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यूपी : अब आतंकियों और अपराधियों की खैर नहीं, काशी में 'फेस रिकग्निशन' कैमरा लगाने की तैयारी

यूपी में अब आतंकियों और अपराधियों की खैर नहीं (file photo)
यूपी में अब आतंकियों और अपराधियों की खैर नहीं (file photo)

वाराणसी (Varanasi) के एसएसपी (SSP) अमित पाठक ने बताया कि ये सरकार की अच्छी पहल है और इससे क्राइम कंट्रोल में काफी मदद मिलेगी.

  • News18Hindi
  • Last Updated: November 24, 2020, 7:01 PM IST
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वाराणसी. पीएम मोदी के संसदीय क्षेत्र वाराणसी (Varanasi) की सीमा में अब कोई भी अपराधी या आतंकी आने की कोशिश करेगा तो उसका बचने और छिपने का प्रयास नाकाम हो जाएगा. उसकी पहचान तुरंत फेस रिकॉग्निशन कैमरे में आ जाएगी. ये कैमरे इतने कारगर हैं कि अपराधियों की कई साल पुरानी फोटो की भी पहचान कर लेंगे, यदि आप भेष बदलने में माहिर हैं तो भी ये हाईटेक कैमरे आपकी पहचान बता देंगे.

वीडियो एनालिटिक्स के माध्यम से पूरे जिले के चप्पे -चप्पे पर नज़र रखी जाएगी ,लाखों की भीड़-भाड़ हो या ठंड का मौसम सभी परिस्थितियों में ये कैमरे शातिर अपराधियों की पहचान करके पुलिस तक सूचना दे देंगे. क्राइम एंड क्रिमिनल ट्रैकिंग नेटवर्क एंड सिस्टम्स (CCTNS) जून 2009 में शुरू की गई एक परियोजना है जिसका उद्देश्य पुलिस स्टेशन स्तर पर पुलिसिंग की दक्षता और प्रभावशीलता को बढ़ाने के लिए एक व्यापक और एकीकृत प्रणाली बनाना है.

यूरोपियन और अमेरिकन टेक्नॉलजी का प्रयोग
सीसीटीएनएस भारत सरकार की राष्ट्रीय ई-गवर्नेंस योजना के तहत एक मिशन मोड प्रोजेक्ट (MMP) है. थानों से अपराधियों के डाटा लिए जाएंगे (लिंक किया जायेगा ). साथ ही लोकल स्तर पर भी अपराधियों के डाटा फीड किया जाएगा जिससे अपराधियों की पहचान हो सके. स्मार्ट सिटी के सीईओ और नगर आयुक्त गौरांग राठी ने बताया कि भारतीय, यूरोपियन और अमेरिकन टेक्नॉलजी का प्रयोग करके इसे लगाया जा रहा है, इसके लिए 125 करोड़ रुपये की लागत से 500 किलोमीटर तक ऑप्टिकल फाइबर बिछायी जाएगी और 700 अलग अलग जगहों पर 3000 कैमरे लगाए जायेंगे, जिसमें से 22 कैमरे फेस रिकग्निशन सिस्टम के लिए होंगे.
आतंकियों के निशाने पर हमेशा काशी


वाराणसी के एसएसपी अमित पाठक ने बताया कि ये सरकार की अच्छी पहल है और इससे क्राइम कंट्रोल में काफी मदद मिलेगी. धर्म और अध्यात्म की नगरी काशी हमेशा से आतंकियों के निशाने पर रही और कई आतंकी हमले भी झेल चुकी है. पूर्वांचल का व्यावसयिक हब होने की वजह से काशी से कई तरह की आपराधिक गतिविधियां भी संचालित होती है और पूर्वांचल में अक्सर गैंगवार भी होता रहा है, ऐसे में फेस रिकग्निशन सिस्टम अपराधियों और असामजिक तत्वों को उनकी सही जग़ह पहुंचाने में कारगर साबित होगी.
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