कांग्रेस इस्तीफों के दौर में क्या प्रियंका महासचिव पद छोड़ेंगी ?

अगर प्रियंका महासचिव बनी रहीं तो अगले अध्यक्ष के चुनाव से कैसे गांधी परिवार अलग रह सकेगा

Anil Rai | News18Hindi
Updated: July 8, 2019, 2:18 PM IST
कांग्रेस इस्तीफों के दौर में क्या प्रियंका महासचिव पद छोड़ेंगी ?
प्रियंका गांधी को पूर्वी उत्तर प्रदेश का जिम्मा सौंपा गया था
Anil Rai
Anil Rai | News18Hindi
Updated: July 8, 2019, 2:18 PM IST
कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी के इस्तीफे के बाद कांग्रेस में इस्तीफों का दौर जारी है. हरीश रावत, दीपक वाबरिया और ज्योतिर्रादित्य सिंधिया समेत तीन महासचिव इस्तीफा दे चुके हैं. जबकि मिलिंद देवड़ा, कमलनाथ जैसे प्रदेश अध्यक्ष भी अपने-अपने पदों से इस्तीफे दे चुके हैं. इसके अलावा भी कुछ नेताओं ने इस्तीफे की पेशकश भी की है, लेकिन इनमें सबसे अहम सवाल प्रियंका के महासचिव पद से इस्तीफे को लेकर है, क्योंकि राहुल ने जब कांग्रेस के प्रदर्शन के आधार पर इस्तीफा दिया है और बाकी नेताओं से इस्तीफे की उम्मीद कर रहे हैं तो क्या उनको ऐसी उम्मीद अपनी बहन प्रियंका से नहीं होगी. प्रियंका के प्रभार वाले पूर्वी उत्तर प्रदेश में कांग्रेस का प्रदर्शन बहुत खऱाब रहा है. यहां तक कि गांधी परिवार के गढ़ से भी कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी को हार का मुंह देखना पड़ा. ये क्षेत्र भी प्रियंका के प्रभार वाली सीटों में ही थी.

प्रियंका महासचिव रहीं तो गांधी परिवार अध्यक्ष के चुनाव से कैसे अलग रहेगा
ये सवाल इसलिए बड़ा है क्योंकि सोनिया और राहुल गांधी ये कह चुके हैं कि इस बार कांग्रेस अध्यक्ष के चुनाव से गांधी परिवारा दूर रहेगा. लेकिन कांग्रेस महासचिव रहते हुए प्रियंका कांग्रेस कार्यसमिति में रहेगी ऐसे में गांधी परिवार के अध्यक्ष के चुनाव से दूर रहने के दावे का क्या होगा? हालांकि कांग्रेस में एक धड़ा प्रियंका को अध्यक्ष बनाने की मांग कर रहा है. न्यूज18 से बात करते हुए कांग्रेस नेता प्रमोद कृष्ण्म् ने प्रियंका गांधी वाड्रा को कांग्रेस अध्यक्ष बनाने की मांग की लेकिन फिलहाल ये मांग उतनी बड़ी होती नहीं दिख ही है, जैसा राहुल गांधी को अध्यक्ष बनाने को लेकर की गई थी.

क्या गांधी परिवार से बाहर आए बिना मोदी का मुकाबला कर पाएगी कांग्रेस ?

वरिष्ठ पत्रकार अंबिका नंद सहाय का मानना है कि गांधी परिवार की जद से बाहर निकले बिना कांग्रेस सक्रिय विपक्ष की भूमिका नहीं निभा सकती. सहाय का मानना है कि आजादी के बाद से ही लगातार नेहरु- गांधी परिवार की पकड़ जनता पर कमजोर होती जा रही , लेकिन मजबूत विकल्प नहीं होने के काराण जनता एक बार फिर कांग्रेस पर भरोसा कर लेती थी लेकिन अब हाताल ऐसे नहीं है, बीजेपी और नरेन्द्र मोदी जैसा विकल्प जनता के पास है ऐसे में गांधी परिवार के हाथ में रहते हुए कांग्रेस की वापसी मुश्किल है.

कब-कब कमजोर हुआ है गांधी परिवार ?
सहाय का कहना है कि पहली बार चीन के भारत पर हमले और उसका मजबूती से जबाब न देने कारण देश की जनता का नेहरु पर विश्वास कम हुआ लेकिन उस समय मजबूत विकल्प नहीं थी. दूसरी बार इंदिरा गांधी ने जब इमरजेंसी लगाई तब भी देश की जनता का विश्वास गांधी परिवार से टूट गया और कांग्रेस को सरकार से बाहर किया, लेकिन विपक्ष आपस में ही लड़ता रहा. नतीजतन गांधी परिवार की वापसी हो गई. इंदिरा गांधी की मौत के बाद राजीव के साथ देश की जनता आई लेकिन भी उसे संभाल नहीं सके. जनता ने कांग्रेस के बाहर का रास्ता दिखाया लेकिन विपक्ष एक बार फिर सत्ता संभाल नहीं पाया.
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वे कहते हैं कि सोनिय गांधी के हाथ में कांग्रेस के आते ही कांग्रेस से हर उस नेता को बाहर का रास्ता दिखा दिया जिसके अपना वोट बैंक था. कुछ ऐसा ही इंदिरा गांधी ने किया था लेकिन तब हालात अलग थे. ममता बनर्जी, शरद पवार, पी ए संगमा, जगन मोहन रेड्डी जैसा नेताओं का कांग्रेस ने सिर्फ गांधी परिवार के आगे समर्पण न करने के कारण का बाहर का रास्ता दिखा दिया गया. अब हालात ऐसे हैं कि कांग्रेस में ऐसा कोई नेता ही नहीं बचा जिसका अपना जनाधार हो. इन हालात में गांधी परिवार के हाथ में काग्रेस के रहते मोदी जैसे जननेता का विरोध संभव नहीं है. अब सवाल ये है कि राहुल गांधी और गांधी परिवार के बाकी लोग चाहते हैं कि देश में कांग्रेस मजबूत हो, यदि इसका जबाब है तो सबसे पहले कांग्रेस को गांधी परिवार की पार्टी के टैग से बाहर निकालना होगा.

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राहुल गांधी के इस्तीफे के बाद कांग्रेस में इस नेता को अध्यक्ष बनाने की उठने लगी मांग

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First published: July 8, 2019, 2:18 PM IST
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