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प्राचीनता और आधुनिकता का संगम बनेगा वाराणसी, गंगा की लहरों से उड़ान भरेगा सी-प्लेन

प्राचीनता और आधुनिकता का संगम बनेगा वाराणसी, गंगा की लहरों से उड़ान भरेगा सी-प्लेन

बनारस में गंगा की लहरों पर पहले से ही मालवाहक, जलयान, रो-रो सर्विस संचालित हो रही हैं.

बनारस में गंगा की लहरों पर पहले से ही मालवाहक, जलयान, रो-रो सर्विस संचालित हो रही हैं.

जिला प्रशासन ने सी-प्लेन की फिजिब्लिटी रिपोर्ट प्रशासन को सौंप दी थी और वह रिपोर्ट शासन को भेजी जा चुकी है. उस रिपोर्ट के मुताबिक, वाराणसी में गंगा की लहरों से सी-प्लेन चलाने में कोई तकनीकी दिक्कत नहीं है.

वाराणसी. अपनी प्राचीनता बरकरार रखते हुए आधुनिकता के साथ कदमताल कर रहा बनारस अब एक नई सुविधा के लिए भी पूरी दुनिया मे जाना जाएगा. बनारस में अब गंगा की लहरों से सी-प्लेन उड़ान भरेगा. गुजरात के गांधीनगर के अहमदाबाद के बाद बनारस दूसरा शहर होगा, जहां से इस सुविधा की शुरुआत हो सकती है. पिछले साल अक्टूबर 2020 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने साबरमती रिवर फ्रंट से गुजरात के ही केवड़िया तक इसकी शुरुआत की. केवड़िया वो जगह है, जहां स्टेच्यू ऑफ यूनिटी के रूप में सरदार बल्लभ भाई पटेल की सबसे ऊंची प्रतिमा लगी हुई है. अब नवंबर या दिसंबर में पीएम नरेंद्र मोदी और सीएम योगी आदित्यनाथ इसकी शुरुआत वाराणसी से कर सकेंगे, जिसकी उम्मीद जताई जा रही है. जिला प्रशासन की ओर से सी-प्लेन की फिजिब्लिटी रिपोर्ट बनाने के लिए अलग-अलग विभागों की जो टीम बनाई गई थी, उस टीम ने पहले ही रिपोर्ट प्रशासन को सौंप दी थी और वह रिपोर्ट शासन को भेजी जा चुकी है. उस रिपोर्ट के मुताबिक, वाराणसी में गंगा की लहरों से सी-प्लेन चलाने में कोई तकनीकी दिक्कत नहीं है.

400 किमी की दूरी एक घंटे में होगी पूरी

जानकारों की मानें तो सी-प्लेन के जरिए 400 किमी की दूरी एक घंटे में पूरी हो जाएगी. जानकार बताते हैं कि गुजरात के गांधीनगर से केवड़िया के बीच करीब 200 किमी की दूरी सी-प्लेन के जरिए आधे घंटे में पूरी हो रही है. किराया भी एक तरफ का प्रति व्यक्ति करीब 1500 रुपये है. फिलहाल चर्चा के मुताबिक, बनारस से प्रयागराज, अयोध्या और मथुरा तक सी-प्लेन चलाया जाएगा. बनारस में गंगा की लहरों पर पहले से ही मालवाहक, जलयान, रो-रो सर्विस संचालित हो रही हैं. बीते दिनों ही गोवा से दो रो-रो यहां पहुंचे और फिलहाल बिना किसी दिक्कत के वे संचालित हो रहे हैं. जिस टीम ने फिजिब्लिटी रिपोर्ट तैयार की है, उसमें पीडब्ल्यूडी, प्रभागीय वनाधिकारी, बंधी प्रखंड, एआरटीओ, पर्यटन और वीडीए के अधिकारी और कर्मचारी शामिल रहे.

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यहां से उड़ान भर सकता है सी-प्लेन

बताया जाता है कि सी-प्लेन को उड़ान भरने के लिए जमीन या पानी में एक किमी की जगह ऐसी चाहिए, जिसमें कोई बाधा न हो. इस लिहाज से वाराणसी में गंगा में ये तकनीकी जरूरत पूरी हो सकती है. इस कसौटी के लिहाज से नए तरीके से डेवलेप किए जा रहे खिड़किया घाट, राजघाट और सामने घाट के बीच में भी जगह है. तो वहीं सामने घाट से विश्वसुंदरी पुल के बीच भी सी-प्लेन उड़ान भर सकता है. वाराणसी के कमिश्नर दीपक अग्रवाल ने बताया कि रिपोर्ट शासन को भेजी जा चुकी है. रिपोर्ट में कोई भी दिक्कत सामने नहीं आई. शासन से हरी झंडी मिलते ही आगे की कवायद पूरी की जाएगी.

Tags: CM Yogi Aditya Nath, Pm narendra modi, Varanasi news

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