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Women's Day 2020: वाराणसी की लेडी डॉक्टर की अनोखी पहल- बेटी पैदा हुई तो फीस माफ

Women's Day Special: वाराणसी में महिला डॉक्टर  डॉ शिप्रा धर ने अनोखी पहल की है.

Women's Day Special: वाराणसी में महिला डॉक्टर डॉ शिप्रा धर ने अनोखी पहल की है.

Women's Day Special: डॉ शिप्रा धर ने अपने इस अनूठे प्रयास को कुछ साल पहले शुरू किया और अब तक करीब 350 बेटियों की मुफ्त ...अधिक पढ़ें

वाराणसी. उत्तर प्रदेश के वाराणसी (Varanasi) की एक महिला डाक्टर (Ladu Doctor) बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ के सपने को अपने अनूठे प्रयासों से पूरा कर रही हैं. उनके अस्पताल में अगर बेटी पैदा होती है तो न केवल डिलीवरी फीस माफ होती है बल्कि डिलिवरी रूम में उत्सव मनाया जाता है. इस अस्पताल की संचालिका डॉ शिप्रा धर ने अपने इस अनूठे प्रयास को कुछ साल पहले शुरू किया और अब तक करीब 350 बेटियों की मुफ्त डिलिवरी करा चुकी हैं. हर बार बेटी के पैदा होने पर उसके साथ सेल्फी लेकर अस्पताल के मुख्य गेट पर लगाई जाती है. यही नहीं, अब शाम को 4 से 6 बजे के बीच वो गरीब बेटियों को मुफ्त में अस्पताल कैंपस में पढ़ाने की जिम्मेदारी भी उठा रही हैं.

बेटी बचाओ के साथ बेटी पढ़ाओं के संकल्प को अपने स्तर से पूरा करने वाली डॉ शिप्रा धर बताती हैं कि ये ख्याल उनके मन में तब आया, जब उन्होंने बेटियों का तिरस्कार देखा. वो बताती हैं कि उनके अस्पताल में जब बेटियां पैदा होती थीं और अगर सिजेरियन हुई तो घरवाले निराश हो जाते थे. ये बात उन्होंने अपने पति डॉ एमके श्रीवास्तव को बताई तो उन्होंने ये आइडिया दिया. कभी-कभी फाइनेंशियल दिक्कत आई लेकिन मां-बाप के चेहरे की खुशी के आगे दिक्कत छोटी लगी. धीरे-धीरे आनंद आने लगा और अब तक 350 बेटियां उनके अस्पताल में इस अभियान के तहत पैदा हुई हैं.

फीस माफ होने से परिजनों को मिलती है राहत

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Women's Day Special: अब तक 350 के करीब बच्चियों की मुफ्त डिलीवरी कर चुकी हैं डॉ शिप्रा धर


वह कहती हैं कि बेटियों के पैदा होने पर फीस माफ होने और फिर घर पहुंचने से पहले अस्पताल में ही जश्न होना, घरवालों को भी एक अलग सुकून देता है. बेटियों के माता-पिता राहुल और अनामिका पांडेय हों या एक बेटी के दादा आफताब खान, सभी का कहना है कि इस तरीके के अभियान पूरे देश में चलने चाहिए. तभी जाकर बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ का सपना पूरा हो पाएगा.

पति भी देते हैं पूरा साथ
इस अभियान में डॉ शिप्रा को प्रेरणा अपने पति डॉ एमके श्रीवास्तव से मिली. डॉ एमके श्रीवास्तव खुद भी पेशे से सीनियर फिजीशियन हैं. उनका कहना है कि किसी न किसी को आगे आना होगा और इतिहास के लिए कुछ इस तरह के शिलालेख छोड़ने होंगे. वह कहते हैं कि किसी दिन तो अस्पताल में सिर्फ बेटियां ही होती हैं, ऐसे में फाइनेशियल दिक्कत तो होती है लेकिन इन दिक्कतों के आगे डॉ शिप्रा का हौसला नहीं झुकता. सलाम है, वाराणसी की इन लेडी डाक्टर के जज्बे और जूनून को.

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