विश्वनाथ मंदिर बनाम ज्ञानव्यापी मस्जिद: अविमुक्तेश्वरानंद की अर्जी के खिलाफ आपत्ति पर बहस 26 को

स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती को वाद मित्र न बनाने की दरख्वास्त पर बहस 26 फरवरी को. (सांकेतिक फोटो)

स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती को वाद मित्र न बनाने की दरख्वास्त पर बहस 26 फरवरी को. (सांकेतिक फोटो)

वाराणसी में सिविल जज सीनियर डिवीजन के कोर्ट में चल रहे मुकदमे की सुनवाई में स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती ने अर्जी देकर उनको वाद मित्र बनाने की प्रार्थना की थी.

  • News18Hindi
  • Last Updated: February 12, 2021, 9:55 AM IST
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वाराणसी. वाराणसी के न्यायालय में चल रहे विश्वनाथ मंदिर बनाम ज्ञानव्यापी मस्जिद (Vishwanath mandir vs Gyanvyapi Masjid) मामले में शंकराचार्य स्वामी स्वरूपानंद सरस्वती (Shankaracharya Swami Swaroopanand Saraswati) के शिष्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद (Avimukteshwarananda) की एंट्री के बाद पूरे मामले में नया अखाड़ा खुल गया है. अब तक मंदिर और मस्जिद को लेकर जो बहस हो रही थी, वह फिलहाल स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद के वाद मित्र बनने की अर्जी के बाद इस बात पर होने लगी है कि कौन होना चाहिए मंदिर पक्ष का वाद मित्र.

स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने वाद मित्र बनाने की दी थी अर्जी

वाराणसी में सिविल जज सीनियर डिवीजन के कोर्ट में चल रहे मुकदमे की सुनवाई में स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती ने पिछली तारीख में अर्जी लगाई थी. जिसके जरिए उन्होंने मंदिर पक्ष से उनको वाद मित्र बनाने की प्रार्थना की थी. इस पर पिछली तारीख को ही मंदिर पक्ष की ओर से पैरवी कर रहे एडवोकेट विजय शंकर रस्तोगी ने आपत्ति जताई. बता दें कि विजय शंकर रस्तोगी पहले से ही इस मामले में कोर्ट द्वारा नियुक्त वाद मित्र हैं. साथ ही मस्जिद पक्ष से सुन्नी सेंट्रल वक्फ बोर्ड के वकील ने भी आपत्ति जताई थी. कोर्ट ने सभी पक्षों को अपनी लिखित आपत्ति देने के लिए 11 फरवरी की तारीख दी थी.

आपत्ति पर बहस 26 फरवरी को
11 फरवरी यानी आज गुरुवार को मंदिर पक्ष के पहले से नियुक्त वाद मित्र विजय शंकर रस्तोगी ने अपनी आपत्ति जताई और स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती को वाद मित्र न बनाने की दरख्वास्त की. अब कोर्ट ने 26 फरवरी की तारीख दी है, इसी दिन आपत्ति पर बहस होगी. यानी अब ये कोर्ट से तय होगा कि स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती इस मामले में पक्षकार बनेंगे या नहीं.

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वाद मित्र विजय शंकर रस्तोगी ने अविमुक्तेश्वरानंद पर लगाया बड़ा आरोप



पहले से नियुक्त वाद मित्र विजय शंकर रस्तोगी ने न्यूज-18 से बातचीत में स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद पर बड़ा आरोप लगाया. विजय शंकर ने कहा कि स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद विशेष राजनीतिक पार्टी के कार्यकर्ता रहे हैं. अभी भी उसके लिए कार्यकर्ता के तौर पर कार्य करते हैं. हिंदुओं के खिलाफ उनकी नीति विध्वंस रही है. राम जन्मभूमि न्यास के खिलाफ इन लोगों ने रामालय ट्रस्ट की स्थापना की थी. विश्व हिंदू परिषद द्वारा राम जन्मभूमि पर मंदिर बनाने पर इन्होंने कहा था कि ये मंदिर नहीं बल्कि विश्व हिंदू परिषद का कार्यालय बनाने की योजना है. स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती ने झूठ कहा था कि वे राम मंदिर मामले में पक्षकार रहे हैं. गवाह संख्या बीस के रूप में उनकी संक्षिप्त गवाही हुई थी. इसके अलावा राम मंदिर मामले में उनका कोई रोल नहीं था. विश्वनाथ मंदिर मामले में भी तीस साल के बाद अब इन्होंने प्रार्थना पत्र दिया. उनको ऐसा प्रतीत होता है कि इस मामले से राजनीतिक पटल पर वे अपना चेहरा दिखा पाएंगे. मीडिया में खुद को पेश कर पाएंगे. मैंने अपनी लिखित आपत्ति दर्ज कराई है. वे हिंदुओं के खिलाफ हैं. उनके मुकदमे में वाद मित्र बनने से अशांति पैदा होगी.
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