढ़ाया जाएगा.

3 महीने का कोर्स और 500 रुपये फीस
यूनिवर्सिटी के समन्वयक प्रोफेसर सीके सिंह बताते हैं कि इसमें तीन महीने का कोर्स होगा. इसके बाद इसका बाकायदा सर्टिफिकेट भी दिया जाएगा. उन्होंने बताया कि इस पाठ्यक्रम का कोर्स जनवरी से ही शुरू हो गया है और इसके ऑनलाइन फॉर्म भी मिलने लगे हैं. इस पाठ्यक्रम में भारतीय नागरिकता कानून के प्रावधान और उसके समाधान को पढ़ाया जाएगा. प्रोफेसर सिंह कहते हैं कि इस कोर्स की फीस मात्र 500 रूपये रखी गई है, जो फॉर्म चार्ज के रूप में लिया जाएगा. इस कोर्स को विश्वविद्यालय के अंतर्गत आने वाले 200 सेंटर में शुरू कर दिया गया है.

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CAA पर शुरू की गई कोर्स की फीस 500 रुपये रखी गई है


कोर्स को लेकर छात्रों में उत्साह
वहीं इस कोर्स को लेकर वाराणसी के प्रमुख विश्वविद्यालय के छात्रों में काफी उत्साह है. महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ के छात्र सोनू शुक्ला और किशन यादव का कहना है कि इस मुद्दे पर अफवाहों को लेकर काफी विरोध हो रहा है. ऐसे में जब कोई छात्र या अन्य व्यक्ति इस कोर्स को करने के बाद सर्टिफिकेट लेकर सामने वाले को समझायेगा तो उसे विश्वास होगा. क्योंकि सामने वाला व्यक्ति ये बात समझेगा कि उसके हाथ में सर्टिफिकेट है, इसलिए ये इस विषय को ज्यादा जानता होगा.

मकसद है अफवाह दूर करनायूनिवर्सिटी के अनुसार इस कोर्स को शुरू करने का एकमात्र मकसद सीएए से जुड़े उन अफवाहों को दूर करना और उसे फैलाने वालों को सही तस्वीर दिखाना है, क्योंकि जब इसके बारे में ज्यादा जानकारी होगी और इसका सर्टिफिकेट मिलेगा तो लोगों को इस पर विश्वास होगा.

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First published: January 18, 2020, 11:23 AM IST
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