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उत्तर प्रदेश की राजनीति में सियासी चक्रव्यूह बनी एमएलसी की बारहवीं सीट

उत्तर प्रदेश में विधान परिषद चुनाव जीतने के लिए राजनीतिक दलों ने सियासी बिसात बिछानी शुरू कर दी है.
उत्तर प्रदेश में विधान परिषद चुनाव जीतने के लिए राजनीतिक दलों ने सियासी बिसात बिछानी शुरू कर दी है.

उत्तर प्रदेश (UP) विधान परिषद चुनाव जीतने के लिए सीयासी दलों ने शुरू कर दी है जोड़तोड़. भाजपा (BJP) 10 सीटें और सपा (SP) 1 सीट पर जीत सकती है चुनाव. 11वीं सीट जीतने क्या होगा भाजपा का सियासी दाव.

  • News18Hindi
  • Last Updated: January 7, 2021, 7:25 PM IST
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लखनऊ. उत्तर प्रदेश (UP) में सियासी पारा एक बार फिर से उफान पर है. प्रदेश की 12 विधान परिषद सदस्य (MLC) सीटों पर चुनाव की अधिसूचना जारी होने के बाद भाजपा (BJP) के साथ सपा (SP) और बसपा (BSP) भी अपना एमएलसी (MLC) बनाने के लिए सक्रिय हो गई है. इस चुनाव में संख्याबल का ही महत्व होता है और इन आंकड़ों के हिसाब से भाजपा 12 सीटों में से 10 सीटें अपने सहयोगी दलों के सपोर्ट से जीतने की स्थिति में है.

वहीं सपा एक सीट जिता सकती है, लेकिन बसपा के पास इतनी भी संख्या नहीं है कि वह अपना एक भी एमएलसी बनाने में कामयाब हो सके. ऐसे में अब बारहवीं एमएससी सीट के लिये मुकाबला काफी रोचक हो गया है. भाजपा इस सीट को जीतने के लिए अपने सहयोगी दलों के साथ व्यूह रचना में जुटी है. लेकिन इसकी जीत हार मायावती के ऊपर भी निर्भर कर सकती है.

विधान परिषद के 12 सीटों पर होंगे चुनाव



विधान परिषद के 12 सीटों के लिए होने वाले चुनाव को लेकर भारतीय जनता पार्टी की ओर से राजनीतिक घेराबंदी शुरू हो गई है. हाल ही में सम्पन्न हुए स्नातक एमएलसी चुनाव में समाजवादी पार्टी द्वारा झांसी-प्रयागराज और बनारस सीटों पर जीत दर्ज करने के बाद भाजपा इस बार सपा को कोई मौका नहीं देना चाहती. मौजूदा विधायकों की संख्या के आधार पर बीजेपी के 12 में से 10 सीटें ही जीतने की संभावना है. इसके अलावा ग्यारहवीं सीट पर समाजवादी पार्टी अपने विधायकों की संख्या के अनुसार जीत दर्ज कर सकती है. जबकि बसपा के पास सबसे कम विधायक हैं जिस वजह से उसे अपने प्रत्याशी को जिताने के लिए भाजपा की ही मदद की दरकार है.
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अब ऐसे में एक बार फिर बहुजन समाज पार्टी प्रमुख मायावती के सियासी दाव पर सभी की नजर टिक गई है. यह इसलिए भी कि इसके पहले उत्तर प्रदेश में राज्यसभा चुनाव के दौरान भाजपा ने सपा को रोकने के लिए बसपा समर्थक कैंडिडेट की मदद परोक्ष रूप से की थी. मायावती ने भी कहा था कि वह सपा को रोकने के लिए भाजपा प्रत्याशी को जिता सकती हैं. अब एक बार फिर एमएलसी चुनाव में मायावती और भाजपा की ओर से फेंके जाने वाले दांव पर सबकी नजर टिकी हुई है.

विधान परिषद की 11 सीटें 30 जनवरी को होंगी रिक्त

विधान परिषद की 11 सीटें 30 जनवरी को खाली हो रही हैं जबकि एक सीट पहले से खाली है. इनमें से समाजवादी पार्टी के पास छह सीटें हैं, जबकि भारतीय जनता पार्टी के पास तीन, बहुजन समाज पार्टी के पास दो सीटें हैं. इसके अलावा एक नसीमुद्दीन सिद्दीकी की सीट भी दल बदल के बाद खाली है.

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बीजेपी नेताओं में उपमुख्यमंत्री दिनेश शर्मा, यूपी के प्रदेश अध्यक्ष स्वतंत्र देव सिंह और राज्य के बीजेपी उपाध्यक्ष लक्ष्मण आचार्य का कार्यकाल 30 जनवरी को पूरा हो रहा है. उच्च सदन की एक सीट के लिए वोटों की संख्या 32 है. भाजपा के पास 309 विधायक हैं, जिसके जरिए वह आसानी से 9 सदस्यों को विधान परिषद भेज सकती है. इसके बाद भी बीजेपी के पास 21 वोट बचे रह जाएंगे. इसी को लेकर भाजपा की कोशिश सहयोगी दलों के साथ कुछ और समर्थन जुटाकर दसवीं और ग्यारहवीं सीट को जीतने को लेकर सियासी दाव चल रही है. भाजपा को अपना दल के 9 विधायकों का भी समर्थन है. इसलिए उसे अपने 10 वें उम्मीदवार को भी उच्च सदन भेजने में कोई दिक्कत नहीं होगी.

सपा के खाते में एक सीट आना तय है. समाजवादी पार्टी, जिसके पास केवल 49 विधायक हैं, वह परिषद में 14 वोट शेष रहते हुए एक सीट को आसानी से बरकरार रख सकती है, जबकि बसपा एक सीट जीतने के लिए भी सख्याबल के आधार पर सक्षम नहीं है. जबकि कांग्रेस, सपा, निर्दलीय और ओम प्रकाश राजभर मिलकर भी एक सीट जीत सकते हैं.
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