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गंगाजल पीकर नाव पर ही 14 दिन के लिए क्वारंटाइन है बनारस का पप्पू
Varanasi News in Hindi

Upendra Dwivedi | News18Hindi
Updated: May 24, 2020, 7:02 AM IST
गंगाजल पीकर नाव पर ही 14 दिन के लिए क्वारंटाइन है बनारस का पप्पू
नाव पर ही 14 दिन क्वारंटाइन हैं बनारस का पप्पू

वाराणसी (Varanasi) जिला मुख्यालय से 24 किमी दूर गाजीपुर बार्डर पर स्थित कैथी का निवासी पप्‍पू गुजरात से लौटा है.

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वाराणसी. पूरा देश कोरोना (Coronavirus) के खात्मे की लड़ाई में जुटा हुआ है. आम हो या खास, सभी लोग अपने-अपने तरीके से इस जंग में जिम्मेदारी निभा रहे हैं. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (PM (Narendra Modi) के संसदीय क्षेत्र वाराणसी में अलग-अलग तस्वीर देखने को मिल रही हैं. यहां गुजरात से लौटा एक शख्स गंगा किनारे नाव पर क्वारंटाइन है, तो वहीं कुछ लोग तालाब किनारे मचान बनाकर रहे हैं. सबका मकसद सिर्फ इतना है कि घर वाले और गांव वाले सुरक्षित रहें. वाराणसी जिला मुख्यालय से 24 किमी दूर गाजीपुर बार्डर पर कैथी गांव है. मार्कंडेय महादेव का दरबार यहीं स्थित है. पूरी दुनिया से लोग उनके दर्शन को पहुंचते हैं.

इसी गांव का रहने वाला पप्पू निषाद उर्फ भेड़ा (45) अपने दोस्त के साथ गुजरात के मेहसाणा में गन्ना पेराई का काम करता था. लॉकडाउन के कारण सब कुछ बंद होने के बाद वह श्रमिक स्पेशल ट्रेन से गाजीपुर पहुंचा. वहां स्वास्थ्य परीक्षण के बाद जब कैथी गांव स्थित अपने घर पहुंचा तो देखा कि घर में ताला लगा है. घर में उसकी मां और उसके तीन बच्चे रहते हैं और वे नाव चलाकर जिंदगी गुजारते हैं. पिता और पत्नी गुजर चुके हैं. इन्हीं बच्चों और मां की खातिर वो परदेश में मेहनत करने गया था, लेकिन आज घर में ताला देख मायूस हो गया.

मचान पर खुद को किया होम क्वारांटाइन
मचान पर खुद को किया होम क्वारांटाइन




पता चला कि लॉकडाउन के कारण मां चंदौली स्थित बहन के घर बच्चों समेत चली गई. अब लॉकडाउन के कारण वहां से फौरन आना भी मुश्किल था. ऐसे मे पप्पू बेचारा क्या करता. वह मां गंगा किनारे अपनी पारिवारिक नाव पर पहुंचा. गांव के लोगों ने कुछ दो चार बर्तन और उपले दे दिए. अब पप्पू नाव पर ही खाना बनाता है तो वहीं गंगाजल जल पीकर गंगा की गोद को ही बिस्तर समझकर सोता है. कुछ ऐसी ही कहानी दूसरे इलाकों की भी है.



पिंडरा थाने के मकसुर्द पट्टी गांव में ही कुछ लोग तालाब किनारे मचान बनाकर रह रहे हैं. रात में जंगली जानवर और कीड़े-मकोड़ों से बचने के लिए उन्होंने ऐसा किया है. अधिकतर गुजरात से लौटकर गांव पहुंचे हैं. किसी का घर छोटा है तो किसी की कुछ और दिक्कत. मकसद सिर्फ इतना है कि घरवाले सुरक्षित रहें. वो 14 दिन के इस क्वारंटाइन पीरियड में चाहे कैसे भी रह लेंगे.

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First published: May 24, 2020, 5:27 AM IST
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