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पांच नदियों के बाद भी 'प्‍यासा' है बुंदेलखंड, जालौन में पानी को लेकर मची त्राहि-त्राहि

बुंदेलखंड में बेतवा, यमुना, कुवांरी, सतलज और पहुज नदियां बहती हैं, लेकिन फिर भी यहां के वाशिंदे प्यासे हैं.

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    इस समय उत्‍तर भारत भीषण गर्मी से जूझ रहा है, लेकिन उत्‍तर प्रदेश के बुंदेलखंड के लोग दोहरी मार झेल रहे हैं. जी हां, एक तरफ भीषण गर्मी ने जीवन बेहाल कर दिया है तो दूसरी तरफ बुंदेलखंड में जल संकट शुरू हो चुका है. हालात ऐसे हैं कि पेयजल ही नहीं बल्कि दैनिक उपयोग के लिए पानी ना मिलने से त्राहि-त्राहि मची हुई है. जबकि बुंदेलखंड के जालौन की तो कहानी हर किसी को हैरान कर रही है. ग्रामीण क्षेत्रों में जलस्त्रोत पूरी तरह सूख गए हैं. अधिकांश इलाकों में जिसे जहां भी पानी दिखता है वो उस पानी को अपने बर्तनों में भरने के लिए जद्दोजहद करने लगता है.

    पांच नदियों हैं फिर भी...
    बुंदेलखंड में बेतवा, यमुना, कुवांरी, सतलज और पहुज नदियां बहती हैं, लेकिन फिर भी यहां के वाशिंदे प्यासे हैं. जबकि बुंदेलखंड में यूपी के सात जिले झांसी, हमीरपुर, बांदा, महोबा, जालौन और चित्रकूट आते हैं, लेकिन हर जिला पानी की कमी से जूझ रहा है. इसमें से जालौन के हालात भी खासे खराब हैं. यहां के लोगों को पानी खरीदकर पीना पड़ रहा है या फिर वह पानी के लिए बर्तन लेकर कई किलोमीटर की दूरी तय कर रहे हैं. जबकि ग्रामीण एवं शहरी इलाकों में लगे अधिकांश हैंडपम्पों ने जबाब दे दिया है. इसमें से अधिकांश हैंडपम्प रीबोर की स्थिति में पड़े हैं और सैकड़ों खराब हो चुके हैं. आलाम ये है कि इन्‍हें ठीक करने के लिए प्रसाशन कोई कदम नहीं उठा पा रहा है.

    पशु-पक्षी भी हुए व्‍याकुल
    नहरें न चलने से पशु पक्षी प्यास से व्याकुल हो चुके हैं. जबकि जालौन के वाशिंदों का कहना है कि भीषण गर्मी में पानी के लिए काफी परेशानी हो रही है. ऐसे में वह पानी खरीदकर घर ले जा रहे हैं और तमाम शिकायतों के वावजूद भी खराब हैंडपम्पो को दुरुस्त नहीं किया गया. हालांकि उरई नगर पालिका के ईओ संजय कुमार का कहना है कि जिन इलाकों में पेयजल की समस्या है वहां टैंकर भेजकर पानी की सप्लाई की जा रही है. इसके अलावा सिटी मजिस्ट्रेट जेपी सिंह का कहना है कि तहसील दिवस व अन्य दिनों में मिलने वाली पानी की शिकायतों पर उन इलाकों में समस्या को दूर किया जाता है.

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