जल पुरुष संजय सिंह बोले, इसलिए खून जैसा आ रहा है वरुणा का पानी

वैज्ञानिक सत्य यह है कि नदी के पानी की हार्डनेस बढ़ गई है. यह अंध विश्वास है कि नदी का पानी खून जैसा आ रहा है. नदी का पानी दूषित हो गया है जो वरुणा नदी के आसपास रहने वाले लोगों को बीमार कर रहा है.

News18 Uttar Pradesh
Updated: July 12, 2019, 5:47 PM IST
जल पुरुष संजय सिंह बोले, इसलिए खून जैसा आ रहा है वरुणा का पानी
जल पुरुष संजय सिंह बोले, आयरन अधिक होने से रेडिस हो गया है वरुणा नदी का पानी (फाइल फोटो) .
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Updated: July 12, 2019, 5:47 PM IST
वाराणसी में अवैध बूचड़खाने से निकल रहा खून वरुणा नदी से होते हुए गंगा में मिल रहा है. एनजीटी की ताजा रिपोर्ट में यह बात कही गई है. तमाम सारी खामियों का संज्ञान लेते हुए एनजीटी ने नगर निगम वाराणसी पर 27 लाख रुपए का जुर्माना भी लगाया है. लोगों का कहना है खून जैसा पानी आ रहा है. जल पुरुष संजय सिंह ने कहा कि, आयरन अधिक होने से वरुणा का पानी रेडिस हो गया है. वैज्ञानिक सत्य यह है कि नदी के पानी की हार्डनेस बढ़ गई है. यह अंध विश्वास है कि नदी का पानी खून जैसा आ रहा है. नदी का पानी दूषित हो गया है जो वरुणा नदी के आसपास रहने वाले लोगों को बीमार कर रहा है. उन्होंने कहा कि, बनारस बहुत ही महत्वपूर्ण शहर है, आध्यात्मिक और प्राचीन शहर है. पीएम का संसदीय क्षेत्र भी है. वरुणा नदी को लेकर पिछली सरकार ने प्रोजेक्ट चलाया है.

कब्जे के बाद नदी की स्थिति खतरनाक है


संजय सिंह ने कहा कि, वरुणा के दुर्दशा के ये कारण हैं. पहला वरुणा नदी के आसपास के क्षेत्र में लोगों ने अतिक्रमण कर रखा है. कब्जे के बाद नदी की स्थिति खतरनाक है. अगल-बगल में जनसंख्या के दबाव से वरुणा मूल स्वरूप से गायब है, नदी जो कुछ बची है उसे बचाना महत्वपूर्ण है. नीचे के दूषित पानी ने भूगर्भ जल के फस्ट स्टेज को दूषित कर दिया है जो सेकेंड स्टेज तक पहुंच गया है, जिससे रेड पानी आ रहा है.

ऐसी स्थिति में जीव नहीं बचेंगे

जल पुरुष ने कहा कि, यह दूषित पानी गंगा को भी दूषित कर रहा है. ऐसी स्थिति में जीव नहीं बचेंगे. अगर अभी ध्यान नहीं दिया गया तो स्थिति विकराल रूप ले लेगी. जल संसाधन, नदी विकास और गंगा संरक्षण मंत्रालय को वाराणसी में एक टीम भेजनी चाहिए. संजय सिंह ने कहा कि, वरुणा का जहां प्रवाह रुका है, वहां काम करने की जरूरत है. मंत्रालय को व्यवस्थित रूप से तेजी से काम करना होगा. निष्ठावान लोगों को जिम्मेदारी देनी चाहिए. वरुणा नदी के बचाव के लिए जन जागरुकता की जरूरत है. वरुणा नदी के आसपास जो बोरवेल हो रहे हैं. उसे रोकना होगा और पेड़ लगाने होंगे.

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