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वाराणसी में बढ़ीं तेज बहादुर यादव की मुश्किलें, शालिनी ने वापस नहीं लिया है नामांकन, मान-मनौव्वल शुरू!

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Updated: April 30, 2019, 10:27 PM IST
वाराणसी में बढ़ीं तेज बहादुर यादव की मुश्किलें, शालिनी ने वापस नहीं लिया है नामांकन, मान-मनौव्वल शुरू!
शालिनी यादव (file photo)

कौन हैं शालिनी यादव जिनकी वाराणसी से टिकट काटकर समाजवादी पार्टी ने बीएसएफ के बर्खास्त जवान तेज बहादुर यादव को दी

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  • Last Updated: April 30, 2019, 10:27 PM IST
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बीएसएफ के पूर्व जवान तेज बहादुर के लिए समाजवादी पार्टी  (सपा) ने जिस शालिनी यादव का टिकट काटा है वो पूर्वांचल के बड़े राजनीतिक घराने से संबंध रखती हैं. वो अब भी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के लोकसभा क्षेत्र वाराणसी से उम्मीदवार हैं. क्योंकि उन्होंने अभी नामांकन वापस नहीं लिया है. उनका अपना जनाधार है. इसलिए सपा के नए उम्मीदवार और बीएसएफ के बर्खास्त जवान तेज बहादुर यादव की मुश्किलें बढ़ती नजर आ रही हैं. शायद इसीलिए पार्टी अब शालिनी के मान-मनौव्वल करने में जुटी हुई है.  शालिनी यादव के पति अरुण यादव ने न्यूज18 हिंदी को बताया कि उनका परिवार सपा मुखिया के संपर्क में है. टिकट कटने जैसी कोई बात नहीं है. तेज बहादुर भी पार्टी के उम्मीदवार हैं और शालिनी भी.  जिसका नामांकन वैध पाया जाएगा वही प्रत्याशी होगा.

शालिनी यादव पूर्वांचल में कांग्रेस के दिग्गज नेता रहे श्यामलाल यादव की बहू हैं. श्यामलाल यादव 1984 में कांग्रेस के टिकट पर वाराणसी से लोकसभा सदस्य चुने गए थे. वो राज्यसभा के उप सभापति रहे थे. श्यामलाल 1957 से 1962 और 1967 से 1968 तक यूपी विधानसभा के सदस्य रहे. वो केंद्रीय कृषि मंत्री भी रहे थे. कुल मिलाकर शालिनी बनारस के एक बड़े कांग्रेसी परिवार से ताल्लुक रखती हैं. वो 22 अप्रैल को ही कांग्रेस से इस्तीफा देकर सपा में शामिल हुई थीं.

(ये भी पढ़ें: लोकसभा चुनाव 2019: पांचवें चरण में होगी बीजेपी, कांग्रेस की बड़ी परीक्षा, जीती सीटें बचाने की चुनौती!)

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शालिनी ने वाराणसी के मेयर पद का चुनाव लड़ा था और उन्हें सवा लाख वोट मिले थे. हालांकि वो हार गई थीं. वो बनारस हिंदू यूनिवर्सिटी से अंग्रेजी में ग्रेजुएट हैं. सवाल ये है कि क्या शालिनी यादव की नाराजगी सपा की परेशानी बढ़ा रही है?

वाराणसी के वरिष्ठ पत्रकार विजय विनीत बता रहे हैं, "समाजवादी पार्टी उनके मान-मनोव्वल में जुटी हुई है, क्योंकि यहां की राजनीति में यह रसूखदार परिवार है. वो नामांकन वापस नहीं लेंगी तो तेज बहादुर की मुश्किलें बढ़ेंगी. शालिनी का टिकट काटना एक तरह से महिलाओं का अपमान भी है. आप नामांकन कक्ष में खड़ी हुई महिला से टिकट वापस ले लेते हैं. जबकि पूर्वांचल में वैसे ही बहुत कम महिलाएं मैदान में हैं."

विनीत के मुताबिक, "शालिनी यादव ने अभी अपना नामांकन वापस नहीं लिया है. उन्होंने कहा है कि अगर अखिलेश यादव कहेंगे तो वह अपना नामांकन वापस ले लेंगी, लेकिन अगर पार्टी की तरफ से नहीं कहा जाएगा तो ऐसा नहीं करेंगी. चुनाव लड़ेंगी. इस उलटफेर में बीजेपी का कोई नुकसान नहीं लेकिन सपा का वोट प्रतिशत जरूर कम हो सकता है. क्योंकि शालिनी तेज बहादुर के मुकाबले एक गंभीर प्रत्याशी थीं."
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मालूम हो कि तेज बहादुर ने सोमवार को नामांकन के अंतिम दिन समाजवादी पार्टी के प्रत्याशी के तौर पर पर्चा दाखिल किया. जबकि वो पहले ही निर्दलीय तौर पर भी नामांकन कर चुके थे. इस बारे में जब हमने समाजवादी पार्टी के प्रवक्ता अब्दुल हफीज गांधी से बात की तो उन्होंने कहा कि शालिनी यादव के बारे में मुझे कोई जानकारी नहीं है.

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First published: April 30, 2019, 4:51 PM IST
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