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कहीं आप भी तो नहीं हुए शिकार...वोटर आईडी कार्ड बनाने की फेक वेबसाइट बनाकर 10 हजार लोगों को ठगा, 2 अरेस्ट

कहीं आप भी तो नहीं हुए शिकार...वोटर आईडी कार्ड बनाने की फेक वेबसाइट बनाकर 10 हजार लोगों को ठगा, 2 अरेस्ट

प्रतीकात्मक तस्वीर

प्रतीकात्मक तस्वीर

Voter ID Card Fraud News: वोटर कार्ड (Voter Card) में संशोधन के नाम पर फर्जी सरकारी वेबसाइट (Voter Card Website) चलाने वाले गिरोह का पुलिस (Delhi Police) ने पर्दाफाश किया है. दिल्ली की सेंट्रल जिला पुलिस ने वोटर कार्ड में संशोधन के नाम पर जालसाजी कर लोगों से पैसा ठगने के मामले में 2 आरोपियों को गिरफ्तार किया है. इन दोनों की गिरफ्तारी उत्तर प्रदेश (Uttar Pradesh) से हुई है, जो 'voteridcard.ebharatseva.in' के नाम से फर्जी वेबसाइट चला रहे थे.

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    मुरादाबाद: वोटर कार्ड (Voter ID Card) में संशोधन के नाम पर फर्जी सरकारी वेबसाइट (Voter Card Website) चलाने वाले गिरोह का पुलिस (Delhi Police) ने पर्दाफाश किया है. दिल्ली की सेंट्रल जिला पुलिस ने वोटर कार्ड में संशोधन के नाम पर जालसाजी कर लोगों से पैसा ठगने के मामले में 2 आरोपियों को गिरफ्तार किया है. इन दोनों की गिरफ्तारी उत्तर प्रदेश (Uttar Pradesh) से हुई है, जो ‘voteridcard.ebharatseva.in’ के नाम से फर्जी वेबसाइट चला रहे थे.

    राजिंदर नगर थाने में मामला दर्ज किया गया था, जिसमें शिकायतकर्ता ने आरोप लगाया था कि उसे अपने वोटर आईडी कार्ड में कुछ बदलाव करवाना था, जिसके लिए उसने ऑनलाइन सर्च किया तो एक वेबसाइट “voteridcard.ebharatseva.in” मिली. जब उन्होंने इस वेबसाइट को खोला, तो उन्हें रुपये के भुगतान के लिए पेमेंट गेटवे के लिए 650 रुपए पेमेंट के लिए कहा गया, जो अनिवार्य शुल्क कहा गया. भुगतान करने के बाद उन्हें info@ebharatseva.in और no-reply@razorpay.com से ईमेल प्राप्त हुए, जिसमें कहा गया था कि भुगतान सफल रहा और वे उनके आवेदन पर कार्रवाई करेंगे और उनके कार्यकारी जल्द ही उनसे संपर्क करेंगे.

    जब उन्हें कोई भी जवाब “voteridcard.ebharatseva.in” की ओर से नहीं आया तो शिकायतकर्ता को संदेह हुआ और उसने वेब-ब्राउज़र पर सर्च करके देखा कि भारत निर्वाचन आयोग की आधिकारिक वेबसाइट “voterportal.eci.gov.in” है. जिससे उसे पता चला कि वेबसाइट एक साइबर धोखाधड़ी के लिए थी.

    पुलिस को जांच के दौरान यह पता चला कि कथित भुगतान “रेजोरपे” भुगतान गेटवे के माध्यम से संचालित किया गया था, जिसे आगे टीटू साइबर कैफे के नाम पर रजिस्टर्ड खाते में जमा किया गया था. बैंक से जानकारी लेने के बाद पता चला कि मालिक की पहचान मनमोहन सिंह निवासी मुरादाबाद हुई. उससे पूछताछ के दौरान उसने अपनी भूमिका कबूल की और अपने साथी अंकित कुमार पाल निवासी अमरोहा यूपी की मिलीभगत का खुलासा किया.

    पुलिस ने बताया कि इन दोनों ने इस फर्जी वेबसाइट के माध्यम से 10,000 से अधिक लोगों को अपना शिकार बनाया है. इसका मास्टरमाइंड कनव कपूर अभी फरार है, जो कई फर्जी वेबसाइट चला रहा है और उसकी तलाश की जा रही है. दो आरोपी अंकित कुमार और मनमोहन सिंह को गिरफ्तार कर लिया गया है और फिलहाल वे पुलिस हिरासत में हैं.

    Tags: Moradabad News, Online voter card, Uttar pradesh news

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