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चिन्मयानंद दुष्कर्म मामलाः पीड़िता ने कोर्ट में लगाई अर्जी, कहा- नई धाराओं में दर्ज हो मामला

News18Hindi
Updated: October 22, 2019, 1:17 PM IST
चिन्मयानंद दुष्कर्म मामलाः पीड़िता ने कोर्ट में लगाई अर्जी, कहा- नई धाराओं में दर्ज हो मामला
एसआईटी ने कोर्ट को बताया कि वीडियो क्लिप (Video Clip) की फॉरेंसिक लैब से रिपोर्ट आने में समय लगेगा. एसआईटी के अनुसार 4 सप्ताह में वीडियो क्लिप की फॉरेंसिक रिपोर्ट आने की संभावना है. (फाइल फोटो)

एसआईटी (SIT) ने सीलबंद लिफाफे में पेश की प्रोग्रेस रिपोर्ट (Progress Report), वीडियो रिकॉर्डिंग (Video Recording) की फॉरेंसिक जांच रिपोर्ट के लिए मांगे 4 सप्ताह.

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  • Last Updated: October 22, 2019, 1:17 PM IST
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इलाहबाद. पूर्व केंद्रीय मंत्री और एलएलएम छात्रा (LLM Student) के साथ यौन शोषण करने के आरोपी चिन्मयानंद (Chinmayanand) पहले ही मुश्किलों से गुजर रहा है और अब उसकी परेशानियां बढ़ती दिखाई दे रही हैं. अब पीड़िता ने कोर्ट (Court) में मिसलेनियस एप्लिकेशन दाखिल कर नई धाराओं में मुकदमा दर्ज करने की मांग की है. वहीं, पीड़िता ने 5 सितंबर को दिल्ली (Delhi) के लोधी थाने में भी मामला दर्ज करवाया है. अब कोर्ट ने पीड़िता की अर्जी पर राज्य सरकार से जवाब तलब किया है. इसके साथ ही मंगलवार को मामले में एसआईटी (SIT) ने सीलबंद लिफाफ में कोर्ट के समक्ष प्रोग्रेस रिपोर्ट पेश की. एसआईटी ने कोर्ट को बताया कि वीडियो क्लिप (Video Clip) की फॉरेंसिक लैब से रिपोर्ट आने में समय लगेगा. एसआईटी के अनुसार 4 सप्ताह में वीडियो क्लिप की फॉरेंसिक रिपोर्ट आने की संभावना है. गौरतलब है कि सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) के निर्देश के बाद हाईकोर्ट (High Court) की डिवीजन बेंच एसआईटी जांच की मॉनिटरिंग कर रही है. अब मामले में अगली सुनवाई 28 नवंबर को होगी.

गिरफ्तारी पर रोक की अर्जी ठुकराई थी
बता दें कि मामले कि पिछली सुनवाई 23 सितम्बर को इलाहाबाद हाईकोर्ट में हुई थी. हाईकोर्ट में करीब डेढ़ घंटे तक सुनवाई चली थी, जिसमें हाईकोर्ट की डिवीजन बेंच ने चिन्मयानंद की ब्लैकमेलिंग मामले में गिरफ्तारी पर रोक लगाने को लेकर छात्रा की ओर से दाखिल अर्जी को ठुकरा दी थी. अदालत ने कहा था कि यह स्पेशल बेंच है, जो सिर्फ एसआईटी जांच की मॉनिटरिंग करेगी. हालांकि, जस्टिस मनोज मिश्र और जस्टिस मंजू रानी चौहान की खंडपीठ ने छात्रा से कहा था कि गिरफ़्तारी पर रोक के लिए अलग से नियमित कोर्ट में अर्जी दाखिल की जा सकती है.

SIT जांच से संतुष्ट दिखा था कोर्ट

अदालत ने छात्रा द्वारा मजिस्ट्रेट के सामने 164 का बयान दोबारा दर्ज कराए जाने की अर्जी भी ठुकरा दी थी. अदालत ने कहा था कि छात्रा ट्रायल कोर्ट में इसके लिए अर्जी दाखिल कर सकती है. यह कोर्ट निचली अदालत के काम में दखल नहीं देगी. छात्रा ने मजिस्ट्रेट बयान के वक्त एक अंजान महिला के मौजूद रहने व सिर्फ अंतिम पेज पर ही दस्तखत कराने का सुनवाई के दौरान आरोप भी लगाया था. अदालत ने यूपी सरकार की ओर से इस मामले की सुनवाई बंद कमरे में किये जाने की मांग भी अस्वीकार कर दी थी. मामले की सुनवाई शुरू होने पर सबसे पहले एसआईटी ने सील बंद लिफाफे में जांच की प्रोग्रेस रिपोर्ट पेश की थी. एसआईटी ने तीन लिफाफे में अदालत को प्रोग्रेस रिपोर्ट सौंपी थी. एसआईटी आईजी नवीन अरोड़ा ने सबूत के तौर पर पेन ड्राइव, सीडी व अन्य डाक्यूमेंट भी कोर्ट में पेश किया था. हांलाकि, अदालत एसआईटी की तब तक की जांच से फौरी तौर पर संतुष्ट नजर आयी थी. कोर्ट ने एसआईटी को 22 अक्टूबर को कोर्ट में अगली प्रोग्रेस रिपोर्ट दाखिल करने का आदेश दिया था.

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First published: October 22, 2019, 1:07 PM IST
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