कौन हैं बीजेपी से इस्तीफा देने वाली साध्वी सावित्री बाई फुले?

बीजेपी में रहते हुए वह लगातार आरक्षण और दलित उत्पीड़न जैसे मसलों पर पार्टी को सवालों के घेरे में खड़ी करती रही हैं. वह उन चुनिंदा दलित सांसदों में शामिल थीं जो पार्टी से नाराज थे.

ओम प्रकाश | News18Hindi
Updated: December 6, 2018, 5:15 PM IST
कौन हैं बीजेपी से इस्तीफा देने वाली साध्वी सावित्री बाई फुले?
बीजेपी सांसद सावित्री बाई फुले (file photo)
ओम प्रकाश
ओम प्रकाश | News18Hindi
Updated: December 6, 2018, 5:15 PM IST
बहराइच (यूपी) से बीजेपी सांसद साध्वी सावित्री बाई फुले कपड़े तो भगवा पहनती हैं लेकिन 'भगवा ब्रिगेड' लगातार उनके निशाने पर था. इसलिए उनके इस्तीफे का अनुमान राजनीतिक विश्लेषकों ने पहले ही लगा लिया था. बीजेपी में रहते हुए वह लगातार आरक्षण और दलित उत्पीड़न जैसे मसलों पर पार्टी को सवालों के घेरे में खड़ी करती रही हैं. वह उन चुनिंदा दलित सांसदों में शामिल थीं जो पार्टी से नाराज थे. फुले ने कुछ दिन पहले न्यूज18 हिंदी को दिए इंटरव्यू में कहा था कि उनकी सरकार संविधान लागू नहीं कर रही है. (ये भी पढ़ें: बहराइच सांसद सावित्री बाई फुले ने बीजेपी से दिया इस्तीफा, लगाया समाज को बांटने का आरोप)

फुले बीजेपी में दलित महिला चेहरा थीं. छह साल की उम्र में उन्हें विवाह के लिए मजबूर किया गया था, हालांकि उनकी विदाई नहीं हुई थी. बड़े होने पर उन्होंने ससुराल पक्ष वालों को बुलाकर सन्यास लेने की अपनी इच्छा बताई. फिर अपनी छोटी बहन की शादी अपने पति से कराकर वे बहराइच के जनसेवा आश्रम से जुड़ीं.

आठवीं क्लास पास करने पर उन्हें 480 रुपये का वजीफा मिला था, जिसे स्कूल के प्रिंसिपल ने अपने पास रख लिया. इसका सावित्री ने जमकर विरोध किया. फिर स्कूल से उनका नाम काट दिया गया. यहीं से राजनीति की शुरुआत करने वाली साध्वी 2012 में बीजेपी के टिकट पर बलहा (सुरक्षित) सीट से चुनाव जीता. 2014 में उन्हें सांसद का टिकट मिला और वह देश की सबसे बड़ी पंचायत में पहुंच गईं. वो बहुजन समाज पार्टी में रह चुकी हैं.

Savitri Bai Phule, bjp, Bharatiya Janata Party,Bahraich, Lok Sabha election 2019, सावित्री बाई फुले, भारतीय जनता पार्टी, Dalit politics, बीजेपी, Uttar pradesh, Scheduled Castes and Scheduled Tribes‬, ‪Bahujan samaj party, br ambedkar statue,दलित राजनीति, बहराइच, बहुजन समाज पार्टी, बीएसपी, सांसद सावित्री बाई फुले        सावित्री बाई फुले (file photo)

उन्होंने लखनऊ के कांशीराम स्मृति उपवन में 'भारतीय संविधान व आरक्षण बचाओ' रैली आयोजित की. इसमें उन्होंने अपनी ही केंद्र और राज्य सरकार पर तीखे प्रहार किए. मंच से मैदान तक रैली को नीले रंग से रंग दिया था. उस रैली में बीएसपी के संस्थापक कांशीराम का चित्र भी लगाया गया था. आरोप लगाया था कि इस समय पूरे देश में दलित और पिछड़े परेशान हैं. उनका उत्पीड़न बढ़ रहा है.

ये भी पढ़ें: VIDEO-सांसद रहूं ना रहूं संविधान से छेड़छाड़ नहीं होने दूंगी: BJP सांसद

उन्होंने कहा था कि आरक्षण को लेकर जो संविधान में व्यवस्था है, सरकार उसे लागू करे, जिससे बहुजन समाज आगे बढ़े और गरीबी दूर हो. आरक्षण पूरी तरीके से लागू हो. पिछड़ी जातियों को अब भी 27 फीसदी आरक्षण नहीं मिल रहा है. आरक्षित वर्ग के पद नहीं भरे जा रहे हैं. इसकी वजह से दलितों और पिछड़ों की मुश्किलें बढ़ रही हैं. मैं संविधान लागू करने की मांग को लगातार संसद में उठाते आई हूं. मैंने इसीलिए अब मैदान में आने का फैसला किया.
Loading...

चाहे डॉ. बीआर आंबेडकर की मूर्तियां तोड़ने की घटनाएं हों,  दलित को घोड़ी पर नहीं चढ़ने देने के मामले हों, हनुमान जी को दलित बताने का मामला हो उन्होंने सब पर बेबाकी से बयान दिए.

ये भी पढ़ें: BJP सांसद सावित्री फुले ने 'भगवान राम' को बताया मनुवादी, कहा- वंचित थे हनुमान
Loading...
पूरी ख़बर पढ़ें अगली ख़बर